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Damoh News : दमोह के संजीवनी अस्पताल में फर्जी डिग्री के आधार पर डॉक्टर बन कर रहे थे इलाज, दो गिरफ्तार

दमोह के संजीवनी अस्पताल में फर्जी डिग्री के आधार पर नौकरी कर रहे दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये दोनों आरोपी नकली एमबीबीएस डिग्री और फर्जी रजिस्ट्रेशन के सहारे नौकरी कर रहे थे। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि कई लोगों को फर्जी डॉक्टर बनाकर अस्पतालों में नियुक्त कराने का नेटवर्क सक्रिय है।
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दमोह के संजीवनी अस्पताल में फर्जी डिग्री के आधार पर डॉक्टर बन कर रहे थे इलाज, दो गिरफ्तार

दमोह। जिले के संजीवनी अस्पताल में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी कर रहे दो कथित डॉक्टरों का दमोह पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि इस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है। मामले में फर्जी एमबीबीएस डिग्री, मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन और अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अस्पताल में नियुक्ति पाने का खुलासा हुआ है।

ग्वालियर और सीहोर के निवासी

कोतवाली थाना मनीष कुमार के अनुसार, सीएमएचओ कार्यालय से 16 मई को जांच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ था। जांच में सामने आया कि ग्वालियर निवासी डॉ. कुमार सचिन यादव और सीहोर निवासी डॉ. राजपाल गौर ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित संजीवनी क्लीनिक, सुभाष कॉलोनी दमोह में नौकरी पाने के लिए फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए थे।

एक साल से कर रहे थे इलाज

पुलिस के मुताबिक दोनों आरोपियों ने खुद को योग्य चिकित्सक बताकर नकली एमबीबीएस डिग्री, मेडिकल काउंसिल पंजीयन प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज जमा किए थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर दोनों करीब एक वर्ष से अस्पताल में कार्यरत थे। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने न सिर्फ सरकारी व्यवस्था को धोखा दिया, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य और जीवन के साथ भी गंभीर खिलवाड़ किया।

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ये आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में डॉ. कुमार सचिन यादव, निवासी ग्वालियर और डॉ. राजपाल गौर, निवासी सीहोर को गिरफ्तार किया है। दोनों के खिलाफ कोतवाली थाना में अलग-अलग अपराध दर्ज किए गए हैं। वहीं, जबलपुर निवासी डॉ. अजय मौर्य को इस मामले में आरोपी बनाया गया है, जिसकी तलाश जारी है। पुलिस को पूछताछ में जानकारी मिली है कि वह भी संजीवनी अस्पताल से जुड़ा हुआ था और फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराने में उसकी भूमिका हो सकती है।

पूछताछ में बड़ा खुलासा

पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया है कि पैसों के बदले कई लोगों को फर्जी डॉक्टर बनाकर अस्पतालों में नियुक्त कराने का नेटवर्क सक्रिय है। आरोपियों ने कथित रूप से फर्जी टइइर डिग्री, डॉक्टर रजिस्ट्रेशन और अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। अब पुलिस उन लोगों की तलाश कर रही है जो इस फजीर्वाड़े में सहयोग कर रहे थे।

भोपाल स्तर तक जांच की तैयारी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है, क्योंकि संजीवनी अस्पताल सीधे आम जनता के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा है। प्रारंभिक जांच में भोपाल स्तर की कुछ संस्थाओं की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। ऐसे में जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।

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इन धाराओं में केस दर्ज

दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(3), 338, 336(3) और 340(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।

 दो आरोपी गिरफ्तार, तीसरे की तलाश जारी है

संजीवनी अस्पताल में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी कर रहे दो कथित डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। एक अन्य आरोपी की तलाश की जा रही है। फर्जी एमबीबीएस डिग्री, मेडिकल काउंसिल रजिस्ट्रेशन और अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अस्पताल में नियुक्ति पाने का खुलासा हुआ है। इसकी जांच की जा रही है।

आनंद कलादगी, पुलिस अधीक्षक दमोह

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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