इंदौर में सील क्लिनिक का पाकिस्तानी कनेक्शन! 10 साल की दिव्यांशी की मौत के मामले में दो डॉक्टरों पर केस

इंदौर- इंदौर में पाकिस्तानी मूल के बताए जा रहे एक डॉक्टर और उसके कथित साथी के खिलाफ 10 साल की बच्ची की मौत के मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया है। खातीवाला टैंक स्थित हर्ष क्लिनिक को स्वास्थ्य विभाग पहले ही सील कर चुका था। आरोप है कि इसके बावजूद क्लिनिक दोबारा खोलकर मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया। बुखार और खांसी की शिकायत लेकर यहां पहुंची दिव्यांशी की हालत उपचार के दौरान बिगड़ गई। परिजन उसे एमवाय अस्पताल ले गए, जहां उसकी मौत हो गई। मामले की जांच के बाद जूनी इंदौर पुलिस ने क्लिनिक संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की है।
पहले सील हो चुका था हर्ष क्लिनिक
जूनी इंदौर थाना प्रभारी अनिल गुप्ता के मुताबिक, खातीवाला टैंक स्थित हर्ष क्लिनिक का संचालन श्रीचंद बागेजा और ज्ञान एस. पंजवानी करते हैं। क्लिनिक पहले भी स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के दायरे में आ चुका था। विभाग ने डिग्री की वैधता और इलाज से जुड़ी अनियमितताओं के चलते क्लिनिक को सील किया था।आरोप है कि सील किए जाने के बावजूद दोनों संचालकों ने क्लिनिक को दोबारा खोल लिया और वहां मरीजों का इलाज शुरू कर दिया। अब 10 साल की बच्ची की मौत के मामले में दोनों के खिलाफ पुलिस ने प्रकरण दर्ज किया है।
बुखार-खांसी की शिकायत लेकर क्लिनिक पहुंचे थे परिजन
जानकारी के अनुसार, खंडवा नाका के गणेश नगर निवासी मनोज सोलंकी की 10 वर्षीय बेटी दिव्यांशी को बुखार और खांसी की शिकायत थी। परिजन उसे इलाज के लिए हर्ष क्लिनिक लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि उपचार के दौरान बच्ची की हालत बिगड़ गई। इसके बाद परिजन उसे एमवाय अस्पताल ले गए, जहां उसकी मौत हो गई।बच्ची की मौत के बाद क्लिनिक में किए गए उपचार और दी गई दवाओं को लेकर सवाल उठे। पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आया कि बच्ची को उच्च क्षमता वाली एलोपैथिक दवाएं दी गई थीं। हालांकि, बच्ची की मौत का सीधा संबंध दवाओं या कथित चिकित्सकीय लापरवाही से था या नहीं, इसकी पुष्टि संबंधित चिकित्सकीय साक्ष्यों और जांच के निष्कर्षों से ही होगी।
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पाकिस्तानी मूल के बताए जा रहे डॉक्टर की भूमिका भी चर्चा में
इस मामले में एक क्लिनिक संचालक को पाकिस्तानी मूल का बताया जा रहा है। दोनों संचालकों की चिकित्सकीय योग्यता, डिग्री की वैधता और क्लिनिक चलाने की अनुमति जैसे पहलू महत्वपूर्ण हैं। स्वास्थ्य विभाग पहले ही क्लिनिक पर कार्रवाई कर चुका था, ऐसे में सील होने के बाद वहां दोबारा इलाज कैसे शुरू हुआ, यह भी जांच का विषय है।किसी व्यक्ति का पाकिस्तानी मूल का होना अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं है। मामले में कानूनी जिम्मेदारी संबंधित दस्तावेजों, चिकित्सकीय योग्यता, क्लिनिक के संचालन और उपचार से जुड़े तथ्यों के आधार पर तय होगी।
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बच्ची की मौत के बाद क्लिनिक की निगरानी पर सवाल
इस घटना ने सील किए गए चिकित्सा संस्थानों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। यदि किसी क्लिनिक को स्वास्थ्य विभाग ने नियमानुसार सील किया था, तो उसके दोबारा खुलने और वहां मरीजों का इलाज होने की परिस्थितियों की जांच जरूरी है।




















