PU Special :स्टेशन सूने, मेट्रो खाली, 75 से 15 मिनट पर आई फ्रीक्वेंसी, फिर भी एक फेरे में 10 यात्री

ब्रजेंद्र वर्मा, भोपाल। दिन बुधवार, तारीख 19 अगस्त, समय दोपहर 2:50 बजे। पीपुल्स समाचार और पीपुल्स अपडेट की टीम सुभाष नगर स्टेशन पर मेट्रो ट्रेन का इंतजार कर रही है। 2:58 पर मेट्रो ट्रेन स्टेशन पर रुकती है। एनाउंसमेंट के साथ ही मेट्रो ट्रेन के गेट खुलते हैं। पीपुल्स की टीम के अलावा सिर्फ एक यात्री एम्स जाने के लिए खड़े थे। सभी ट्रेन में सवार हो जाते हैं। ट्रेन में हमारे अलावा सिर्फ एक ही यात्री था। पूरी ट्रेन खाली है। ठीक दोपहर 3 बजे ट्रेन एम्स की ओर जाने के लिए चलने लगती है। पांच मिनट बाद ट्रेन केंद्रीय विद्यालय स्टेशन पर पहुंचती है पर यहां भी कोई यात्री नहीं बैठता है। इस स्टेशन पर सन्नाटा पसरा हुआ मिला।
पहले 3 और फिर मिले 7 यात्री
बोर्ड ऑफिस और एमपी नगर स्टेशन पर भी यही हाल रहा। ट्रेन रानी कमलापति मेट्रो स्टेशन के लिए रवाना हो जाती है। इस स्टेशन से एक स्टूडेंट व एक अन्य यात्री ट्रेन में चढ़ते हैं। इन लोगों को एम्स जाना था। इसके बाद ट्रेन डीआरएम, अलकापुरी होते हुए एम्स स्टेशन पर दोपहर 3:25 बजे पहुंचती हैं। 25 मिनट की यात्रा में यात्रियों की संख्या नहीं बढ़ी। सिर्फ तीन यात्रियों ने यात्रा की। बता दें कि 17 अगस्त से मेट्रो ट्रेन हर 15 मिनट के अंतराल में संचालित होने लगी हैं, पर ये ट्रेन पूरी खाली ही चल रही है। शाम 4 बजे पीपुल्स समाचार व अपडेट की टीम एम्स मेट्रो स्टेशन से सुभाष नगर(6 किलोमीटर) के लिए मेट्रो में बैठ जाते हैं। इस तरफ से भी मेट्रो में एम्स से सिर्फ 4 यात्री सवार होते हैं। अलकापुरी स्टेशन से 2 और 1 यात्री सुभाष नगर जाने के लिए और चढ़ते हैं। कुल सात यात्रियों ने ही एम्स से सुभाष नगर तक यात्रा की।

यात्री नहीं मिलने पर हर 15 मिनट में शुरू कर दी मेट्रो
21 दिसंबर 2025 को भोपाल मेट्रो का संचालन शुरू हुआ था। शुरुआती दिनों में शहरवासियों ने मेट्रो में खूब यात्रा की। स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ रही, लेकिन एक महीने बाद मेट्रो यात्रियों के लिए तरसने लगी। दरसअल पहले 75 मिनट में मेट्रो ट्रेन संचालित होती थी। ऐसे में यदि कोई यात्री सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन पर एम्स जाए और वहां से वापस सुभाष नगर आए तो उसे करीब एक घंटे तक का इंतजार करना पड़ता था। ऐसे में जनवरी, फरवरी, मार्च, अप्रैल, मई, जून, जुलाई में यात्रियों की संख्या नहीं बढ़ सकी। इसी को देखते हुए 17 अगस्त से मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएमआरसीएल) ने भोपाल मेट्रो की नई समय-सारणी जारी की। इसके तहत हर 15 मिनट में मेट्रो ट्रेन की सेवा उपलब्ध है।
क्या कहते हैं यात्री
बाहर था,इसलिए अभी सफर करने आया

मैं बाहर था। जब भोपाल में मेट्रो शुरू हुई,तब बाहर था। भोपाल आने पर मेट्रो में बैठने का मन हुआ तो आ गया। सुभाष नगर स्टेशन पर आकर देखा तो यात्री ही नहीं दिखे। अकेला मेट्रो में सफर किया। ऐसा लगा कि पूरी मेट्रो मेरे लिए ही चल रही है।
-असलम खान, यात्री
मैं मेट्रो की सुविधा का उपयोग कर रही

