‘अब दुश्मनों को नहीं मिलेगी एंट्री’, ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका-डेनमार्क में डील! ट्रंप बोले

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच एक बड़े समझौते का ऐलान किया है। ट्रंप के मुताबिक, इस समझौते से अमेरिका को ग्रीनलैंड की सुरक्षा और उससे जुड़ी जरूरतों पर स्थायी अधिकार मिलेगा। हालांकि, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के मुताबिक समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर अगले हफ्ते होंगे और इसे दोनों जगह की संसदों से मंजूरी भी लेनी होगी।
ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर अमेरिका की बड़ी भूमिका
ट्रंप ने कहा कि समझौते के तहत अमेरिका के पास ग्रीनलैंड और खुद अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की स्थायी क्षमता रहेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस समझौते के लिए अमेरिका को कोई खर्च नहीं करना पड़ेगा। ट्रंप के मुताबिक, ग्रीनलैंड में अमेरिका के विरोधी देश बिना अमेरिकी लिखित मंजूरी के सैन्य बेस, सैनिकों की मौजूदगी या संवेदनशील निवेश नहीं कर सकेंगे।
ग्रीनलैंड में बढ़ेगी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी
ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ग्रीनलैंड के उपयुक्त हिस्सों में बड़ी सैन्य मौजूदगी विकसित करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। अमेरिका पहले से ही ग्रीनलैंड में पिटफिक स्पेस बेस संचालित करता है और नया समझौता वहां अमेरिकी सैन्य पहुंच को और बढ़ा सकता है।
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ग्रीनलैंड पर किसका अधिकार रहेगा?
इस समझौते का मतलब ग्रीनलैंड का अमेरिका में शामिल होना नहीं है। ग्रीनलैंड डेनमार्क के साम्राज्य का स्वायत्त हिस्सा बना रहेगा। डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने कहा है कि समझौता उनकी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मान्यता देता है।
अगले हफ्ते हो सकता है औपचारिक हस्ताक्षर
डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने बताया है कि समझौते पर अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हस्ताक्षर किए जाने की योजना है। इसके बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड की संसदों से मंजूरी जरूरी होगी। इसलिए अभी इसे पूरी तरह लागू समझौता नहीं माना जा सकता। ग्रीनलैंड लंबे समय से अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है। आर्कटिक क्षेत्र में इसकी स्थिति और सुरक्षा महत्व के कारण अमेरिका वहां अपनी मौजूदगी बढ़ाना चाहता रहा है। अब प्रस्तावित समझौते से दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग का नया ढांचा तैयार होने की बात सामने आई है।




















