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सूरत में बच्चों की दवा के नाम पर सनसनीखेज फर्जीवाड़ा: गाय-घोड़े का लिवर टॉनिक शीशी में भरकर बेचा, साजिद मुल्ला गिरफ्तार

सूरत के शांतिनाथ मेडिकल स्टोर पर SOG का छापा। मवेशियों के लिवर टॉनिक को बच्चों के Liv.52 Drops की शीशी में भरकर बेचने वाला आरोपी साजिद इब्राहिम मुल्ला गिरफ्तार। जानिए पूरा मामला।
सूरत में बच्चों की दवा के नाम पर सनसनीखेज फर्जीवाड़ा: गाय-घोड़े का लिवर टॉनिक शीशी में भरकर बेचा, साजिद मुल्ला गिरफ्तार

गुजरात के सूरत शहर से एक ऐसा रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने हर माता-पिता के होश उड़ा दिए हैं। यहां एक मेडिकल स्टोर संचालक बच्चों की सेहत से ऐसा घिनौना खिलवाड़ कर रहा था, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। आरोप है कि वह गाय, भैंस, घोड़े और बैल जैसे मवेशियों के लिए इस्तेमाल होने वाले लिवर टॉनिक को बच्चों की दवा (सिरप) बताकर धड़ल्ले से बेच रहा था। मामले की जानकारी मिलते ही सूरत स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और फूड एंड ड्रग्स विभाग की संयुक्त टीम ने गोपीपुरा मोमनावाड रोड स्थित 'शांतिनाथ मेडिकल स्टोर' पर छापेमारी की। पुलिस ने मौके से दुकान के संचालक मोहम्मद साजिद इब्राहिम मुल्ला को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पिछले करीब एक साल से बेखौफ होकर मासूम बच्चों की जिंदगी से यह खतरनाक खिलवाड़ कर रहा था।

कैसे अंजाम दिया जाता था यह खौफनाक खेल?

जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, आरोपी साजिद मुल्ला पशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले हिमालय कंपनी के ‘Liv.52 Protec Liquid Animal Feed Supplement’ को थोक में खरीदता था। यह उत्पाद बाजार में 1 लीटर और 5 लीटर के बड़े पैक में उपलब्ध होता है। आरोपी बड़े डिब्बों से पशुओं वाला लिक्विड निकालकर उसे 60 मिलीलीटर और 100 मिलीलीटर की छोटी बोतलों में भर देता था। इसके बाद वह इन बोतलों पर इंसानों और बच्चों के इस्तेमाल में आने वाले ‘Himalaya Liv.52 Drops 60 ml’ का फर्जी स्टिकर चिपका देता था। दोनों ही उत्पाद लिवर से जुड़ी समस्याओं के लिए इस्तेमाल होते हैं, इसलिए पहली नज़र में देखने पर किसी आम ग्राहक को इस धोखाधड़ी का ज़रा सा भी शक नहीं होता था। लोग अपने मासूम बच्चों को ठीक करने के लिए इसे असली दवा समझकर पिलाते रहे।

330 रुपए के डिब्बे से 660 रुपए से ज्यादा की वसूली

पुलिस की पूछताछ में इस अवैध कारोबार से होने वाले भारी मुनाफे का पर्दाफाश हुआ है। जानकारी के अनुसार, मवेशियों के लिए आने वाले 1 लीटर के लिवर टॉनिक के डिब्बे की अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) करीब 330 रुपए होती है। वहीं, बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले 60 मिलीलीटर के असली Liv.52 Drops की MRP 160 रुपए है। आरोपी पशुओं वाले 1 लीटर के बड़े पैक से छोटी-छोटी कई बोतलें रीफिल कर लेता था। इसके बाद वह इन बोतलों को बच्चों के ड्रॉप्स के नाम पर 160 रुपए प्रति बोतल के हिसाब से बेचता था। यानी 330 रुपए के एक डिब्बे से वह करीब 660 रुपए या उससे भी ज्यादा ऐंठ लेता था। आरोपी इसी भारी-भरकम मुनाफे के लालच में मासूमों की जान जोखिम में डाल रहा था।

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1,000 बोतलें बेचने का दावा, स्वास्थ्य जोखिम की जांच

पुलिस के मुताबिक, आरोपी साजिद मुल्ला यह काला धंधा पिछले करीब एक साल से चला रहा था। शुरुआती पूछताछ में उसने लगभग 1,000 बोतलें बेचने की बात कबूली है। अगर जांच में यह संख्या सही साबित होती है, तो इसका सीधा मतलब है कि सैकड़ों मासूम बच्चे इस खतरनाक फर्जीवाड़े का शिकार बन चुके हैं। फिलहाल सूरत पुलिस और फूड एंड ड्रग्स विभाग उन लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं जिन्होंने इस मेडिकल स्टोर से यह दवा खरीदी थी। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस टॉनिक को पीने के बाद किसी बच्चे को कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या या साइड इफेक्ट तो नहीं हुआ था।

बेटी की B.Pharma डिग्री के नाम पर चल रही थी दुकान

पुलिस जांच में दुकान के संचालन से जुड़ा एक और अहम पहलू सामने आया है। जिस 'शांतिनाथ मेडिकल स्टोर' में यह फर्जीवाड़ा चल रहा था, वह करीब 20 साल पुरानी दुकान है। बताया जा रहा है कि आरोपी साजिद मुल्ला की बेटी ने हाल ही में बी.फार्मा (Bachelor of Pharmacy) की पढ़ाई पूरी की थी। बेटी की इसी डिग्री और फार्मासिस्ट लाइसेंस के आधार पर यह मेडिकल स्टोर चलाया जा रहा था। पुलिस अब इस बात की भी गहनता से पड़ताल कर रही है कि क्या दुकान के संचालन में लाइसेंस के सभी नियमों का पालन हो रहा था या नहीं, और इस फर्जीवाड़े में परिवार या दुकान के किसी अन्य सदस्य की कोई भूमिका है या नहीं।

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अठवा पुलिस स्टेशन में गंभीर धाराओं में केस दर्ज

इस मामले में सूरत के अठवा पुलिस स्टेशन में आरोपी मोहम्मद साजिद इब्राहिम मुल्ला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 123, 125, 336(2), 336(3), 336(4) और 278 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। इसके साथ ही मेडिकल प्रैक्टिशनर एक्ट और फूड एंड ड्रग्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत भी कार्रवाई की गई है। सूरत SOG अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन बोतलों पर लगाए जाने वाले फर्जी स्टिकर कहां छापे जा रहे थे। साथ ही, पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने ये बोतलें किसी अन्य दवा व्यापारी, क्लीनिक या अस्पताल को भी सप्लाई की थीं या नहीं।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...

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