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जम्मू-कश्मीर में 6 साल बाद हटा राष्ट्रपति शासन, नई सरकार की शपथ के लिए यह जरूरी

जम्मू-कश्मीर। जम्मू-कश्मीर में नई सरकार के गठन से पहले रविवार देर रात राष्ट्रपति शासन हटाने का आदेश जारी कर दिया गया। गृह मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण से ठीक पहले राष्ट्रपति शासन समाप्त करने का आदेश दिया है। बता दें, 2018 में महबूबा मुफ्ती की सरकार गिरने का बाद 6 महीने के लिए राज्यपाल शासन लगाया गया था। इसके बाद, केंद्र सरकार ने वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया, जो अभी तक बरकरार थी।

10 साल बाद बनी नई सरकार

जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार विधानसभा चुनाव 2014 में हुए थे, जिसमें भाजपा और पीडीपी गठबंधन ने सरकार बनाई थी। हालांकि, 2018 में भाजपा ने महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस ले लिया, जिससे सरकार गिर गई और तब से जम्मू-कश्मीर में केंद्र का शासन लागू था।

नेशनल कॉन्फ्रेंस की जोरदार वापसी

2024 के विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने 42 सीटें, कांग्रेस ने 6 और CPI(M) ने एक सीट पर जीत हासिल की। ये सभी पार्टियां गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रही थी। एनसी प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने चुनावी नतीजों के बाद घोषणा की थी कि उमर अब्दुल्ला मुख्यमंत्री बनेंगे। 10 अक्टूबर को विधायक दल की बैठक में उमर अब्दुल्ला को नेता चुना गया और 11 अक्टूबर को उन्होंने राजभवन जाकर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया। उमर अब्दुल्ला गांदरबल और बडगाम से चुनाव जीते हैं और संभावना है कि वह गांदरबल सीट बरकरार रखेंगे।

जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन का 2018 से अब तक का सफर…

  1. जून 2018- राज्यपाल शासन लागू

महबूबा मुफ्ती सरकार के गिरने के बाद राज्य के संविधान की धारा 92 के तहत जम्मू-कश्मीर में छह महीने के लिए राज्यपाल शासन लागू किया गया था। उस समय अनुच्छेद 370 प्रभावी होने के कारण राष्ट्रपति शासन लगाने से पहले यह प्रक्रिया अनिवार्य थी।

  1. 2019- अनुच्छेद 370 हटने के बाद राष्ट्रपति शासन

31 अक्टूबर 2019 को अनुच्छेद 370 और 35A हटाए जाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने के बाद गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 73 के तहत राष्ट्रपति शासन का आदेश जारी किया।

  1. नई सरकार से पहले राष्ट्रपति शासन का समाप्त होना जरूरी

नई सरकार को कार्यभार सौंपने के लिए संविधान के अनुसार विधानसभा के प्रावधानों को बहाल करना अनिवार्य है। राष्ट्रपति शासन के रहते हुए नई सरकार शपथ नहीं ले सकती, इसलिए नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण से पहले राष्ट्रपति शासन समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

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