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क्या कुत्ते सूंघकर पकड़ लेंगे कैंसर?भारत में चल रहा बड़ा प्रयोग, वैज्ञानिक बोले- भविष्य बदल सकती है ये तकनीक

रिसर्च में पाया गया कि प्रशिक्षित कुत्ते सात तरह के कैंसर तक पहचान सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि वे शुरुआती स्टेज के कैंसर को भी पकड़ लेते हैं
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भारत में चल रहा बड़ा प्रयोग, वैज्ञानिक बोले- भविष्य बदल सकती है ये तकनीक

कोलोरेक्टल समेत कई तरह के कैंसर अक्सर दूसरी या तीसरी स्टेज में जाकर पकड़ में आते हैं। तब तक बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है और इलाज ज्यादा मुश्किल हो जाता है। लेकिन आने वाले समय में कैंसर की पहचान का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। दुनिया के कई देशों में इस समय कुत्तों की मदद से कैंसर का शुरुआती स्टेज में पता लगाने को लेकर बड़े स्तर पर रिसर्च चल रही है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर ये प्रयोग पूरी तरह सफल रहे, तो भविष्य में कुत्ते सिर्फ सूंघकर कैंसर की पहचान कर सकेंगे।

भारत में हो रही अहम रिसर्च

भारत में भी इस दिशा में प्रयोग शुरू हो चुके हैं। कर्नाटक के छह अलग-अलग अस्पतालों में प्रशिक्षित कुत्तों की मदद से कैंसर पहचानने पर स्टडी की गई। यह रिसर्च बेंगलुरु की स्टार्टअप कंपनी डॉगनोसिस ने की। स्टडी में कुत्तों ने 1502 मरीजों के सैंपल सूंघे और 91% सटीकता के साथ यह पहचान लिया कि किस मरीज को कैंसर है और किसे नहीं।

यह स्टडी 1 मई 2026 को जर्नल ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित हुई। रिसर्च का नेतृत्व हुब्बली स्थित रेड ऑन कैंसर सेंटर के सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. संजीव कुलगोड ने किया।

यह भी पढ़ें: World AIDS Vaccine Day 2026: क्यों अब तक नहीं बन पाई HIV की वैक्सीन? जानिए रिसर्च कहां तक पहुंची

कुत्तों की सूंघने की क्षमता क्यों है खास?

  • कुत्तों को इंसानों का सबसे वफादार साथी माना जाता है, लेकिन उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी सूंघने की क्षमता है, कुत्तों की सूंघने की
  • क्षमता इंसानों से 10 हजार से 1 लाख गुना ज्यादा तेज होती है
  • उनकी नाक में लगभग 300 मिलियन गंध रिसेप्टर्स होते हैं
  • वे बेहद हल्की गंध और शरीर में होने वाले छोटे बदलाव भी पहचान सकते हैं
  • इसी वजह से उनकी नाक को “सुपर कंप्यूटर” कहा जाता है 

बड़ा सवाल आखिर कुत्ते कैंसर कैसे पहचानते हैं?

वैज्ञानिकों के मुताबिक शरीर में कैंसर होने पर कुछ खास तरह के केमिकल्स निकलते हैं। इन्हें वॉलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड यानी VOC कहा जाता है। टिमोथी क्वान लो और उनकी टीम ने बताया कि कुत्ते इन VOCs की गंध पहचान लेते हैं। यही गंध शरीर में संक्रमण, बीमारी या कैंसर का संकेत देती है।

ऐसे किया जाता है टेस्ट

  • मरीज को एक खास मास्क पहनाया जाता है
  • मरीज 10 मिनट तक उसमें सांस लेता है
  • मास्क में शरीर की गंध वाले VOC जमा हो जाते हैं
  • बाद में यह मास्क कुत्तों को सूंघने के लिए दिया जाता है

रिसर्च में पाया गया कि प्रशिक्षित कुत्ते सात तरह के कैंसर तक पहचान सकते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि वे शुरुआती स्टेज के कैंसर को भी पकड़ लेते हैं, जिसे सामान्य टेस्ट में पहचानना कई बार मुश्किल होता है।

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क्यों अहम मानी जा रही यह तकनीक?

  1. अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो कैंसर की शुरुआती पहचान आसान हो सकती है। इससे:
  2. इलाज जल्दी शुरू हो सकेगा
  3. मरीज की जान बचने की संभावना बढ़ेगी
  4. महंगे टेस्ट की जरूरत कम हो सकती है
  5. ग्रामीण इलाकों में भी आसान स्क्रीनिंग संभव हो सकती है
Aakash Waghmare
By Aakash Waghmare

आकाश वाघमारे | MCU, भोपाल से स्नातक और फिर मास्टर्स | मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के तौर पर 3 वर्षों का क...Read More

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