CNN-Politico-MS NOW पर ट्रंप का बड़ा एक्शन, लगाया बैन, बोले- ‘फेक न्यूज’ बर्दाश्त नहीं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने CNN, Politico और MS NOW को व्हाइट हाउस से बाहर करने का ऐलान किया है। ट्रंप ने 18 सितंबर 2026 को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट कर इन तीनों मीडिया संस्थानों पर उनके प्रशासन और अमेरिका को लेकर लगातार ‘फेक न्यूज’ रिपोर्ट करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ऐसे मीडिया संस्थानों को राष्ट्रपति और सरकार की कवरेज के दौरान गलत या मनगढ़ंत खबरें प्रकाशित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर किया बैन का ऐलान
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि CNN, MS NOW और Politico को तत्काल प्रभाव से व्हाइट हाउस से बैन किया जा रहा है। उन्होंने इन संस्थानों की रिपोर्टिंग को लेकर नाराजगी जताई और दावा किया कि ये मीडिया संस्थान उनके प्रशासन से जुड़ी खबरों को गलत तरीके से पेश करते हैं। हालांकि, ट्रंप ने अपनी पोस्ट में किसी खास खबर या रिपोर्ट का उदाहरण नहीं दिया, जिसे आधार बनाकर यह फैसला लिया गया हो। बाद में पत्रकारों से बातचीत में भी उन्होंने इन संस्थानों की रिपोर्टिंग को अपने फैसले की वजह बताया।
Politico को लेकर ट्रंप ने लगाए अलग आरोप
ट्रंप ने Politico को लेकर एक अलग आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि जो बाइडन प्रशासन के दौरान अमेरिकी सरकार ने Politico की सदस्यता पर करीब 8 मिलियन डॉलर खर्च किए थे। ट्रंप ने इस भुगतान पर सवाल उठाते हुए इसे अनुचित बताया। हालांकि, इस आरोप को लेकर ट्रंप ने अपनी पोस्ट में विस्तार से दस्तावेज या अन्य सबूत पेश नहीं किए। उन्होंने इसी मुद्दे को भी Politico के खिलाफ कार्रवाई की वजहों में शामिल किया।
क्या दूसरे मीडिया संस्थानों पर भी होगी कार्रवाई?
ट्रंप ने सिर्फ तीन मीडिया संस्थानों तक कार्रवाई सीमित रखने का संकेत नहीं दिया है। उन्होंने कहा है कि दूसरे ‘फेक न्यूज’ मीडिया संस्थानों को भी आगे इसी तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। बाद में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने अन्य बड़े मीडिया संस्थानों का भी जिक्र किया। हालांकि, अभी यह साफ नहीं किया गया है कि किन संस्थानों पर अगली कार्रवाई होगी और उनके लिए किस तरह के प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
बैन का असर क्या होगा?
ट्रंप की घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसका व्यावहारिक रूप क्या होगा। क्या इन संस्थानों के पत्रकारों के प्रेस पास रद्द होंगे, क्या उन्हें व्हाइट हाउस के ब्रीफिंग रूम से बाहर किया जाएगा या फिर राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की कवरेज पर रोक लगेगी, इसकी तत्काल स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप के ऐलान के बाद भी शुक्रवार को CNN, MS NOW और Politico के पत्रकार व्हाइट हाउस परिसर में काम करते दिखाई दिए। यानी घोषणा के तुरंत बाद इसके लागू होने की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी।
मीडिया संस्थानों के पास कोर्ट जाने का विकल्प
अगर व्हाइट हाउस इन संस्थानों की पहुंच औपचारिक रूप से रोकता है, तो मामला अदालत तक पहुंच सकता है। प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों को सरकारी गतिविधियों की कवरेज से जुड़े अधिकारों को लेकर अमेरिका में पहले भी कानूनी विवाद सामने आते रहे हैं। CNN ने कहा है कि उसके पत्रकारों को संविधान के तहत बिना सरकारी दखल के रिपोर्टिंग करने का अधिकार है। Politico ने भी अपने पत्रकारिता अधिकारों की रक्षा करने की बात कही है। प्रेस संगठनों ने भी सरकारी कार्रवाई के आधार पर मीडिया एक्सेस सीमित करने को लेकर संवैधानिक सवाल उठाए हैं।
AP पर भी पहले हो चुकी है ऐसी कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप प्रशासन और किसी बड़े मीडिया संस्थान के बीच व्हाइट हाउस पहुंच को लेकर विवाद हुआ है। फरवरी 2025 में एसोसिएटेड प्रेस (AP) को व्हाइट हाउस के कुछ कार्यक्रमों से बाहर कर दिया गया था। इसके बाद AP ने अदालत का रुख किया। उस मामले में अदालतों में यह सवाल उठा कि सरकार किसी मीडिया संस्थान को उसकी रिपोर्टिंग या संपादकीय फैसलों के आधार पर प्रेस एक्सेस से बाहर कर सकती है या नहीं। मामला कानूनी प्रक्रिया में आगे बढ़ा और अलग-अलग अदालतों में इस पर सुनवाई हुई।
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पहले भी CNN से हुआ था विवाद
ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी CNN और व्हाइट हाउस के बीच प्रेस एक्सेस को लेकर विवाद हुआ था। 2018 में CNN के तत्कालीन व्हाइट हाउस संवाददाता जिम एकोस्टा का प्रेस पास वापस लिया गया था। CNN ने अदालत में चुनौती दी और एक संघीय जज ने अस्थायी तौर पर उनका प्रेस एक्सेस बहाल करने का आदेश दिया था। बाद में एकोस्टा का एक्सेस स्थायी रूप से बहाल कर दिया गया। फिलहाल CNN, Politico और MS NOW को लेकर ट्रंप की घोषणा ने व्हाइट हाउस और अमेरिकी मीडिया के बीच पुराने विवाद को फिर सामने ला दिया है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस घोषणा को किस तरह लागू करता है और क्या प्रभावित मीडिया संस्थान इस फैसले को अदालत में चुनौती देते हैं।




















