रसोई का विज्ञान:पकते ही क्यों फट जाते हैं चावल के कुछ दाने, IIT इंदौर के शोध में हुआ बड़ा खुलासा; चॉकी’ दाने 2.7 गुना तेजी से सोखते हैं पानी

चावल पकाते समय अक्सर देखा जाता है कि कुछ दाने लंबे और खिले हुए बनते हैं जबकि कुछ दाने मुड़ जाते हैं या बीच से फट जाते हैं। अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) इंदौर के वैज्ञानिकों ने इस रोजमर्रा की रसोई से जुड़ी पहेली का वैज्ञानिक कारण खोज निकाला है। शोधकर्ताओं के मुताबिक चावल का दाना पकने के बाद कैसा दिखेगा, यह रसोई में नहीं बल्कि उसके विकास और प्रोसेसिंग के दौरान ही तय हो जाता है। यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल ऑफ फूड साइंस में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन का नेतृत्व डॉ. अंकुर मिगलानी, प्रो. पवन कुमार कांकर और डॉ. अमन खुराना ने किया। वहीं पीएचडी शोधार्थी नितीन सपकाल, अनूप के.आर. और सौरभ कुमार भी शोध टीम का हिस्सा रहे।

चॉकी दानों में छिपी होती हैं सूक्ष्म दरारें
वैज्ञानिकों ने हाई-रिजॉल्यूशन इमेजिंग और माइक्रोस्कोपिक विश्लेषण के जरिए पाया कि कुछ चावल के दाने सफेद और अपारदर्शी दिखाई देते हैं, जिन्हें चॉकी ग्रेन्स कहा जाता है। इन दानों के भीतर बेहद सूक्ष्म दरारें और हवा के छोटे बुलबुले मौजूद रहते हैं। यही संरचनात्मक कमजोरियां पानी को तेजी से अंदर पहुंचने का रास्ता देती हैं। शोध में पाया गया कि ऐसे चॉकी दाने सामान्य चावल की तुलना में करीब 2.7 गुना तेजी से पानी सोखते हैं।
पकाते समय 67% तक फट सकते हैं दाने
पुसा-1121 बासमती चावल पर किए गए प्रयोगों में वैज्ञानिकों ने पाया कि पूरी तरह चॉकी दानों में से लगभग 67% दाने पकाने के दौरान फट जाते हैं। इसके मुकाबले स्वस्थ और सामान्य दानों में यह आंकड़ा सिर्फ 13% रहा। शोधकर्ताओं के अनुसार जब दाने का अलग-अलग हिस्सा अलग गति से पानी सोखता और फैलता है तो उसके भीतर यांत्रिक तनाव पैदा होता है। यही तनाव दाने को मोड़ देता है या फिर उसे फाड़ देता है।
सफेद रिंग और उभार भी दरारों का संकेत
शोध में यह भी सामने आया कि पके हुए चावल में दिखने वाली छोटी सफेद रिंग या उभार दरअसल भिगोने के दौरान बनने वाली सूक्ष्म दरारों का परिणाम होते हैं। यानी चावल के दाने में मौजूद अंदरूनी संरचना ही तय करती है कि वह पकने के बाद लंबा और फूला हुआ बनेगा या टूट जाएगा।
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कृषि और फूड इंडस्ट्री के लिए भी अहम साबित होगा शोध
IIT इंदौर के निदेशक प्रो. सुहास एस. जोशी ने कहा कि यह अध्ययन केवल रसोई से जुड़ी सामान्य घटना को समझाने तक सीमित नहीं है बल्कि कृषि, खाद्य गुणवत्ता परीक्षण और चावल प्रसंस्करण उद्योग के लिए भी बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। अध्ययन के प्रमुख अन्वेषक डॉ. अंकुर मिगलानी ने बताया कि शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण क्रैक-विथ सीमा की भी पहचान की है। इससे पहले से अनुमान लगाया जा सकेगा कि कौन-सा चावल पकाने के दौरान फट सकता है।
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हर चावल के दाने में होती है मैकेनिकल मेमोरी
वैज्ञानिकों का कहना है कि हर चावल का दाना अपने विकास के दौरान एक तरह की मैकेनिकल मेमोरी विकसित करता है। यानी आपकी थाली में चावल का दाना कैसा दिखेगा, इसका फैसला उसके रसोई तक पहुंचने से काफी पहले ही हो चुका होता है।












