Aakash Waghmare
7 Feb 2026
मंगलुरु। सियासी हलचल के बीच कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद को लेकर बड़ा लेकिन संतुलित बयान दिया है। शनिवार को उन्होंने साफ कहा कि वह मुख्यमंत्री कब बनेंगे, इसका फैसला समय करेगा और कांग्रेस आलाकमान जो भी निर्णय लेगा, उसे पूरी तरह स्वीकार किया जाएगा। उनके इस बयान को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके बीच चल रही कथित सत्ता खींचतान के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।
जब शिवकुमार से पूछा गया कि आम लोग, विधायक और समर्थक उन्हें मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “लोगों, विधायकों, आप (मीडिया) और सभी की यही इच्छा है, लेकिन हमें पार्टी के निर्देशों का पालन करना चाहिए।” उनके इस जवाब में न तो इंकार था और न ही जल्दबाजी—बस राजनीतिक धैर्य की झलक थी।
राज्य बजट के बाद नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों पर शिवकुमार ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया। जब उनसे पूछा गया कि क्या बजट के बाद उनके मुख्यमंत्री बनने की संभावना है, तो उन्होंने बस इतना कहा—समय ही बताएगा। इस एक पंक्ति ने सियासी गलियारों में चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
दूसरी ओर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र ने साफ कहा कि उनके पिता अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। यतींद्र का दावा है कि पार्टी आलाकमान की ओर से इसके संकेत मिल चुके हैं। इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी राजनीति और ज्यादा उजागर हो गई है।
चिकमंगलुरु दौरे के दौरान दलित संगठनों द्वारा गृह मंत्री जी. परमेश्वर को मुख्यमंत्री बनाने की मांग पर डीके शिवकुमार ने चौंकाने वाला लेकिन समावेशी जवाब दिया। उन्होंने कहा, “इसमें क्या गलत है?” शिवकुमार ने जोड़ा कि समर्थक अपने नेता को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहते हैं और उनकी भावनाओं को रोका नहीं जा सकता।
कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच खींचतान कोई नई बात नहीं है। चुनाव से पहले ‘पावर शेयरिंग’ के फॉर्मूले की चर्चाएं थीं, लेकिन सरकार बनने के बाद तस्वीर साफ नहीं हुई। सिद्धारमैया अनुभव और सामाजिक समीकरणों के दम पर मजबूत हैं, जबकि शिवकुमार संगठन, विधायकों और जमीनी पकड़ के सहारे दबाव बनाए हुए हैं। सार्वजनिक मंचों पर भले ही दोनों संयम दिखाते हों, लेकिन बयानबाजी और समर्थकों की सक्रियता बताती है कि सत्ता की यह रस्साकशी अभी लंबी चलने वाली है।