इंदौर। साइबर ठगी के लिए बैंक खातों का इंतजाम करने वाले नेटवर्क पर क्राइम ब्रांच ने बड़ा प्रहार किया है। ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत पुलिस ने मुख्य आरोपी बालेश्वर राठौर को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि वह करीब दो वर्षों से साइबर ठगों के लिए अलग-अलग लोगों के नाम पर बैंक खाते उपलब्ध कराने का काम कर रहा था। पुलिस के अनुसार, बालेश्वर अब तक 250 से अधिक बैंक खातों की जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंचा चुका था। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर करने और रकम के वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता था। आरोपी प्रत्येक खाते की जानकारी उपलब्ध कराने के बदले 15 से 30 हजार रुपये तक कमीशन लेता था।
एक गिरफ्तारी ने खोली पूरे नेटवर्क की परत
इस नेटवर्क की जांच की शुरुआत नेहरू पार्क रोड से हुई थी। क्राइम ब्रांच ने यहां ललित उर्फ ऋषि सुतार को पकड़ा था। तलाशी के दौरान उसके पास मौजूद लैपटाप बैग से 21 बैंक पासबुक, 20 चेकबुक, आठ एटीएम कार्ड, सात क्यूआर कोड और एक एचपी लैपटाप बरामद किया गया।बरामद दस्तावेजों और खातों की जानकारी की एनसीआरबी पोर्टल पर जांच की गई तो कई बैंक खातों का संबंध साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों से सामने आया। इसी जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस उस व्यक्ति तक पहुंची, जो साइबर ठगों के लिए बैंक खातों की व्यवस्था कर रहा था।
खाते जुटाता, डिटेल देता और कमीशन बटोरता
पूछताछ में बालेश्वर ने पुलिस को बताया कि वह अलग-अलग लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद इन खातों से संबंधित बैंकिंग दस्तावेज और जानकारी हासिल कर उन्हें साइबर ठगी से जुड़े लोगों तक पहुंचाता था।पुलिस जांच में इन खातों से करीब 50 करोड़ रुपये की साइबर ठगी का कनेक्शन सामने आया है। इन खातों से जुड़े मामलों में देश के 27 राज्यों से 350 से अधिक शिकायतें दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है।
लैपटाप में छिपे राज से खुलेगा ठगी का पूरा हिसाब
क्राइम ब्रांच अब बालेश्वर से जब्त लैपटाप और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि 250 से अधिक बैंक खातों की जानकारी किन-किन साइबर ठगों को दी गई और इनका इस्तेमाल किन घटनाओं में किया गया।साथ ही करीब 50 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का मनी ट्रेल खंगाला जा रहा है। पुलिस खातों के वास्तविक धारकों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
किसके इशारे पर चलता था खातों का नेटवर्क?
अब जांच का फोकस इस बात पर है कि बालेश्वर तक खाते पहुंचाने वाले लोग कौन थे और उसके बाद इन खातों का संचालन कौन करता था। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि ठगी की रकम खातों में आने के बाद उसे निकालने, ट्रांसफर करने और दूसरे खातों तक पहुंचाने में कौन-कौन लोग शामिल थे।