इंदौर में निजी बोरिंग पर बैन! कलेक्टर का बड़ा एक्शन, मशीन जब्त और 2 साल की जेल तक का प्रावधान

इंदौर। कम बारिश और लगातार गिरते भूजल स्तर के बीच इंदौर में संभावित पेयजल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी शिवम वर्मा ने इंदौर जिले के संपूर्ण शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को जल अभावग्रस्त घोषित करते हुए निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगा। अब प्रतिबंध का उल्लंघन कर अवैध रूप से बोरिंग कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उनकी मशीनें भी जब्त की जा सकेंगी।
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कम बारिश और गिरते भूजल स्तर के कारण लिया फैसला
जिला प्रशासन के अनुसार, इस वर्ष इंदौर जिले में औसत से काफी कम बारिश हुई है। इसके साथ ही भूजल स्रोतों का अत्यधिक दोहन होने से पेयजल स्रोतों और नलकूपों का जल स्तर तेजी से गिर रहा है। ऐसी स्थिति में आने वाले समय में पेयजल संकट गहराने की आशंका है।इसी खतरे को देखते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम, 1986 और संशोधन अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत यह प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है।
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शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लागू रहेगा प्रतिबंध
कलेक्टर के आदेश के अनुसार, इंदौर जिले के संपूर्ण शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अशासकीय एवं निजी नलकूपों के खनन पर रोक रहेगी। यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है और आगामी आदेश तक जारी रहेगा।निजी बोरिंग पर प्रतिबंध लगाने की अनुशंसा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और नगर निगम के संबंधित अधिकारियों ने की थी। अधिकारियों ने गिरते भूजल स्तर और भविष्य में संभावित पेयजल संकट को देखते हुए यह कदम उठाने की जरूरत बताई थी।
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अवैध बोरिंग पर मशीनें होंगी जब्त
प्रशासन ने प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आदेश के तहत प्रतिबंधित क्षेत्रों में अवैध रूप से नलकूप खनन या बोरिंग का प्रयास करने वालों की मशीनें जब्त की जा सकेंगी।इसके लिए संबंधित राजस्व, पुलिस और नगर निगम अधिकारियों को कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है। ये अधिकारी नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी सुनिश्चित करेंगे।
नियम तोड़ने पर 2 हजार रुपये जुर्माना या 2 साल की जेल
मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम के तहत प्रतिबंध का उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान है। अधिनियम की धारा 3 या धारा 4 के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर दोषी व्यक्ति को 2,000 रुपये तक का जुर्माना, दो वर्ष तक का कारावास या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं।इसलिए निजी बोरिंग कराने से पहले संबंधित आदेश और लागू नियमों का पालन करना जरूरी होगा।
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सरकारी योजनाओं के तहत बोरिंग पर नहीं लगेगी रोक
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय योजनाओं के अंतर्गत किए जाने वाले नलकूप खनन पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। यानी सरकारी योजनाओं के लिए निर्धारित नियमों के तहत नलकूप उत्खनन किया जा सकेगा।इसके अलावा, आवश्यकता पड़ने पर निजी जलकूपों और अन्य मौजूदा निजी जल स्रोतों का सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था के लिए अधिग्रहण भी किया जा सकता है। इसके लिए मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम की धारा 4 के प्रावधानों का उपयोग किया जाएगा।
संभावित जल संकट से निपटने की तैयारी
कम बारिश और भूजल स्तर में गिरावट के कारण इंदौर में पेयजल स्रोतों को सुरक्षित रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध लगाने का उद्देश्य भूजल के अनियंत्रित दोहन को रोकना और उपलब्ध जल स्रोतों का संरक्षण करना है।जिला प्रशासन का यह आदेश तत्काल प्रभावशील है। आगामी आदेश तक जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में निजी नलकूप खनन पर प्रतिबंध जारी रहेगा।




















