JPSC-JSSC विवाद में बड़ा अपडेट, 14वीं PT रद्द करने पर विचार? 16वें दिन भी जारी छात्रों का आंदोलन

रांची। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है। रांची में JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी बीच 14वीं JPSC PT परीक्षा को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार इस परीक्षा को रद्द करने के विकल्प पर विचार कर रही है। हालांकि, अभी तक सरकार या झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की ओर से परीक्षा रद्द करने का कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। इसलिए फिलहाल इसे संभावित फैसले के तौर पर ही देखा जा रहा है। मामला सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रियाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और चयन प्रक्रिया को ज्यादा पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि जिन परीक्षाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उनकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
14वीं JPSC PT पर क्यों टिकी हैं सबकी नजरें?
14वीं JPSC PT परीक्षा को रद्द करना आंदोलन कर रहे छात्रों की सबसे प्रमुख मांगों में शामिल है। पिछले कुछ समय से परीक्षा के रिजल्ट और चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी विवाद के बीच JPSC कार्यालय में CID और रांची पुलिस की ओर से कार्रवाई भी की जा चुकी है। मामले की जांच में परीक्षा से जुड़ी प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं के अलग-अलग पहलुओं को देखा जा रहा है। अब सरकार के स्तर पर परीक्षा रद्द करने के विकल्प पर विचार की खबर ने पूरे मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है। अगर सरकार इस पर फैसला लेती है, तो यह आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की बड़ी मांगों में से एक होगी। लेकिन जब तक कोई आधिकारिक आदेश नहीं आता, उम्मीदवारों को परीक्षा रद्द होने की खबर को अंतिम फैसला नहीं मानना चाहिए।
CBI जांच चाहते हैं छात्र, सरकार कर सकती है न्यायिक जांच पर विचार
आंदोलन कर रहे छात्र JPSC और JSSC की कथित अनियमितताओं की जांच CBI और ED जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग कर रहे हैं। छात्रों का तर्क है कि जांच ऐसी एजेंसी से होनी चाहिए जिस पर किसी तरह का राजनीतिक दबाव न हो। वहीं, सूत्रों के मुताबिक सरकार के स्तर पर CID या CBI जांच के बजाय न्यायिक जांच के विकल्प पर सहमति बनाने की कोशिश हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह भी देखना अहम होगा कि सरकार जांच को लेकर छात्रों की मांग मानती है या अपना कोई दूसरा रास्ता चुनती है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के बावजूद अभी किसी अंतिम समाधान पर सहमति नहीं बनी है।
पांच संगठनों से सरकार कर चुकी है बातचीत
आंदोलन को खत्म कराने और छात्रों की मांगों पर सहमति बनाने के लिए सरकार की ओर से बातचीत का सिलसिला जारी है। पिछले दो दिनों में पांच अलग-अलग संगठनों के प्रतिनिधिमंडलों से बातचीत की जा चुकी है। इनमें JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच, JPSC-JSSC न्याय मंच, NSUI, झारखंड छात्र मोर्चा और आदिवासी हॉस्टल के प्रतिनिधि शामिल हैं। बातचीत का उद्देश्य छात्रों की मांगों को समझना और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान तलाशना है। हालांकि, बातचीत के कई दौर के बाद भी आंदोलन खत्म नहीं हुआ है। छात्रों ने अपनी मांगों पर ठोस निर्णय होने तक प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है।
25 जुलाई से स्टेडियम में चल रहा प्रदर्शन
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC-JSSC Reform Forum और JPSC-JSSC Candidates Forum की ओर से 25 जुलाई से प्रदर्शन किया जा रहा है। छात्र भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। इस आंदोलन में अब कई छात्र संगठनों की भागीदारी देखने को मिल रही है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA ने भी अपना अलग मंच बनाया है। संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी रांची में चल रहे प्रदर्शन में शामिल हुई थीं और 14वीं JPSC तथा JSSC-CGL परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।
आंदोलन में नेहा बोरा भी हुईं शामिल
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने रांची के प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर आंदोलन कर रहे छात्रों का समर्थन किया। इसी दौरान 7 अगस्त को प्रदर्शन के दौरान नेहा बोरा पर स्याही फेंके जाने की घटना भी सामने आई थी। इस घटना ने आंदोलन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को और तेज कर दिया। छात्र संगठनों का कहना है कि उनका आंदोलन भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है।
JPSC विवाद पहले भी पहुंच चुका है जांच तक
14वीं JPSC परीक्षा को लेकर विवाद नया नहीं है। इससे पहले भी कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई सामने आ चुकी है। 28 जुलाई को JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से भी CID ने पूछताछ की थी। उनसे परीक्षा के संचालन, प्रश्नपत्र, रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया और आउटसोर्स एजेंसी के चयन समेत कई मुद्दों पर सवाल किए गए थे।
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10 अगस्त को विधानसभा मार्च की तैयारी
सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के बावजूद अगर उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं होता है तो आंदोलन और तेज हो सकता है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने 10 अगस्त को विधानसभा की ओर मार्च करने की चेतावनी दी है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, बातचीत के कई दौर बेनतीजा रहने के बाद छात्रों ने विधानसभा मार्च की तैयारी भी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट फैसला नहीं करती, आंदोलन जारी रहेगा।












