PU Special :मप्र के पूर्व डीजी अरुण गुर्टू के घर है लौह अयस्क के सिंगल स्टोन पर बनी दुनिया की इकलौती गणेश प्रतिमा

राजीव सोनी, भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस के पूर्व डीजी (डाइरेक्टर जनरल) व सामाजिक कार्यकर्ता अरुण गुर्टू (89) के पास बुद्धि के देवता भगवान गणेश की दुर्लभ और नायाब गणेश प्रतिमाओं का बड़ा संग्रह है। इनमें 'आयरन ओर' हेमेटाइट के सिंगल स्टोन पर निर्मित लंबोदर की सवा फीट ऊंची प्रतिमा खास और इकलौती है।
घर के हर कोने में सजाए गणेश
यह दशकों पहले उन्हें बस्तर से मिली, जबकि विश्राम की मुद्रा में गजानन को वेद पाठ सुनाते मूषक की प्रतिमा वे डेढ़ साल पहले कर्नाटक से लाए हैं। चर्चित पुलिस अधिकारी रहे गुर्टू ने अपने निवास में विभिन्न मुद्राओं वाले गजानन के सैकड़ों स्वरूपों के डिस्पले के लिए विशेष व्यवस्थाएं जुटाई हैं। अलग-अलग कमरों के अलावा गैलरी में विराजित विभिन्न स्वरूपों की गणेश प्रतिमाओं को समय-समय पर बदलते रहते हैं। इससे डिस्पले के रैक में नयापन और लंबोदर की मनमोहक मुस्कान वाली मूर्तियों में भी बदलाव होता रहता है।
'रेयर ऑफ रेयरेस्ट': लाल-भूरे रंग की दुर्लभ है यह प्रतिमा
सोने-चांदी और अष्टधातु में तो गणेश प्रतिमाएं उनके संग्रह में हैं हीं। लेकिन उनके संग्रह में गजानन के कुछ विग्रह ऐसे भी मौजूद हैं जो 'रेयर ऑफ रेयरेस्ट' की श्रेणी में शामिल है। इनमें गहरे लाल-भूरे रंग हेमेटाइट(लौह अयस्क के पत्थर) पर निर्मित गणेश प्रतिमा अनूठी और अनमोल है। उनका कहना है कि ऐसी दूसरी प्रतिमा कहीं देखने को नहीं मिलती, इसे उन्होंने बस्तर के प्रसिद्ध कलाकार से विशेष आग्रह पर बनवाया था।
सीधी बात: अरुण गुर्टू, रिटायर्ड डीजी
सवाल: लौह अयस्क (हेमेटाइट) पर गणेश प्रतिमा उकेरने का विचार कैसे आया?
जवाब: यह प्रतिमा दुनिया में इकलौती है। मैंने आर्टिस्ट से आग्रह किया था। उसने गहरे लाल-भूरे रंग के हेमेटाइट पत्थर में मानो गणेशजी को सजीव कर दिया।
सवाल: आपके कलेक्शन में सबसे बाद में कौन से गणेश शामिल हुए। यह शौक कब से चल रहा है?
जवाब: डेढ़ साल पहले मैं कर्नाटक से लेकर आया था। विश्राम की मुद्रा में मूषक से वेद पाठ सुनते गणेश। पिछले 56 साल से यह शौक चल रहा है।
सवाल: प्रतिमा कलेक्शन में भगवान गणेशजी का ही चयन क्यों?
जवाब: गणेशजी खुशमिजाज देवता हैं। किसी भी रूप में रखें वह आशीर्वाद देते हैं। शिवजी-विष्णुजी के स्वरूप ज्यादा नहीं मिलेंगे लेकिन गणेशजी अनंत रूपों में व्याप्त है।
सवाल: गणेशोत्सव के दौरान बाजार में मिलने वालीं प्रतिमाओं पर क्या कहेंगे?
जवाब: मेरा एक ही निवेदन है कि पर्यावरण की रक्षा भी देवपूजा है। मूर्तियों में प्लास्टर ऑफ पेरिस और प्लास्टिक आदि का प्रयोग बिल्कुल न करें।
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