PU Special :अस्पतालों-सरकारी भवनों में दिव्यांगों को परेशानी, 24 जिला अस्पतालों के ऑडिट में 96% में टैक्टाइल गाइडेंस नहीं

राजधानी भोपाल के अस्पतालों और सरकारी भवनों में दिव्यांगजनों के लिए आसान पहुंच को लेकर कई समस्याएं सामने आ रही हैं। रैंप होने के बावजूद आरक्षित पार्किंग, टॉयलेट, हैंडरेल और अन्य जरूरी सुविधाओं की कमी से दिव्यांगजन परेशान हैं।
अस्पतालों-सरकारी भवनों में दिव्यांगों को परेशानी, 24 जिला अस्पतालों के ऑडिट में 96% में टैक्टाइल गाइडेंस नहीं
अस्पतालों-सरकारी भवनों में दिव्यांगों को परेशानी

पुष्पेन्द्र सिंह,भोपाल।  हमीदिया और जेपी अस्पताल समेत सतपुड़ा, विंध्याचल, नर्मदा भवन, पर्यावास भवन और कलेक्टर कार्यालय में दिव्यांगों के लिए सुविधाओं को लेकर समस्याएं हैं। सीएजी की रिपोर्ट-2024 के अनुसार प्रदेश के 24 जिला अस्पतालों में हुए एक्सेसिबिलिटी ऑडिट में 96% अस्पतालों में टैक्टाइल गाइडेंस सिस्टम नहीं मिला। 2026 में मध्यप्रदेश और गोवा के 35 सरकारी अस्पतालों पर हुए अध्ययन में भी रैंप, हैंडरेल, लिफ्ट, पार्किंग और टॉयलेट की उपयोगिता में कमियां सामने आईं। मध्यप्रदेश के दिव्यांगजन अधिकार नियम, 2017 में सार्वजनिक भवनों और अस्पतालों में बाधामुक्त पहुंच के प्रावधान हैं, लेकिन जमीन पर अभी भी कई बाधाएं बनी हुई हैं।

अस्पतालों में रैंप हैं, लेकिन आरक्षित पार्किंग नहीं

राजधानी भोपाल के रहने वाले दिव्यांग शोभित राय के अनुसार हमीदिया अस्पताल में रैंप तो है, लेकिन आरक्षित पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। जेपी अस्पताल समेत दूसरे प्रमुख अस्पतालों और सरकारी भवनों में दिव्यांगों के लिए आसान पहुंच को लेकर समस्याएं हैं। सतपुड़ा, विंध्याचल, नर्मदा भवन, पर्यावास भवन और कलेक्टर कार्यालय जैसे सरकारी भवनों में भी दिव्यांगों के लिए पार्किंग और आसान पहुंच नहीं हैं। ऐसे में हम दिव्यांगजन सुविधाओं को लेकर परेशान होते हैं।

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24 जिला अस्पतालों में एक्सेसिबिलिटी ऑडिट

सीएजी की रिपोर्ट-2024 के अनुसार प्रदेश के 24 जिला अस्पतालों में दिव्यांगजनों की भागीदारी से हुए एक्सेसिबिलिटी ऑडिट में 96% अस्पतालों में टैक्टाइल गाइडेंस सिस्टम नहीं मिला। कई रैंप गलत डिजाइन या असुरक्षित पाए गए, जबकि सिर्फ चार अस्पतालों में ड्युअल-हाइट हैंडरेल सही मिले। दिव्यांगों के लिए बनाए गए टॉयलेट भी कई जगह बंद, खराब या स्टोर के रूप में इस्तेमाल होते मिले।

मरीजों को हो रही परेशानी 

अस्पतालों की Accessibility (सरल उपयोग) का सवाल सिर्फ रैंप बनाने तक सीमित नहीं है। 2026 में मध्यप्रदेश और गोवा के 35 सरकारी अस्पतालों पर हुए एक अध्ययन में भी रैंप, हैंडरेल, लिफ्ट, पार्किंग और टॉयलेट की उपयोगिता में कमियां सामने आईं। अध्ययन में करीब 70% अस्पतालों में दोनों तरफ हैंडरेल नहीं थे और 94% में ड्युअल-हाइट हैंडरेल नहीं मिले। टैक्टाइल ग्राउंड सरफेस इंडिकेटर सिर्फ 5.7% अस्पतालों में पाए गए।

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कानून में अधिकार, जमीन पर बाधा

मध्यप्रदेश के दिव्यांगजन अधिकार नियम, 2017 में सार्वजनिक भवनों में रैंप, दिव्यांगों के लिए सुविधाजनक टॉयलेट, लिफ्ट में ब्रेल/संकेत और अस्पतालों में रैंप तथा सरकारी कार्यालयों में बाधामुक्त पहुंच का प्रावधान है। केंद्र की बाधा-मुक्त वातावरण व्यवस्था भी स्वास्थ्य केंद्रों, अस्पतालों और सार्वजनिक भवनों को दिव्यांगजनों के लिए सुगम बनाने पर जोर देती है। इसके बावजूद कई सार्वजनिक स्थानों पर दिव्यांगजनों को आसान पहुंच से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

नियम क्या कहते हैं?

नियमों के अनुसार सार्वजनिक भवन में दिव्यांग वाहनों के लिए आरक्षित पार्किंग होनी चाहिए और पार्किंग भवन के प्रवेश द्वार के नजदीक होनी चाहिए। आरक्षित पार्किंग की स्पष्ट पहचान/साइन बोर्ड के साथ पार्किंग से प्रवेश द्वार तक सुगम रास्ता होना जरूरी है। इसके अलावा रैंप, लिफ्ट और जरूरत के अनुसार स्पर्शनीय मार्ग की व्यवस्था होनी चाहिए। सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं में भी दिव्यांग-अनुकूल व्यवस्था का प्रावधान है।

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प्रदेश में 15.51 लाख दिव्यांग 

जनगणना 2011 के अनुसार मध्यप्रदेश में दिव्यांगों की संख्या 15,51,931 है, जिसमें पुरुष 8,88,751 और महिला 6,63,180 हैं। भोपाल में 84,502 और इंदौर में 78,761 दिव्यांग हैं। आयुक्त नि:शक्तजन अजय खेमरिया के अनुसार प्रदेशभर में सार्वजनिक भवनों की ऑडिट कराई जा रही है। हाल ही में विभाग के प्रमुख सचिव के साथ बैठक में निर्णय लिया गया है कि जिला स्तर पर दिव्यांगों के साथ कमेटियां बनाकर सार्वजनिक भवनों का रिकॉर्ड तैयार किया जाए। रिपोर्ट आने के बाद देखा जाएगा कि कहां पर दिव्यांगों के लिए आवश्यक सुविधाएं नहीं हैं। पहले से प्रावधान है कि नए भवनों के लिए मंजूरी तभी मिलेगी, जब दिव्यांगों के लिए सुगम व्यवस्थाएं होंगी। पुरानी संरचनाओं को लेकर जरूर समस्याएं आ रही हैं।

Rohit Sharma
By Rohit Sharma

पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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