Liver Diseases :हर 10 में 4 युवा फैटी लिवर की चपेट में...! आपकी ये आदतें बन सकती हैं वजह

लिवर शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह भोजन को ऊर्जा में बदलने, शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने और खून को साफ करने जैसे कई जरूरी काम करता है। लेकिन बदलती जीवनशैली और खान-पान की खराब आदतों के कारण आज लिवर की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।
युवाओं में बढ़ रहा फैटी लिवर का खतरा
पहले लिवर की समस्याएं बढ़ती उम्र में देखने को मिलती थीं, लेकिन अब कम उम्र के युवा और बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में हर 10 में से लगभग 4 युवा फैटी लिवर की समस्या से प्रभावित हो सकते हैं।
एक रिसर्च के मुताबिक, भारत के करीब 38.9 प्रतिशत वयस्क मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) से प्रभावित हो सकते हैं।
क्या है फैटी लिवर?
फैटी लिवर एक ऐसी स्थिति है, जिसमें लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है। पहले इसे केवल शराब पीने वालों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी इससे प्रभावित हो रहे हैं, जिन्होंने कभी शराब का सेवन नहीं किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी मुख्य वजह खराब खान-पान और निष्क्रिय जीवनशैली है।
फास्ट फूड और जंक फूड बढ़ा रहे खतरा
फास्ट फूड, पिज्जा, बर्गर, चिप्स, फ्रेंच फ्राइज और अन्य तले-भुने खाद्य पदार्थों में ट्रांस फैट, सैचुरेटेड फैट और अतिरिक्त कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। जब शरीर को जरूरत से ज्यादा कैलोरी मिलती है, तो अतिरिक्त ऊर्जा लिवर में फैट के रूप में जमा होने लगती है। यही आगे चलकर फैटी लिवर की वजह बन सकता है।
कोल्ड ड्रिंक और एनर्जी ड्रिंक भी नुकसानदायक
कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस और एनर्जी ड्रिंक्स में चीनी और फ्रुक्टोज की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। फ्रुक्टोज का मेटाबॉलिज्म मुख्य रूप से लिवर में होता है। अधिक मात्रा में इसका सेवन करने पर लिवर अतिरिक्त फ्रुक्टोज को फैट में बदलने लगता है, जिससे फैटी लिवर का खतरा बढ़ जाता है।
मोटापा भी बड़ा कारण
विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा फैटी लिवर की सबसे बड़ी वजहों में से एक है। खासकर पेट के आसपास जमा चर्बी इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाती है। इस स्थिति में शरीर ग्लूकोज का सही उपयोग नहीं कर पाता और लिवर में फैट जमा होने लगता है। डॉक्टरों का कहना है कि शरीर के कुल वजन का 7 से 10 प्रतिशत कम करना भी लिवर की सेहत में सुधार ला सकता है।
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नींद की कमी भी बढ़ाती है जोखिम
पर्याप्त नींद न लेना और अनियमित दिनचर्या भी फैटी लिवर का खतरा बढ़ा सकती है। कम नींद लेने से हार्मोनल संतुलन और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है। इससे मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और शरीर में सूजन की समस्या बढ़ सकती है, जो फैटी लिवर के जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारण हैं।
इन आदतों से करें बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और वजन को नियंत्रित रखकर फैटी लिवर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही जंक फूड, मीठे पेय पदार्थों और अत्यधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना चाहिए।











