Chhattisgarh:गृहमंत्री अमित शाह ने दिखाई 400 नई डायल-112 गाड़ियों को हरी झंडी, रायपुर में शुरू हुई हाईटेक इमरजेंसी सेवा

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सुरक्षा और आपात सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तीन दिवसीय दौरे पर रायपुर पहुंचे, जहां उन्होंने नई तकनीक से लैस ‘नेक्स्ट जेन सीजी डायल-112 सेवा’ का शुभारंभ किया। माना पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह और कई मंत्री मौजूद रहे। इस दौरान 400 नई डायल-112 गाड़ियों और मोबाइल फॉरेंसिक वैन को रवाना किया गया। सरकार का कहना है कि नई सेवा से लोगों को पुलिस, चिकित्सा और अग्निशमन जैसी सुविधाएं पहले से अधिक तेजी और बेहतर तरीके से मिल सकेंगी।
एक नंबर पर मिलेगी हर आपात मदद
नई डायल-112 सेवा को ‘एक्के नंबर, सब्बो बर’ थीम के साथ शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को एक ही नंबर पर हर तरह की आपात सहायता उपलब्ध कराना है। अब किसी हादसे, आग लगने, महिला सुरक्षा, सड़क दुर्घटना या मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में अलग अलग नंबर याद रखने की जरूरत नहीं होगी। सरकार के अनुसार इस नई व्यवस्था में पुलिस सेवा, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस, महिला हेल्पलाइन, चाइल्ड हेल्पलाइन और आपदा सहायता सेवाओं को एक साथ जोड़ा गया है। इससे लोगों तक मदद जल्दी पहुंच सकेगी और समय की बचत होगी।
आधुनिक तकनीक से लैस होंगी नई गाड़ियां
कार्यक्रम में जिन 400 नई डायल-112 गाड़ियों को रवाना किया गया, उनमें कई आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। इन वाहनों में जीपीएस सिस्टम, स्मार्टफोन, वायरलेस रेडियो, डैश कैमरा, पीटीजेड कैमरा और मोबाइल एनवीआर जैसी तकनीक लगाई गई है। इन सुविधाओं की मदद से कंट्रोल रूम घटनास्थल की लाइव निगरानी कर सकेगा। साथ ही गाड़ियों की लोकेशन पर भी नजर रखी जाएगी, जिससे पुलिस टीम तेजी से मौके तक पहुंच पाएगी। अधिकारियों का कहना है कि नई तकनीक अपराध नियंत्रण और लोगों की सुरक्षा में काफी मदद करेगी।
अब सभी 33 जिलों तक पहुंचेगी सेवा
अभी तक डायल-112 सेवा प्रदेश के केवल 16 जिलों में संचालित हो रही थी लेकिन नई शुरुआत के बाद इसे सभी 33 जिलों तक बढ़ाया जा रहा है। इससे दूर दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी त्वरित सहायता मिल सकेगी। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था के बाद सड़क हादसों, अपराध और अन्य आपात परिस्थितियों में प्रतिक्रिया समय कम होगा। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
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फॉरेंसिक जांच को मिलेगी मजबूती
अमित शाह ने कार्यक्रम में 33 मोबाइल फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं को भी हरी झंडी दिखाई। अधिकारियों के मुताबिक नए आपराधिक कानून लागू होने के बाद फॉरेंसिक जांच की भूमिका काफी बढ़ गई है। सात साल या उससे अधिक सजा वाले मामलों में अब फॉरेंसिक जांच जरूरी मानी जा रही है। ऐसे में हर जिले में मोबाइल फॉरेंसिक लैब उपलब्ध होने से जांच प्रक्रिया तेज होगी। घटनास्थल पर ही शुरुआती जांच और सबूत इकट्ठा करने का काम आसान हो जाएगा।











