ईरान पर अमेरिका का बड़ा प्लान, ऊर्जा और परमाणु ठिकानों पर MOAB से हमले की तैयारी, CNN की रिपोर्ट में दावा

न्यूयॉर्क। अमेरिकी सेना ने ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे और परमाणु स्थलों के खिलाफ हमले की नई योजनाएं तैयार की हैं। इन योजनाओं में अमेरिका के सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बम का इस्तेमाल भी शामिल है। यह खुलासा CNN ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से किया है। अमेरिकी सेना की योजना में GBU-43/B 'मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट' (MOAB) शामिल है। इसे आमतौर पर मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स कहा जाता है। अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू करने का आदेश देते हैं तो इस बम का इस्तेमाल किया जा सकता है। CNN की रिपोर्ट के अनुसार, संभावित लक्ष्यों में ऊर्जा बुनियादी ढांचा और 'पिकएक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) पर स्थित संदिग्ध परमाणु स्थल शामिल हैं। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब ट्रम्प प्रशासन छह महीने से अधिक समय से चल रहे युद्ध को खत्म करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालांकि फिलहाल किसी राजनयिक समाधान के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
ईरान को नहीं बनाने देंगे परमाणु बम
ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा, लेकिन उन पर इस संघर्ष को समाप्त करने का दबाव भी है। सैन्य योजनाओं की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने CNN को बताया कि ट्रम्प ने कई ऊर्जा बुनियादी ढांचों को निशाना बनाने के लिए अतिरिक्त हमले की योजनाएं तैयार करने का आदेश दिया है। इसमें MOAB के इस्तेमाल की संभावना भी शामिल है। एक दूसरे सूत्र ने बताया कि ईरान की परमाणु सुविधाओं जिसमें (पिकएक्स माउंटेन भी शामिल है) पर हमले की योजनाओं में स्पष्ट रूप से इस बम को शामिल किया गया है।
अभी साफ नहीं हमला होगा कि नहीं
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने CNN को बताया कि प्रशासन ऐसी संवेदनशील सैन्य योजनाओं पर कोई टिप्पणी नहीं करता है। यह हमला हो भी सकता है और नहीं भी, इसको लेकर निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि ट्रम्प सभी विकल्प खुले रखते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार न आ सकें। पेंटागन ने कहा कि वह राष्ट्रपति और रक्षा सचिव के निर्देशों को पूरा करने के लिए कई तरह की ऑपरेशनल योजनाओं पर काम करता है।
मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स क्या है
GBU-43/B मैसिव ऑर्डनेंस एयर ब्लास्ट बम, जिसे MOAB (मोआब) भी कहा जाता है। यह अमेरिकी जखीरे में मौजूद सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम है। इसका वजन लगभग 9.8 टन) है और इसे एक बड़े इलाके में बहुत जोरदार धमाका करने के लिए डिजाइन किया गया है। जमीन के काफी अंदर तक घुसने वाले 'बंकर-बस्टर' बमों के विपरीत, MOAB जमीन से टकराने से पहले ही फट जाता है, जिससे इसका धमाका बाहर की तरफ फैलता है। यह बहुत बड़े इलाके को नष्ट कर सकता है। इसलिए यह जमीन के बहुत अंदर बनी सुविधाओं के बजाय बड़े इलाकों में फैले लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए ज्यादा उपयुक्त है।
मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए विकसित किया
इस हथियार को इराक युद्ध के दौरान विकसित किया गया था। इसे बनाने के पीछे एक मकसद मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालना भी था। इसके भीषण धमाके का उद्देश्य दुश्मन सेना को डराना और उन पर आत्मसमर्पण करने या लड़ाई से बचने का दबाव बनाना था। इसे मुख्य रूप से सैनिकों और सैन्य उपकरणों के बड़े जमावड़े और जमीन के ऊपर बनी मजबूत संरचनाओं के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए डिजाइन किया गया था।
ट्रम्प दे चुके हैं इस्तेमाल की मंजूर
ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान पहली बार युद्ध में इसके इस्तेमाल को मंजूरी दी थी। 2017 में अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट के एक सुरंग परिसर पर MOAB गिराया था। अफगान अधिकारियों के अनुसार इस हमले में इस्लामिक स्टेट के 36 लड़ाके मारे गए और उनकी सुरंगें, हथियार तथा गोला-बारूद नष्ट हो गए। अमेरिकी और अफगान अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में कोई भी आम नागरिक नहीं मारा गया।




















