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CG News :बस्तर में 1.61 करोड़ रुपए के इनामी 51 नक्सलियों ने किया सरेंडर

छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु एवं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दिन शनिवार को बस्तर मंडल में 1.61 करोड़ रुपए के इनामी 51 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें 34 महिलाएं शामिल हैं।  
बस्तर में 1.61 करोड़ रुपए के इनामी 51 नक्सलियों ने किया सरेंडर
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    रायपुर। छत्तीसगढ़ में बस्तर मंडल के दो जिलों में शनिवार को कुल 1.61 करोड़ रुपए के इनामी 51 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। यह आत्मसमर्पण ऐसे समय हुआ आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 34 महिलाएं शामिल हैं। बस्तर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने बताया कि बस्तर पुलिस की 'पूना मारगेम पुनर्वास पहल' के तहत बीजापुर जिले में 20 महिलाओं समेत 30 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है जबकि पड़ोसी सुकमा जिले में 14 महिलाओं समेत 21 अन्य नक्सली मुख्यधारा में शामिल हो गए। उन्होंने कहा कि उग्रवादियों ने राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर यह कदम उठाया है।

    राष्ट्रपति और केंद्रीय गृह मंत्री छत्तीसगढ़ के दौरे पर

    यह आत्मसमर्पण उस समय सामने आया है जब बस्तर में ‘बस्तर पंडम 2026’ उत्सव का उद्घाटन जगदलपुर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तीन दिवसीय दौरे पर रायपुर पहुंचे। आत्मसमर्पण की यह लहर छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में सरकार की रणनीति को मजबूती देती दिख रही है। ऐसे अभियान और पुनर्वास कार्यक्रमों के चलते स्थानीय नक्सलियों में हिंसा छोड़कर शांतिपूर्ण जीवन अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति सुधरने की उम्मीद और बढ़ गई है।

    2025-26 में एक हजार से ज्यादा का सरेंडर

    छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ जारी अभियान के परिणामस्वरूप 2025 में हजार से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जो पिछले वर्षों की तुलना में सबसे अधिक है। पुलिस डेटा के अनुसार, 2025 में राज्य में करीब 1,040 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए।  मोदी सरकार और राज्य प्रशासन की संयुक्त रणनीतियों से मार्च 2026 तक नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। इसी दिशा में 2025 के दौरान बड़े स्तर पर आत्मसमर्पण देखने को मिला, जिसमें स्थानीय कमांडरों और महिला नक्सलियों की संख्या भी शामिल है। आत्मसमर्पण की यह प्रवृत्ति संकेत देती है कि सुरक्षा बलों के दबाव और पुनर्वास नीतियों के प्रभाव से नक्सल संगठन कमजोर हो रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में शांति की स्थिति स्थापित हो रही है।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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