जापान ने बदला शाही कानून :दूर के पुरुष रिश्तेदारों को गोद लेकर बचाएंगे राजवंश, महिलाओं के नियम में भी हुए बदलाव?

टोक्यो। जापान की संसद ने शाही परिवार से जुड़े उत्तराधिकार कानून में बड़ा बदलाव किया है। नए कानून के तहत अब शाही परिवार दूर के पुरुष रिश्तेदारों को गोद लेकर उन्हें दोबारा शाही परिवार में शामिल कर सकेगा। साथ ही, अब शाही परिवार की महिलाएं आम नागरिक से शादी करने के बाद भी अपना शाही दर्जा और आधिकारिक जिम्मेदारियां नहीं खोएंगी। हालांकि, सबसे बड़ा नियम अब भी नहीं बदला है। जापान में सिर्फ पुरुष ही सम्राट बन सकते हैं। इसका मतलब है कि मौजूदा सम्राट नारुहितो की इकलौती बेटी राजकुमारी आइको भविष्य में भी सिंहासन की उत्तराधिकारी नहीं बन पाएंगी।
शाही परिवार में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
जापान का शाही परिवार दुनिया का सबसे पुराना लगातार चलने वाला राजवंश माना जाता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से वह उत्तराधिकार के संकट का सामना कर रहा है। मौजूदा सम्राट नारुहितो की सिर्फ एक बेटी है और कानून के मुताबिक महिलाएं सिंहासन की उत्तराधिकारी नहीं बन सकती। ऐसे में शाही परिवार में पुरुष उत्तराधिकारियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। फिलहाल उत्तराधिकार की कतार में केवल तीन पुरुष सदस्य हैं। इनमें पहले नंबर पर सम्राट के छोटे भाई प्रिंस फुमिहितो, दूसरे नंबर पर उनके बेटे प्रिंस हिसाहितो और तीसरे नंबर पर 90 वर्षीय प्रिंस हिताची हैं। अगर भविष्य में पुरुष उत्तराधिकारी नहीं बढ़े तो राजशाही के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
सरकार ने महिला सम्राट की बजाय दूसरा रास्ता क्यों चुना?
जापान में लंबे समय से महिला को सम्राट बनाने की मांग उठती रही है। कई जनमत सर्वेक्षणों में भी अधिकांश लोगों ने इसका समर्थन किया है। 2024 के एक सर्वे में करीब 90 प्रतिशत लोगों ने महिला सम्राट के पक्ष में राय दी थी।इसके बावजूद सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के परंपरावादी नेताओं ने इस बदलाव का विरोध किया। उनका कहना है कि जापान की करीब 2,000 साल पुरानी राजशाही पुरुष वंश पर आधारित रही है। अगर महिला या उसके बच्चों को उत्तराधिकारी बनाया गया तो यह परंपरा टूट जाएगी। इसी वजह से सरकार ने महिला को सम्राट बनाने के बजाय पुराने शाही परिवार के पुरुष वंशजों को वापस लाने का फैसला किया।
इन लोगों को गोद ले सकेगा शाही परिवार
नए कानून के तहत शाही परिवार किसी भी बच्चे को गोद नहीं ले सकेगा। केवल उन 11 पूर्व शाही शाखाओं के पुरुष वंशजों को ही गोद लिया जा सकेगा, जो कभी जापान के शाही परिवार का हिस्सा थे। दूसरे विश्व युद्ध के बाद इन शाखाओं को शाही परिवार से अलग कर दिया गया था। अब जरूरत पड़ने पर इन्हीं परिवारों के पुरुष सदस्यों को गोद लेकर उत्तराधिकार की लाइन में शामिल किया जा सकेगा।
महिलाओं को भी मिली बड़ी राहत
नए कानून का एक और अहम बदलाव यह है कि अब शाही परिवार की कोई महिला अगर किसी आम नागरिक से शादी करती है, तो उसे अपना शाही दर्जा नहीं छोड़ना पड़ेगा। पहले ऐसा करने पर महिला को शाही परिवार से बाहर होना पड़ता था और वह अपनी सभी आधिकारिक जिम्मेदारियां भी खो देती थी। नए नियम से शाही परिवार में महिलाओं की संख्या बनी रहेगी और वे पहले की तरह सार्वजनिक और आधिकारिक कार्यक्रमों में अपनी भूमिका निभाती रहेंगी।
यह भी पढ़ें: नेपाल : बालेन सरकार ने खारिज किया 1 रुपए के सिक्के से नक्शा हटाने का प्रस्ताव, भारत के इलाके को अपना बताया था
जापान में पहले भी 8 महिलाएं बन चुकी है सम्राट
हालांकि मौजूदा कानून महिलाओं को उत्तराधिकारी बनने की अनुमति नहीं देता, लेकिन जापान के इतिहास में अब तक 8 महिलाएं सम्राट (महारानी) बन चुकी हैं। ये सभी अलग-अलग समय पर तब सिंहासन पर बैठीं, जब कोई योग्य पुरुष उत्तराधिकारी उपलब्ध नहीं था या उत्तराधिकारी की उम्र बहुत कम थी।
इन महिला शासकों को स्थायी उत्तराधिकारी नहीं माना गया। उन्होंने सीमित समय तक राजशाही संभाली और बाद में सत्ता फिर किसी पुरुष सदस्य को सौंप दी गई। उनकी संतान को भी कभी उत्तराधिकार का अधिकार नहीं मिला।
जापान की आखिरी महिला सम्राट महारानी गोसाकुरामाची थीं, जिन्होंने 1762 से 1770 तक शासन किया। उनके बाद पिछले 250 से अधिक वर्षों में जापान में कोई महिला सम्राट नहीं बनी। यही वजह है कि आज भी राजकुमारी आइको की लोकप्रियता के बावजूद वे केवल महिला होने के कारण सिंहासन की उत्तराधिकारी नहीं बन सकतीं।