एमपी नगर कोचिंग पढ़ने आती हूं, इसलिए मेट्रो ट्रेन की सुविधा का उपयोग कर रही हूं। मेट्रो में कम ही यात्री मिलते हैं। सुविधा बहुत अच्छी है, लेकिन यह रूट अधिक लंबा नहीं हैं, इसलिए कम ही लोग आ रहे हैं।
-सृष्टि सिंह, स्टूडेंट
बाहर से आया हूं, तो मेट्रो में बैठ गया
मैं समझा कि दिल्ली मेट्रो की तरह भोपाल मेट्रो ट्रेन में यात्रियों की भीड़ होती होगी, लेकिन यहां आकर देखा तो स्टेशन पर सन्नाटा था। मेट्रो ट्रेन में चढ़ा तो पूरी ट्रेन खाली दिखी। सुविधा अच्छी हैं, लेकिन लोग लाभ क्यों नहीं उठा रहे हैं, यह मुझे समझ नहीं आया। -बलराम सिंह, यात्री
दोस्तों के साथ घूमने आया

मेट्रो में दो दोस्तों के साथ घूमने आया हूं। सोचा था कि टिकट लेने के लिए भीड़ लगी होगी, लेकिन रानी कमलापति स्टेशन पर सन्नाटा दिखा। आसानी से टिकट मिल गया। मेट्रो में बैठा तो भी लोग नहीं दिखे। मेट्रो में यात्रा करके अच्छा लगा।
-वरूण जाटव, यात्री
मेट्रो : फैक्ट फाइल
मेट्रो संचालन शुरू: 21 दिसंबर 2025
प्रायोरिटी कॉरिडोर: सुभाष नगर-एम्स (ऑरेंज लाइन)
रूट की लंबाई: करीब 6.22 किमी
स्टेशन: सुभाष नगर, केंद्रीय विद्यालय, बोर्ड ऑफिस, एमपी नगर, रानी कमलापति, डीआरएम, अलकापुरी और एम्स
कुल स्टेशन: 8
नई समय-सारणी लागू:17 अगस्त 2026
नई फ्रीक्वेंसी: हर 15 मिनट में मेट्रो
पुरानी फ्रीक्वेंसी: करीब 75 मिनट के अंतराल पर
सुभाष नगर से पहली मेट्रो: सुबह 11:30 बजे
एम्स से पहली मेट्रो: दोपहर 12 बजे
इनसाइड स्टोरी:पार्किंग की कमी और लास्ट माइल कनेक्टिविटी की कमी बड़ा कारण
एक पटरी से दोनों पटरी, 75 मिनट से घटकर 15 मिनट, सिग्नलिंग सिस्टम की मंजूरी के बाद रफ्तार बढ़ी, मेट्रो ट्रेन अब ज्यादा फेरे लगा रही है। भोपाल मेट्रो को यात्रियों के लिए पहले से कहीं ज्यादा सुविधाजनक बनाने की कोशिश हुई है, लेकिन यात्रियों का आंकड़ा नहीं बढ़ सका है। इसकी सबसे बड़ी वजह छोटा रूट, इंटरचेंज, लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और पार्किंग न होना है।
सुविधाएं पूरी नहीं
मेट्रो का टिकट लेने से पहले यात्री को स्टेशन तक पहुंचना पड़ता है। यही वह हिस्सा है, जिसे लास्ट-माइल कनेक्टिविटी कहा जाता है। मेट्रो शुरू होने से पहले ही स्टेशन के साथ मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, फीडर सेवा, पार्किंग और बस-बे जैसी सुविधाओं की जरूरत बताई गई थी। इन सुविधाओं के पूरी तरह उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में यात्री को स्टेशन तक पहुंचने के लिए ऑटो, दोपहिया या कार का सहारा लेना पड़ता है। अगर कोई व्यक्ति घर से ऑटो लेकर मेट्रो स्टेशन पहुंचे, फिर मेट्रो से कुछ किलोमीटर जाए और आगे मंजिल तक पहुंचने के लिए फिर ऑटो ले, तो वह मेट्रो को नजरअंदाज करता है।
किराया भी मुकाबले का हिस्सा
प्रायोरिटी कॉरिडोर पर किराया दूरी के हिसाब से तय किया गया है। एक स्टेशन की यात्रा के लिए 20 रुपए, तीन से पांच स्टेशनों के लिए 30 रुपए और पूरे सुभाष नगर-एम्स सफर के लिए 40 रुपए किराया रखा गया था। 40 रुपए का टिकट अपने आप में बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन यात्री की जेब से सिर्फ यही रकम नहीं निकलती। स्टेशन तक आने का ऑटो या ई-रिक्शा, फिर स्टेशन से गंतव्य तक जाने का खर्च जोड़ें तो सड़क परिवहन की तुलना में अंतर कम हो सकता है। यही कारण है कि मेट्रो को सिर्फ टिकट सस्ता करने से नहीं, पूरे डोर-टू-डोर सफर को सस्ता और आसान बनाने से यात्री मिलेंगे।













