नेपाल : बालेन सरकार ने खारिज किया 1 रुपए के सिक्के से नक्शा हटाने का प्रस्ताव, भारत के इलाके को अपना बताया था

काठमांडू। नेपाल की बालेन सरकार ने एक रुपए के विवादित राष्ट्रीय नक्शा हटाने का प्रस्ताव को पास करने से मना कर दिया है। नक्शे में भारत के लिपुलेख, कालापनी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है। नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने पहले प्रस्ताव रखा था कि एक रुपए के सिक्के पर छपे नेपाल के विवादित नक्शे की जगह मुस्तांग के ऐतिहासिक मठ की तस्वीर दिखाई गई। वहीं इस नक्शे को सिक्के से हटाने की चर्चा जैसे ही बाहर होने लगी इसका विरोध शुरू होने लगा।
मंत्रालय ने राष्ट्र बैंक को दिया निर्देश
1 रुपय के सिक्के के विवादित मुद्दे पर मंत्रालय ने नेपाल राष्ट्र बैंक को निर्देश दिया कि डिजाइन में बौध्द मठ के साथ नेपाल का राष्ट्रीय नक्शा भी शामिल किया जाए। वहीं इसके बाद संशोधित प्रस्ताव को दोबारा मंजूरी के लिए भेजा जाए। हालांकि इससे पहले कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि नेपाल सरकार ने एक रुपए के नए सिक्के को मंजूरी दे दी है।
क्या है नेपाल सरकार का मकसद
अधिकारियों के अनुसार, यह प्रस्ताव मौजूदा सरकार बनने से पहले तैयार होना शुरू हो गया था। हालांकि इसका मकसद नेपाल की मुद्रा पर देश की अलग- अलग सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोंहरों को जगह देना शामिल था। मामले में नेपाल राष्ट्र बैंक के एक अधिकारी ने कहा नेपाल के कई नोटों और सिक्कों पर पहले से ही पशुपतिनाथ मंदिर और जानकी मंदिर दैसे हिंदू धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों की तस्वीरें हैं। यह महसूस किया गया कि बौध्द विरासत को पर्याप्त जगह नहीं मिली है। यहीं कारण है कि घर मठ का चुनाव किया गया है, हालांकि इसका ऐतिहासिक महत्व काफी बड़ा है। साथ ही इससे मुस्तांग में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
क्या लागत कम करेगी सरकार
नेपाल राष्ट्र बैंक कैबिनेट के निर्देशानुसार अब नया डिजाइन तैयार करेगा, जिसमें बौद्ध मठ के साथ- साथ राष्ट्रीय नक्शा भी शामिल किया जाएगा। सरकार की अंतिम मंजूरी मिलने का बाद ही नए सिक्कों की ढलाई शुरू करने का काम शुरू होगा। वर्तमान स्थिति की बात करें तो एक रुपय का सिक्का बनाने में दो रुपए से अधिक का खर्चा आता है। साथ ही नेपाल राष्ट्र बैंक एक रुपए के सिक्के की धातु और वजन में भी बदलाव की तैयारी कर रहा है। वर्तमान में जहां एक रुपए का सिक्का बनाने में दो रुपए से ज्यादा का खर्चा आता है। जिससे इसका उत्पान आर्थिक आर्थिक रूप से नुकसान का सौदा बन गया है। नए डिजाइन और कम वजन के जरिए इसके निर्माण की लागत को घटाने का प्रयास किया जा रहा है।
आखिर कैसे तय होता है सिक्के का डिजाइन?
नेपाल राष्ट्र बैंक अधिनियम के मुताबिक, नए नोट या सिक्के का डिजाइन तय करने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाती है। सबसे पहले गवर्नर, इतिहासकार, पुरातत्वविद और भाषाविदों की समिति डिजाइन तैयार करती है। इसके बाद नेपाल राष्ट्र बैंक का बोर्ड इसे मंजूरी देता है। अंतिम स्वीकृति के लिए प्रस्ताव वित्त मंत्रालय के जरिए कैबिनेट के पास भेजा जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत सरकार ने विवादित नक्शे को बनाए रखने का फैसला किया।
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कब शुरू हुआ था विवाद?
भारत-नेपाल सीमा विवाद वर्ष 2020 में तब सामने आया, जब भारत ने उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे तक सड़क का उद्घाटन किया था। इसके विरोध में नेपाल ने मई 2020 में नया राजनीतिक नक्शा जारी किया, जिसमें कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को अपने क्षेत्र का हिस्सा बताया गया।
इसके बाद जून 2020 में नेपाल की संसद ने संविधान संशोधन के जरिए इस नक्शे को आधिकारिक मान्यता दे दी। तभी से यह नक्शा सरकारी दस्तावेजों, स्कूल की किताबों, पासपोर्ट, 100 रुपए के नोट और 1 व 2 रुपए के सिक्कों पर इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी वजह से सरकार ने नए एक रुपए के सिक्के पर भी इसी नक्शे को जारी रखने का फैसला किया।











