छत्तीसगढ़ में ऊर्जा क्षेत्र में 5.60 लाख करोड़ का निवेश, 2030 तक 15 हजार मेगावाट हरित बिजली बनाने का लक्ष्य, CM साय ने वैश्विक निवेशकों को दिया न्योता

रायपुर: छत्तीसगढ़ अब देश के ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाने की तैयारी में है। प्रदेश में अगले पांच वर्षों के दौरान ऊर्जा क्षेत्र में करीब 5.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं सामने आई हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो-2026 में प्रदेश की ऊर्जा क्षमता का खाका वैश्विक निवेशकों के सामने रखा। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक हरित ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 3 हजार मेगावाट से बढ़ाकर 15 हजार मेगावाट करना है। इसके साथ ही बिजली की कुल मांग में ग्रीन एनर्जी की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत से अधिक करने की तैयारी है।
भारत मंडपम में PM मोदी ने किया वैश्विक ऊर्जा सम्मेलन का शुभारंभ
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 2 से 5 नवंबर तक आयोजित चार दिवसीय भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो-2026 का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस वैश्विक आयोजन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, निवेशक, नीति निर्माता और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में आयोजित उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक में भाग लिया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की ऊर्जा नीति, उपलब्ध संसाधनों और भविष्य की परियोजनाओं की जानकारी देते हुए देश-विदेश के निवेशकों को प्रदेश में निवेश करने का आमंत्रण दिया। इस अवसर पर केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी और केंद्रीय विद्युत एवं नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक भी उपस्थित रहे।
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5.60 लाख करोड़ का निवेश, ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा विस्तार
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत 23,923 मेगावाट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में लगभग 1.33 लाख करोड़ रुपये निवेश की योजना है। वहीं, ताप विद्युत उत्पादन क्षमता के विस्तार के लिए करीब 3.27 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं हैं। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा सहित विभिन्न ऊर्जा परियोजनाओं में लगभग 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है। सरकार की नजर केवल बिजली उत्पादन पर नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, आधुनिक तकनीक, औद्योगिक विस्तार और रोजगार के नए अवसरों पर भी है।
2030 तक 15 हजार मेगावाट ग्रीन एनर्जी का लक्ष्य
छत्तीसगढ़ की ऊर्जा विकास योजना का सबसे बड़ा लक्ष्य प्रदेश की हरित ऊर्जा क्षमता में पांच गुना तक वृद्धि करना है। वर्तमान में करीब 3 हजार मेगावाट की हरित ऊर्जा क्षमता को वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 15 हजार मेगावाट करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके साथ ही राज्य की कुल बिजली मांग में हरित ऊर्जा की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 45 प्रतिशत से अधिक करने की दिशा में काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वर्ष 2030 तक गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से 500 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है। इस राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा करने में छत्तीसगढ़ महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

12,300 मेगावाट की 10 पंप स्टोरेज परियोजनाएं, 65 हजार करोड़ का निवेश
बिजली की बढ़ती मांग और निर्बाध आपूर्ति को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में कुल 12,300 मेगावाट क्षमता की 10 पंप स्टोरेज जल विद्युत परियोजनाओं की पहचान की गई है। इनमें लगभग 65 हजार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। इसके अलावा अगले दो वर्षों में 10 हजार मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली स्थापित करने की योजना है। राजनांदगांव में 100 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना के साथ 40 मेगावाट/120 मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी भंडारण प्रणाली पहले से संचालित है। बिजली स्टोरेज पर बड़ा दांव इन परियोजनाओं से सौर एवं अन्य नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग और बिजली आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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छत्तीसगढ़ का पहला सोलर गांव बना खैरा, 141 घरों में बिजली की व्यवस्था
हरित ऊर्जा के क्षेत्र में राजनांदगांव जिले का खैरा गांव छत्तीसगढ़ के लिए मॉडल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि गांव के सभी 141 घरों की छतों पर 2-2 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल लगाए गए हैं। इनसे कुल 282 किलोवाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। खास बात यह है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्मित 93 घरों में भी सौर ऊर्जा से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए ग्रामीणों को कोई खर्च नहीं करना पड़ा है।
1.26 लाख सोलर रूफटॉप और 1.66 लाख सौर सिंचाई पंप
छत्तीसगढ़ में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं और किसानों तक सौर ऊर्जा पहुंचाने के लिए भी योजनाओं का विस्तार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत प्रदेश में अब तक लगभग 1.26 लाख सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं, प्रदेश में 1.66 लाख सौर सिंचाई पंपों के माध्यम से करीब 1.94 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई की जा रही है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत भी कुल 395 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना है। इससे किसानों को सिंचाई के लिए स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने और पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
बायोगैस, एथेनॉल और ग्रीन हाइड्रोजन में भी निवेश का बड़ा अवसर
छत्तीसगढ़ में कृषि अवशेष, गोबर और अन्य जैविक संसाधनों की उपलब्धता को देखते हुए बायो एनर्जी क्षेत्र में भी बड़ी संभावनाएं हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य में कंप्रेस्ड बायोगैस, बायो-एथेनॉल और ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके तहत कुल 80 मीट्रिक टन क्षमता वाले आठ कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। इन परियोजनाओं में लगभग 800 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त निजी निवेशकों से करीब 6 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव भी प्राप्त हुए हैं, जिन पर प्रक्रिया जारी है।
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4,200 मेगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता की भी तैयारी
ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक विस्तार के लिए छत्तीसगढ़ सरकार परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं की संभावनाओं पर भी काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में लगभग 4,200 मेगावाट क्षमता के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों सहित विभिन्न ऊर्जा परियोजनाओं में करीब 1.60 लाख करोड़ रुपये के निवेश की परिकल्पना की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य औद्योगिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है, ताकि प्रदेश की ऊर्जा क्षमता का अधिकतम उपयोग हो और रोजगार के नए अवसर पैदा हों।
वैश्विक निवेशकों के सामने छत्तीसगढ़ की ऊर्जा ताकत का प्रदर्शन
सम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के स्टॉल का अवलोकन किया। यहां प्रदेश की प्रमुख ऊर्जा परियोजनाओं, नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों, आधुनिक तकनीक और निवेश की संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया। मुख्यमंत्री ने स्टॉल पर मौजूद अधिकारियों से परियोजनाओं की जानकारी ली। साथ ही देश-विदेश से पहुंचे निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से चर्चा कर प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, उपलब्ध संसाधनों और ऊर्जा अधोसंरचना की जानकारी साझा की। उन्होंने निवेशकों को आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार ऊर्जा क्षेत्र में नई परियोजनाओं की स्थापना और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
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130 से अधिक देशों की भागीदारी, 9 देश और समूह कंट्री पार्टनर
2 से 5 नवंबर तक आयोजित इस वैश्विक सम्मेलन में 130 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। आयोजन में 40 से अधिक मंत्री, नीति निर्माता, निवेशक और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया, डेनमार्क, यूरोपीय संघ, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम सहित नौ देश एवं समूह कंट्री पार्टनर के रूप में शामिल हैं। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ सहित 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने अपनी ऊर्जा क्षमता और निवेश की संभावनाओं को प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह सहित छत्तीसगढ़ के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।




















