क्या जंग अब तय है?ईरान-अमेरिका टकराव में कूदा UN और रूस, होर्मुज खोलने पर फंसा पेंच!

दुनिया की नजरें इस समय मिडिल ईस्ट पर टिकी हैं, जहां होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु प्रोग्राम को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि टकराव दोनों एक साथ चल रहे हैं। युद्ध की आहट के बीच अब रूस और संयुक्त राष्ट्र की एंट्री ने हालात को और गंभीर बना दिया है।
UN की हाई लेवल बैठक में उठी बड़ी मांग
संयुक्त राष्ट्र में हुई एक हाई लेवल बैठक में कई देशों ने मिलकर होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने की मांग की। सभी देशों ने साफ कहा कि यह समुद्री रास्ता पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम है।
यह रास्ता वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और व्यापार का बड़ा केंद्र है। अगर यहां कोई रुकावट आती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। देशों ने यह भी कहा कि इस रास्ते पर किसी तरह का टोल, दबाव या सैन्य कार्रवाई स्वीकार नहीं की जा सकती।
ईरान ने फिर रखी नई शर्त
ईरान अपने रुख पर कायम है और अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के लिए तैयार नहीं दिख रहा। अमेरिका इससे खुश नहीं है, क्योंकि वह चाहता है कि ईरान इस मुद्दे पर साफ जवाब दे।
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ईरान ने एक नई शर्त रखी है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट को खोला जाता है और उस पर लगी पाबंदियां हटाई जाती हैं, तो वह परमाणु समझौते पर बातचीत के लिए तैयार हो सकता है। लेकिन इस प्रस्ताव में परमाणु कार्यक्रम को बंद करने की बात साफ तौर पर नहीं कही गई है, जिससे अमेरिका असंतुष्ट है।
अमेरिका का सख्त रुख
अमेरिकी विदेश मंत्री ने साफ कहा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम किसी भी बातचीत का सबसे अहम मुद्दा है। अमेरिका का कहना है कि बिना इस मुद्दे पर ठोस समझौते के कोई भी डील संभव नहीं है।
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इतना ही नहीं, अमेरिका ने ईरान को बातचीत के लिए 3 दिन का अल्टीमेटम भी दिया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर बातचीत करनी है, तो पहल ईरान को ही करनी होगी।
48 घंटों में तीसरी बार पाकिस्तान पहुंचे अराघची
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पिछले 48 घंटों में तीसरी बार पाकिस्तान पहुंचे हैं। उनकी यह यात्रा दिखाती है कि पर्दे के पीछे बातचीत के प्रयास तेज हो गए हैं।
पाकिस्तान के जरिए ईरान अमेरिका तक अपनी शर्तें पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की कोशिशें जारी हैं।
रूस की एंट्री से बढ़ी हलचल
इस पूरे मामले में अब रूस भी सक्रिय हो गया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हाल ही में मुलाकात हुई। इस मुलाकात में रूस ने ईरान को हरसंभव मदद देने का भरोसा दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है।
ईरान ने भी साफ कहा है कि वह अमेरिका या इजरायल के दबाव में नहीं आएगा और अपने फैसले खुद लेगा।
शांति वार्ता हो चुकी है फेल
अब तक ईरान और अमेरिका के बीच दो दौर की शांति वार्ता हो चुकी है, लेकिन दोनों ही बार बातचीत सफल नहीं रही। दोनों देश अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। एक तरफ ईरान अपनी शर्तों से पीछे हटने को तैयार नहीं है, तो दूसरी तरफ अमेरिका भी सख्त रुख अपनाए हुए है।
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UN प्रमुख की अपील
संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करते हुए ईरान से अपील की है कि वह बिना किसी भेदभाव और टोल के होर्मुज स्ट्रेट को खोल दे। उन्होंने कहा कि यह रास्ता सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का है। इसे बंद करना मतलब दुनिया के कई हिस्सों को एक-दूसरे से अलग करना है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का ट्रांसपोर्ट होता है। अगर यह रास्ता बंद होता है, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और आर्थिक संकट गहरा सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल हालात काफी नाजुक बने हुए हैं। एक तरफ बातचीत की कोशिशें जारी हैं, तो दूसरी तरफ टकराव का खतरा भी बढ़ रहा है। रूस के समर्थन और अमेरिका के दबाव के बीच ईरान का रुख बेहद अहम हो गया है।
अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में बातचीत से समाधान निकलता है या हालात और बिगड़ते हैं।











