Aakash Waghmare
7 Feb 2026
नई दिल्ली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी एक बार फिर कानूनी बहस के केंद्र में हैं। मामला उनके भारतीय नागरिक बनने से पहले मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के आरोपों से जुड़ा है। इस पूरे विवाद पर अब उन्होंने राउज एवेन्यू कोर्ट में अपना लिखित जवाब दाखिल कर दिया है। सोनिया गांधी ने अपने जवाब में पुनर्विचार याचिका को न केवल तथ्यहीन बताया, बल्कि इसे ओछी राजनीति से प्रेरित और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग भी करार दिया है। अदालत अब इस मामले में 21 फरवरी को अगली सुनवाई करेगी।
स्पेशल जज (CBI) विशाल गोगने की अदालत में दाखिल जवाब में सोनिया गांधी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उनके जवाब के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं-
आरोप अनुमान और अफवाहों पर आधारित
सोनिया गांधी ने कहा कि शिकायतकर्ता ने किसी प्रामाणिक सरकारी रिकॉर्ड का हवाला नहीं दिया। आरोप मीडिया रिपोर्ट्स, निजी धारणाओं और अनुमानों पर आधारित हैं।
फर्जी दस्तावेज का कोई सबूत नहीं
उनके अनुसार, याचिका में किसी एक भी दस्तावेज को जाली या गलत साबित नहीं किया गया। न ही यह बताया गया कि कौन-सा दस्तावेज कैसे फर्जी है।
नागरिकता केंद्र सरकार का विषय
सोनिया गांधी ने कोर्ट को बताया कि नागरिकता से जुड़े सभी मामले पूरी तरह केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
वोटर लिस्ट चुनाव आयोग की जिम्मेदारी
मतदाता सूची बनाना, अपडेट करना या नाम हटाना भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की कानूनी जिम्मेदारी है। इसमें किसी व्यक्ति की निजी भूमिका नहीं होती।
आपराधिक अदालत का दखल गलत
उन्होंने कहा कि अगर कोई आपराधिक अदालत किसी निजी शिकायत के आधार पर ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करती है, तो यह चुनावी प्रक्रिया में दखल माना जाएगा।
राजनीतिक दुर्भावना का आरोप
जवाब में याचिका को राजनीतिक रूप से प्रेरित, दुर्भावनापूर्ण और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया गया है।
यह विवाद उस आरोप से शुरू होता है, जिसमें कहा गया कि सोनिया गांधी का नाम 1980 की नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में दर्ज था, जबकि उन्होंने 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। सवाल यह उठाया गया कि जब वह उस समय भारतीय नागरिक नहीं थीं, तो मतदाता सूची में उनका नाम किस आधार पर शामिल किया गया।
इस मामले में दावा किया गया कि,
इन्हीं बिंदुओं को आधार बनाकर याचिका दायर की गई।
यह याचिका वकील विकास त्रिपाठी की ओर से दाखिल की गई थी। उन्होंने मजिस्ट्रेट कोर्ट से सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच कराने की मांग की थी। याचिका में आशंका जताई गई कि, कहीं नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल तो नहीं किया गया।
11 सितंबर 2025 को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACMM) वैभव चौरसिया ने इस याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट का मानना था कि, शिकायत में ठोस सबूतों की कमी है। आरोप अनुमानों और अपुष्ट जानकारियों पर आधारित हैं। इसके बाद याचिकाकर्ता ने इस आदेश को सेशन कोर्ट में पुनर्विचार याचिका (Revision Petition) के जरिए चुनौती दी।
सेशन कोर्ट ने 9 दिसंबर 2025 को सोनिया गांधी को नोटिस जारी किया। इसके बाद अब राउज एवेन्यू कोर्ट में इस केस की सुनवाई चल रही है। सोनिया गांधी की ओर से अदालत में विस्तृत लिखित जवाब दाखिल किया गया है।
1980: वोटर लिस्ट में नाम शामिल होने का दावा
1982: नाम हटाए जाने का आरोप
30 अप्रैल 1983: भारतीय नागरिकता प्राप्त
11 सितंबर 2025: मजिस्ट्रेट कोर्ट ने याचिका खारिज की
9 दिसंबर 2025: सेशन कोर्ट ने नोटिस जारी किया
फरवरी 2026: सोनिया गांधी ने लिखित जवाब दाखिल किया
21 फरवरी 2026: अगली सुनवाई
इस मामले ने राजनीतिक रंग तब ले लिया जब भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी दावा किया कि सोनिया गांधी का नाम नागरिकता से पहले दो बार वोटर लिस्ट में शामिल किया गया।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि, यह मामला चुनावी कानून के स्पष्ट उल्लंघन का उदाहरण है। उन्होंने इसे राहुल गांधी के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) विरोध से भी जोड़ा।
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, वोटर लिस्ट से जुड़े विवाद आमतौर पर चुनाव आयोग के स्तर पर सुलझाए जाते हैं। आपराधिक जांच तभी संभव है जब ठोस सबूत सामने हों। केवल आरोप या मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर एफआईआर दर्ज करना मुश्किल होता है।