6 साल की उम्र में फिल्मों में रखा कदम, आज सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में शामिल हैं कमल हासन

मुंबई। कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जो सिर्फ अपनी फिल्मों से नहीं, बल्कि अपने काम करने के अंदाज से भी लोगों के दिलों में जगह बना लेते हैं। कमल हासन भी ऐसे ही कलाकार हैं। छह साल की उम्र में फिल्मी सफर शुरू करने वाले कमल आज भारतीय सिनेमा का बड़ा नाम हैं। उन्होंने अपने करियर में कई ऐसे किरदार निभाए, जिन्हें दर्शक आज भी याद करते हैं। कभी मासूम बच्चे के रूप में तो कभी गंभीर और दमदार किरदार में उन्होंने हर बार अपनी काबिलियत दिखाई। अभिनय के अलावा उन्होंने फिल्म निर्देशन, कहानी लेखन और निर्माण में भी अपनी पहचान बनाई।
छह साल की उम्र में मिली पहली फिल्म
कमल हासन का जन्म 7 नवंबर 1954 को तमिलनाडु के परमकुडी में हुआ था। उनके पिता चाहते थे कि उनके बच्चों में से कोई एक फिल्मों में अपना करियर बनाए। इसी वजह से उन्होंने कमल को अभिनय की दुनिया में लाने का फैसला किया। साल 1960 में आई फिल्म 'कलाथुर कन्नम्मा' से उन्होंने बतौर बाल कलाकार शुरुआत की। फिल्म में उनके अभिनय को दर्शकों ने काफी पसंद किया। इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। इसके बाद उन्होंने कुछ और फिल्मों में काम किया, लेकिन फिर करीब नौ साल तक फिल्मों से दूरी बना ली।
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दक्षिण भारतीय फिल्मों से बनाई खास पहचान
साल 1973 में कमल हासन को मशहूर फिल्मकार के. बालचंदर की फिल्म 'अरंगेतरम' में काम करने का मौका मिला। इसके बाद 1975 में आई 'अपूर्वा रागंगल' उनके करियर की अहम फिल्म साबित हुई। साल 1977 में रिलीज हुई '16 वयथिनिले' की सफलता ने उन्हें बड़ा कलाकार बना दिया। इस दौरान उन्होंने नृत्य की ट्रेनिंग भी ली और कुछ फिल्मों में सहायक डांस निर्देशक के रूप में काम किया। धीरे-धीरे उनका नाम दक्षिण भारतीय सिनेमा के चर्चित कलाकारों में शामिल हो गया।
'एक दूजे के लिए' से हिंदी फिल्मों में मिली पहचान
कमल हासन ने साल 1981 में फिल्म 'एक दूजे के लिए' से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इस फिल्म में उनके अभिनय को काफी पसंद किया गया। इसके बाद 1983 में आई 'सदमा' ने हिंदी दर्शकों के बीच उनकी पहचान और मजबूत कर दी। यह फिल्म उनकी तमिल फिल्म 'मूंद्रम पिरई' का हिंदी रूप थी। साल 1985 में उन्होंने 'सागर' में ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया के साथ काम किया। फिल्म भले ही बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही, लेकिन कमल के अभिनय की खूब तारीफ हुई।
एक नहीं, कई किरदारों से जीता दर्शकों का दिल
साल 1987 कमल हासन के करियर का खास साल रहा। फिल्म 'पुष्पक' में उन्होंने बिना बोले अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया। इसी साल आई 'नायकन' में वेलु नायकर के किरदार ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई। इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। साल 1990 की फिल्म 'अप्पू राजा' में उन्होंने तीन अलग-अलग किरदार निभाए। वहीं, 1996 में आई 'इंडियन' में दोहरी भूमिका के लिए उन्हें तीसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
अभिनय के साथ निर्देशन में भी दिखाया हुनर
कमल हासन ने सिर्फ कैमरे के सामने ही नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे भी खूब काम किया। साल 1998 में उन्होंने फिल्म 'चाची 420' का निर्देशन किया और उसमें अभिनय भी किया। साल 2008 की फिल्म 'दशावतारम' में उन्होंने दस अलग-अलग किरदार निभाकर सबको चौंका दिया। इसके बाद 'विश्वरूपम' और 'विक्रम' जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया। साल 2024 में वह 'इंडियन 2' और 'कल्कि 2898 एडी' में नजर आए। अभिनय, लेखन, निर्देशन और फिल्म निर्माण में उनका योगदान उन्हें भारतीय सिनेमा के खास कलाकारों में शामिल करता है।




















