MP हाईकोर्ट में जमानत अर्जियों की पेंडेंसी घटाने की तैयारी, 7 सीनियर जजों की बेंच गठित

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर में जमानत अर्जियों की लंबित संख्या कम करने के लिए एक बार फिर विशेष कवायद शुरू की गई है। करीब 3 हजार जमानत अर्जियों की पेंडेंसी को देखते हुए 7 सीनियर जजों की बेंच गठित की गई हैं। ये बेंच दोपहर के भोजन के बाद जमानत अर्जियों पर सुनवाई करेंगी। इसके लिए हाईकोर्ट के रोस्टर में भी बदलाव किया गया है। नया संशोधित रोस्टर 29 अक्टूबर से 6 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगा। उम्मीद है कि इस व्यवस्था से लंबित जमानत अर्जियों के निपटारे में तेजी आएगी और लंबे समय से सुनवाई का इंतजार कर रहे पक्षकारों को राहत मिलेगी।
दोपहर 2:30 बजे से सुनवाई करेंगी 7 बेंच
हाईकोर्ट द्वारा जारी नए रोस्टर के अनुसार, जस्टिस विवेक रूसिया, जस्टिस आनंद पाठक, जस्टिस विवेक अग्रवाल, जस्टिस विशाल मिश्रा, जस्टिस दीपक खोत, जस्टिस रामकुमार चौबे और जस्टिस बीपी शर्मा की बेंच दोपहर 2:30 बजे से जमानत अर्जियों पर सुनवाई करेंगी। वहीं, जस्टिस प्रदीप मित्तल की सिंगल बेंच पुरानी विविध अपीलों की सुनवाई करेगी।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने उठाया था मुद्दा
जमानत अर्जियों की बढ़ती पेंडेंसी का मुद्दा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी ने भी उठाया था। बीते सोमवार को बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और रजिस्ट्रार जनरल धरमिन्दर सिंह से मुलाकात की थी। इस दौरान जमानत अर्जियों की लंबित संख्या कम करने के लिए जल्द कदम उठाने की मांग की गई थी। बार एसोसिएशन को दीपावली से पहले समस्या के समाधान का आश्वासन दिया गया था। मंगलवार को रोस्टर में किए गए बदलाव को इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
पक्षकारों को मिलेगी राहत की उम्मीद
हाईकोर्ट में जमानत अर्जियों की पेंडेंसी लंबे समय से वकीलों और पक्षकारों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। पिछले साल भी लंबित अर्जियों के निपटारे के लिए 8 जजों की विशेष बेंच बैठाई गई थीं। अब एक बार फिर 7 सीनियर जजों को यह जिम्मेदारी दी गई है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सत्येन्द्र ज्योतिषी के मुताबिक, बार की कार्यकारिणी ने इस समस्या को चीफ जस्टिस और रजिस्ट्रार जनरल के सामने रखा था। चीफ जस्टिस के प्रयासों से पेंडेंसी कम होने की उम्मीद है। इससे जमानत अर्जियों पर सुनवाई का इंतजार कर रहे पक्षकारों को राहत मिल सकती है।




















