भोपाल। इंदौर के दिनेश प्रजापत की नाराज़गी सिर्फ गुस्सा नहीं थी, बल्कि एक बेटे की बेबसी थी, जो अपनी असहाय मां के लिए न्याय मांग रहा था। कलेक्टर कार्यालय में मां के साथ खड़े दिनेश का वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो उसकी आवाज़ हर संवेदनशील दिल तक पहुंच गई। वीडियो में दिनेश चीखते हुए कहते दिखे कि जब काम ही नहीं हो सकता, तो “तुम काहे के कलेक्टर हो।” उन्होंने यह भी बताया कि उनकी मां आंखों से देख नहीं सकतीं, इसके बावजूद उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
इस वायरल वीडियो के बाद मामला सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहा। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खुद इस प्रकरण का संज्ञान लिया और तत्काल हस्तक्षेप किया। एक बेटे की गुहार और एक मां की पीड़ा ने प्रशासन को झकझोर दिया, जिसके बाद दिनेश प्रजापत के तीन अहम काम सीधे मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे किए गए।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए लिखा, इंदौर में हुए इस प्रकरण को संज्ञान लेते हुए दिनेश प्रजापत और उनकी माता रामप्यारी बाई की समस्या का संवेदनशीलता के साथ समाधान किया गया है। परिस्थितियों को देखते हुए तत्काल KYC कर पेंशन प्रक्रिया शुरू कराई गई और अरविंदो अस्पताल में उपचार की व्यवस्था की गई है। परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान करने के साथ ही BLO की तरफ से मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया की जा रही है।
मुख्यमंत्री द्वारा साझा किए गए वीडियो में दिनेश प्रजापत भावुक नजर आए। वह कहते दिखे कि मुख्यमंत्री ने उनकी मां का पूरा इलाज शुरू करवा दिया है। सालभर से रुकी हुई पेंशन भी अब मिल गई है और मां की पेंशन फिर से चालू हो गई है। एक बेटे की आंखों में राहत और चेहरे पर संतोष साफ देखा जा सकता है।
सोशल मीडिया पर एक यूजर ने लिखा कि असली नेता वही है जो जरूरत पड़ने पर काम आए। बाकी नेताओं को भी आपसे सीखना चाहिए। यह प्रतिक्रिया सिर्फ एक नेता की तारीफ नहीं, बल्कि उस भरोसे की झलक है, जो आम लोग संवेदनशील शासन से करना चाहते हैं।