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इंदौर में “पानी का खेल”!जनता बूंद-बूंद को तरसी

नर्मदा का पानी भरपूर आने के बावजूद इंदौर की टंकियां आधी भरी जा रहीं, जनता को 10-15 मिनट सप्लाई जबकि होटल, हॉस्टल और मॉल तक टैंकरों से पहुंच रहा पानी; नगर निगम की व्यवस्था और टैंकर खेल पर उठे गंभीर सवाल
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जनता बूंद-बूंद को तरसी

इंदौर में गहराता जल संकट अब सिर्फ पानी की कमी नहीं, बल्कि नगर निगम की लापरवाही, अव्यवस्था और कथित “पानी के खेल” का बड़ा मामला बनता जा रहा है। शहर की जनता जहां सुबह से रात तक पानी के लिए परेशान घूम रही है, वहीं दूसरी तरफ आरोप हैं कि आम लोगों के हिस्से का नर्मदा जल निजी टैंकरों के जरिए होटल, हॉस्टल, मॉल और बड़े प्रतिष्ठानों तक पहुंचाया जा रहा है।

 

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शहर के कई इलाकों में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोगों का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर दिखाई देने लगा है। कहीं जोन कार्यालयों पर हंगामा हो रहा है, तो कहीं हाइड्रेंट पर विवाद और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आ रही हैं। रहवासियों का आरोप है कि नगर निगम की पूरी पानी वितरण व्यवस्था “सेटिंग” और “मैनेजमेंट” के भरोसे चल रही है, जबकि आम जनता प्यास से जूझ रही है

 

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करोड़ों का ठेका, फिर भी सिस्टम फेल

नगर निगम ने नर्मदा जल टंकियों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी L&T कंपनी को सौंप रखी है। कंपनी को हर साल करोड़ों रुपए दिए जा रहे हैं ताकि टंकियों की सफाई, मॉनिटरिंग, वाल्व संचालन और जल वितरण व्यवस्था ठीक से चल सके। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। कई टंकियों पर कंपनी के कर्मचारी तक मौजूद नहीं रहते। आरोप हैं कि वाल्व संचालन नगर निगम कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के करीबी लोगों के हाथों में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि टंकियों को मनमाने तरीके से भरा जा रहा है और इसी खेल के जरिए निजी टैंकरों को पानी भरवाया जा रहा है।

 

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625 टैंकर मैदान में, फिर भी जनता प्यासे क्यों?

नगर निगम ने दावा किया है कि जल संकट से निपटने के लिए शहर में 625 टैंकर लगाए गए हैं। इनमें 100 निगम के और 525 निजी टैंकर शामिल हैं। हर टैंकर को रोज पांच ट्रिप पानी सप्लाई करने की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन आरोप यह है कि कई टैंकर जनता के लिए सिर्फ तीन ट्रिप करते हैं और बाकी पानी “सेटिंग” के जरिए बाजारों, हॉस्टलों और बड़े संस्थानों में बेच दिया जाता है। सूत्रों के मुताबिक 6 से 8 हजार लीटर पानी वाले टैंकर 800 से 1300 रुपए तक में सप्लाई किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ टैंकर चालकों पर हाइड्रेंट से अतिरिक्त पानी भरने और इसके बदले 100 से 200 रुपए तक की अवैध वसूली करने के आरोप भी लग रहे हैं। सवाल यह है कि जब शहर में जल संकट चरम पर है, तब आखिर यह पानी किसकी मिलीभगत से निजी कारोबार में लगाया जा रहा है?

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जनता के हिस्से का पानी होटल और मॉल तक?

शहर में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब आम लोग 10-15 मिनट की पानी सप्लाई के लिए जूझ रहे हैं, तब बड़े होटल, हॉस्टल, अस्पताल और शॉपिंग मॉल तक लगातार पानी कैसे पहुंच रहा है? स्थानीय लोगों का दावा है कि मुंबई हॉस्पिटल क्षेत्र की पानी टंकी पर खुलेआम बड़े टैंकरों को हाइड्रेंट से पानी भरते देखा जा सकता है। कई टैंकरों पर नगर निगम के स्टिकर लगे होने की भी चर्चा है। रहवासियों का कहना है कि अगर पानी की इतनी कमी है तो फिर निजी प्रतिष्ठानों तक पानी पहुंचाने की अनुमति किसके आदेश पर दी जा रही है? जनता पूछ रही है कि क्या शहर में अब पानी भी पैसे वालों के हिसाब से बांटा जा रहा है?

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टंकियां पूरी क्यों नहीं भरी जा रहीं?

जलूद प्लांट से नर्मदा का भरपूर पानी इंदौर पहुंचने के बावजूद शहर की पानी टंकियां पूरी क्षमता तक नहीं भरी जा रहीं। जानकारी के मुताबिक 6 मीटर तक भरने वाली टंकियों में सिर्फ 3 से 4 मीटर तक ही पानी भरा जा रहा है। इसी कारण कॉलोनियों में पानी की सप्लाई घटकर महज 10 से 15 मिनट तक सिमट गई है। लोग बाल्टी और ड्रम लेकर घंटों इंतजार कर रहे हैं, लेकिन पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा। रहवासियों का आरोप है कि जानबूझकर टंकियों में पानी कम भरा जा रहा है ताकि टैंकर सप्लाई का खेल चलता रहे। सूत्रों के मुताबिक टंकियों में आधा मीटर और सम्प में करीब डेढ़ मीटर पानी रिजर्व रखकर उसी पानी से टैंकर भरे जा रहे हैं।

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“कृत्रिम जल संकट” पैदा करने के आरोप

अब शहर में यह चर्चा तेज हो गई है कि इंदौर में प्राकृतिक नहीं बल्कि “कृत्रिम जल संकट” पैदा किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि जब नर्मदा का पानी पर्याप्त मात्रा में आ रहा है तो फिर जनता तक सप्लाई कम क्यों हो रही है? लगातार बढ़ती शिकायतों और विरोध प्रदर्शनों के बीच नगर निगम की मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। रहवासियों का साफ कहना है कि यदि पानी वितरण में पारदर्शिता नहीं लाई गई और टैंकर माफिया पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में जनता का आक्रोश और भड़क सकता है।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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