PU Special :40 साल राज, फिर भी 55 जिलों में कांग्रेस के सिर्फ 27 अपने कार्यालय; आज भी किराए के भवन से चल रहा कामकाज

मध्यप्रदेश में कांग्रेस करीब 39 साल 10 महीने सत्ता में रही लेकिन 55 जिलों में केवल 27 जगह पार्टी के अपने कार्यालय हैं। कई जिलों में संगठन किराए के भवनों या नेताओं के निजी परिसरों से चल रहा है।
40 साल राज, फिर भी 55 जिलों में कांग्रेस के सिर्फ 27 अपने कार्यालय; आज भी किराए के भवन से चल रहा कामकाज
55 जिलों में कांग्रेस के सिर्फ 27 अपने कार्यालय

पुष्पेन्द्र सिंह, भोपाल। मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने अलग-अलग दौर में करीब 39 साल 10 महीने तक सत्ता संभाली, लेकिन पार्टी का संगठनात्मक ढांचा अब भी कई जिलों में अपने कार्यालयों के लिए संघर्ष करता दिखाई देता है। प्रदेश में वर्तमान में 55 जिले हैं, जबकि कांग्रेस के पास केवल 27 जिलों में अपने कार्यालय होने की जानकारी सामने आई है। बाकी जिलों में कहीं किराए के भवनों, कहीं नेताओं के निजी परिसरों और कहीं सीमित जगह से पार्टी की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। संगठन की स्थिति यह भी बताती है कि जिला अध्यक्षों की संख्या 71 होने के बावजूद पार्टी के पास हर जिले में अपना स्थायी कार्यालय उपलब्ध नहीं है। कई जगह बैठकें करने के लिए दूसरे स्थानों का सहारा लेना पड़ता है, तो कुछ जिलों में एक कमरे से ही संगठन का कामकाज चल रहा है। दिलचस्प बात यह है कि मध्यप्रदेश में दस साल तक मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह के गृह जिले में भी कांग्रेस का अपना जिला कार्यालय नहीं होने की जानकारी दी गई है।

कई जिलों में किराए के भवनों से चल रहा कामकाज

कांग्रेस के कई जिला संगठनों के पास खुद का कार्यालय नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन जिलों में पार्टी का कामकाज अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत चलाया जा रहा है।

  • बैतूल: यहां कांग्रेस का कार्यालय किराए के भवन में संचालित हो रहा है।
  • रायसेन: ब्लॉक कांग्रेस का कामकाज एक कमरे के कार्यालय से चल रहा है।
  • नर्मदापुरम: जिला कार्यालय नहीं है। बैठकों के लिए होटलों का इस्तेमाल किया जाता है।
  • विदिशा: पार्टी का कामकाज किराए की दुकान से संचालित हो रहा है।
  • अशोकनगर: जिलाध्यक्ष की बिल्डिंग में कार्यालय संचालित है।
  • हरदा: पिछले 15 वर्षों से पार्टी का कार्यालय किराए की बिल्डिंग में चल रहा है।
  • जबलपुर: जिला अध्यक्ष सौरभ नाटी शर्मा के निजी कार्यालय से संगठन का कामकाज संचालित हो रहा है।
  • कटनी: यहां एक कमरे में कार्यालय चल रहा है।
  • दमोह: अजय टंडन के स्वामित्व वाले स्थान पर पार्टी का कार्यालय संचालित है।
  • सिंगरौली: कांग्रेस का कार्यालय किराए के भवन में है, जिसके लिए हर महीने 15 हजार रुपये किराया दिया जाता है।
  • मंडला: यहां भी पार्टी का कार्यालय किराए के भवन में संचालित हो रहा है।

ग्वालियर में शहर कांग्रेस का कार्यालय पार्टी की निजी संपत्ति है। इससे स्पष्ट होता है कि अलग-अलग जिलों में कार्यालयों की व्यवस्था एक जैसी नहीं है। कहीं पार्टी के पास अपनी संपत्ति है, तो कहीं संगठन को निजी या किराए की जगह पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

