जबलपुर में शुरू हुई पशुओं के लिए प्रदेश की पहली टॉक्सिकोलॉजी लैब, जहर की पहचान करेगी

हर्षित चौरसिया, जबलपुर। बेजुबान पशुओं और वन्यजीवों को जहर देकर मारने वालों के लिए अब बच निकलना आसान नहीं होगा। जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (NDVSU) परिसर में मध्य प्रदेश की पहली अत्याधुनिक एडवांस्ड डायग्नोस्टिक टॉक्सिकोलॉजिकल लेबोरेटरी (विष विज्ञान) लैब शुरू हो गई है। इस लैब में अब संदिग्ध परिस्थितियों में मरे पशु और वन्यजीवों के नमूनों की जांच कर यह पता लगाया जा सकेगा कि उन्हें आखिर कौन सा जहर दिया गया था।
मंडी से मिला 2 करोड़ 55 लाख का प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. स्मयंतक मणि त्रिपाठी ने बताया कि पशु औषधि एवं विष विज्ञान विभाग में एडवांस्ड डायग्नोस्टिक टॉक्सिकोलॉजिकल लेबोरेटरी स्थापित की गई है। यह मध्य प्रदेश में पशुओं के लिए स्थापित पहली टॉक्सिकोलॉजी लैब है। यह लैब मंडी प्रोजेक्ट के तहत कुल 2 करोड़ 55 लाख रुपए की लागत से तैयार की गई है। इसमें भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपए, अत्याधुनिक उपकरणों के लिए 192 लाख रुपए और ऑपरेशनल कार्यों के लिए 13 लाख रुपए का प्रावधान रखा गया है।
यह होगा फायदा
अधिकारियों के मुताबिक अब तक जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं या वन्यजीवों की संदिग्ध मौत के बाद जहर की पुष्टि के लिए नमूनों को जांच के लिए सागर भेजना पड़ता था। सागर लैब में काम का दवाब अधिक होने से रिपोर्ट आने में कई प्रकरणों में बहुत अधिक समय लग जाता था। ऐसे कई मामलों में वन विभाग अपराधियों के विरुद्ध न्यायालय में समय पर साक्ष्य प्रस्तुत करने में लेट हो जाता था। अब नई लैब शुरू होने के बाद विसरा और अन्य नमूनों की वैज्ञानिक जांच स्थानीय स्तर पर हो सकेगी। साथ ही रिपोर्ट भी जल्द से जल्द मिलेगी।
पशुओं को जहर देने वालों के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य मिलेंगे
एडवांस्ड डायग्नोस्टिक टॉक्सिकोलॉजिकल लेबोरेटरी यह बहुत ही एडवांस है, जहां आने वाले नमूनों की जांच के जरिए विष के प्रकार की सटीक पहचान की जा सकेगी। इससे जहर देकर शिकार करने या पशुओं को नुकसान पहुंचाने वाले आरोपियों के खिलाफ मजबूत और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा सकेंगे।
-प्रो. (डॉ.) मनदीप शर्मा, कुलगुरु, वीयू, जबलपुर।




















