बांधवगढ़ को मिला नया 'राजा': टाइगर 'पुजारी' के बाद आक्रामक ‘D-1’ का एकछत्र राज, बना पर्यटकों की पहली पसंद

जबलपुर। मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगलों में एक नए राजा की हुकूमत कायम हो चुकी है। प्रसिद्ध बाघ पुजारी के दौर के खात्मे के बाद अब ताकतवर नर बाघ D-1 ने खितौली क्षेत्र पर अपना पूर्ण वर्चस्व स्थापित कर लिया है। अपनी विशाल कद-काठी, निडर स्वभाव और आक्रामक अंदाज के दम पर यह बाघ इन दिनों पर्यटकों और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों के बीच सबसे बड़ा आकर्षण बन चुका है।
विरासत में मिली दबंगई
D-1 को यह दबंगई विरासत में मिली है। वह मगधी जोन की मशहूर बाघिन 'डॉटी' और ताकतवर नर बाघ 'महामन' की संतान है। लगभग 220 से 250 किलोग्राम वजनी इस बाघ की बेपरवाह चाल और भारी-भरकम शरीर जंगल में उसकी विशिष्ट पहचान बनाते हैं।

वर्चस्व को लेकर पुजारी से हुआ था संघर्ष
जंगल के नियमों के तहत इलाके की जंग में D-1 ने अपनी ताकत साबित की। 'जेंटलमैन ऑफ द जंगल' के नाम से विख्यात बाघ पुजारी के साथ क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर हुए भीषण संघर्ष में पुजारी घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई। इस खूनी टकराव के बाद खितौली पर डी-1 का एकछत्र राज स्थापित हो गया।
सबसे शक्तिशाली बाघों में शुमार है D-1
D-1 अब रिजर्व के सबसे शक्तिशाली बाघों में शुमार है। उसका प्रभाव खितौली कोर जोन से लेकर पनपथा, धमोखर और पचपेड़ी बेल्ट तक फैल चुका है।

बांधवगढ़ में बाघ गाथा का नया युग
बांधवगढ़ की बाघ गाथा में यह एक नए युग की शुरूआत है। जहां सफारी के दौरान पर्यटकों में सिर्फ 'खितौली के नए राजा' का दीदार करने की होड़ मची है।
-सुनील यादव, नेचुरलिस्ट, उमरिया




