अपने भवन हैं, लेकिन कई जगह सीमित सुविधाएं

प्रदेश के कुछ जिलों में कांग्रेस के पास अपने कार्यालय हैं लेकिन उनकी जगह, बनावट या संचालन की व्यवस्था अलग-अलग है। उपलब्ध जानकारी में इन कार्यालयों की स्थिति इस प्रकार बताई गई है।

  • सीहोर: ट्रैफिक पुलिस चौकी के पास पार्टी का अपना भवन है।
  • छतरपुर: कांग्रेस का अपना कार्यालय है। इसके खर्च का प्रबंधन दुकानों से मिलने वाले किराए के जरिए किया जाता है।
  • अनूपपुर: पार्टी का कार्यालय स्वयं के स्वामित्व वाले भवन में संचालित है।
  • सीधी: यहां कांग्रेस का करीब 5,000 वर्गफीट में बना भवन है।
  • शहडोल: बुढ़ार चौक स्थित बीच बाजार में पार्टी का अपना भवन है।
  • सतना: कार्यालय में करीब 1,500 वर्गफीट का एक हॉल और एक छोटा केबिन है।
  • बालाघाट: इंदिरा गांधी ट्रस्ट की ओर से दिए गए भवन में कार्यालय संचालित होता है।
  • नरसिंहपुर: जिला कांग्रेस कार्यालय पार्टी का अपना है।
  • सिवनी: यहां भी कांग्रेस का अपना कार्यालय भवन है।
  • छिंदवाड़ा: पार्टी का कार्यालय वर्ष 2000 में बना था।

इन उदाहरणों से पता चलता है कि जिन जिलों में कार्यालय उपलब्ध हैं, वहां भी भवनों का आकार और उनके संचालन की व्यवस्था अलग-अलग है। कुछ जगह दुकानों से मिलने वाला किराया कार्यालय के खर्च में मदद करता है जबकि अन्य स्थानों पर ट्रस्ट की ओर से उपलब्ध कराए गए भवन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

करीब 40 साल सत्ता में रही कांग्रेस

मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने कई अलग-अलग अवधियों में सरकार चलाई। उपलब्ध कार्यकाल के विवरण के अनुसार पार्टी का कुल शासनकाल लगभग 39 वर्ष 10 महीने रहा। इसमें 1956 से 1967, 1969 से 1977, 1980 से 1990, 1993 से 2003 और 2018 से 2020 तक की अवधि शामिल है।

कांग्रेस के शासनकाल का विवरण इस प्रकार है:

सत्ता में रहने की अवधि लगभग कार्यकाल
1 नवंबर 1956 से 29 जुलाई 1967 10 वर्ष 9 माह
26 मार्च 1969 से 29 अप्रैल 1977 8 वर्ष 1 माह
9 जून 1980 से 1 मार्च 1990 9 वर्ष 9 माह
7 दिसंबर 1993 से 8 दिसंबर 2003 10 वर्ष
17 दिसंबर 2018 से 20 मार्च 2020 1 वर्ष 3 माह
कुल कार्यकाल लगभग 39 वर्ष 10 माह

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संगठन के सामने स्थायी कार्यालयों की चुनौती

प्रदेश में 55 जिले और 71 जिला अध्यक्ष होने के बावजूद पार्टी के अपने कार्यालयों की सीमित उपलब्धता संगठनात्मक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। स्थायी कार्यालय जिला स्तर पर बैठकों, कार्यकर्ताओं के समन्वय, जनसमस्याओं को लेकर गतिविधियों और चुनावी तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जहां कार्यालय नहीं हैं, वहां किराया देना, बैठकों के लिए दूसरी जगह तलाशना या किसी नेता के निजी परिसर पर निर्भर रहना पड़ता है। दूसरी ओर, जिन जिलों में पार्टी की अपनी संपत्ति है, वहां भी भवनों की क्षमता और सुविधाएं अलग-अलग हैं।

Dr. Sumit  Shrivastava
By Dr. Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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