रिटायरमेंट पर MP हाईकोर्ट के जज का बड़ा संकल्प, 1 करोड़ रुपए करेंगे दान

भोपाल। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने अपनी सेवानिवृत्ति के मौके पर ऐसा संकल्प लिया है, जिसकी चर्चा हो रही है। उन्होंने फैसला किया है कि रिटायरमेंट के बाद उन्हें मिलने वाली अपनी पूरी GPF राशि प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपात स्थिति राहत कोष यानी PM केयर्स फंड में दान करेंगे। यह रकम करीब 1 करोड़ रुपए बताई गई है। अलग-अलग रिपोर्टों में उनके GPF की अनुमानित राशि करीब 1.01 करोड़ से 1.1 करोड़ रुपए बताई गई है।
GPF की पूरी रकम PM केयर्स फंड में देने का संकल्प
जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने 17 सितंबर को आयोजित अपने विदाई समारोह में इस फैसले की घोषणा की। उन्होंने कहा कि GPF की राशि जैसे ही उन्हें प्राप्त होगी, वह पूरी रकम PM केयर्स फंड को राष्ट्र निर्माण के लिए देने का संकल्प लेते हैं। यानी रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली उनकी पूरी GPF राशि उनके पास रखने के बजाय PM केयर्स फंड में दान की जाएगी। जस्टिस सिंह ने इसे राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए यह संकल्प लिया है।
पत्नी के साथ शरीर दान करने का भी फैसला
जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने केवल GPF की रकम दान करने का ही फैसला नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी इंदिरा सिंह ने मृत्यु के बाद अपने शरीर मेडिकल शिक्षा और वैज्ञानिक कार्यों के लिए दान करने का संकल्प भी लिया है। उनके मुताबिक, यह संकल्प उन्होंने सेवानिवृत्ति से दो दिन पहले एक मेडिकल कॉलेज के माध्यम से दर्ज कराया था। रिपोर्टों के अनुसार, शरीर दान और GPF की रकम दान करने का विचार उनकी पत्नी ने भी सुझाया था। जस्टिस सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि उनके लिए समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि समाज और मानवता की सेवा के लिए अपने स्तर पर योगदान देना भी जरूरी है।
'रिटायरमेंट अंत नहीं, नई शुरुआत है'
अपने विदाई समारोह में जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने सेवानिवृत्ति को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति उनके जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने आगे भी एक अलग मंच के माध्यम से समाज के लिए काम करते रहने की बात कही। इस दौरान उन्होंने अपने लंबे न्यायिक करियर को याद किया और अपने गुरुओं, वरिष्ठ न्यायाधीशों, कोर्ट के कर्मचारियों और प्रशासनिक अधिकारियों का आभार जताया। जस्टिस सिंह ने अपने बचपन की कठिन परिस्थितियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कम उम्र में मां को खोने के बाद उनकी मौसी ने उन्हें अपने बेटे की तरह पाला। उन्होंने अपनी मौसी की सीख को याद करते हुए कहा कि जीवन में सफलता का कोई छोटा रास्ता नहीं होता। मेहनत और ईमानदार प्रयास के बिना मिली सफलता लंबे समय तक कायम नहीं रहती।
1990 में सिविल जज के तौर पर शुरू किया था सफर
जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह ने 31 मई 1990 को सिविल जज क्लास-II के तौर पर न्यायिक सेवा शुरू की थी। अपने न्यायिक करियर के दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश के कई जिलों में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। साल 2018 में वह छतरपुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश बने। इसके बाद 2022 में उन्हें धार में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर नियुक्त किया गया। इसके बाद 1 मई 2023 को उन्होंने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। 17 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जज के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, उनका कुल न्यायिक करियर करीब 36 वर्ष का रहा।


















