दिल्ली से इंदौर आने वाली फ्लाइट में देरी पर एक्शन! उपभोक्ता आयोग बोला-सेवा में कमी ,एयरलाइन यात्री को देगी ₹20 हजार हर्जाना

इंदौर। फ्लाइट में देरी और यात्रियों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराना एयरलाइन को महंगा पड़ सकता है। इंदौर में जिला उपभोक्ता आयोग ने दिल्ली से इंदौर आने वाली एलायंस एयर की फ्लाइट में साढ़े चार घंटे की देरी और यात्री की परेशानियों को सेवा में कमी माना है। आयोग ने एयरलाइन को संबंधित यात्री को मानसिक संताप के एवज में 20 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह राशि 60 दिन के भीतर चुकानी होगी।
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फ्लाइट में देरी से बिगड़ा पूरा कार्यक्रम
मामले के अनुसार, हाईकोर्ट की अधिवक्ता अपूर्वा शुक्ला ने 31 अगस्त 2024 को इंदौर से दिल्ली जाने और 8 सितंबर 2024 को दिल्ली से इंदौर लौटने के लिए एलायंस एयर की फ्लाइट का टिकट बुक कराया था। वापसी की यात्रा के लिए उन्होंने 9,336 रुपये का भुगतान किया था।दिल्ली से इंदौर आने वाली फ्लाइट संख्या 91627 का निर्धारित प्रस्थान समय शाम 5:30 बजे था। हालांकि, बाद में इसे बदलकर रात 10 बजे कर दिया गया। अधिवक्ता के अनुसार, वह निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक दोपहर करीब 3 बजे एयरपोर्ट पहुंच गई थीं, लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि फ्लाइट तय समय पर रवाना नहीं होगी।इस बदलाव के कारण उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर कई घंटे तक इंतजार करना पड़ा। फ्लाइट में देरी के चलते उनकी यात्रा का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हुआ।
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रात 12:30 बजे इंदौर पहुंचीं, दो बजे घर पहुंच पाईं
फ्लाइट में देरी के कारण अपूर्वा शुक्ला 9 सितंबर 2024 की रात करीब 12:30 बजे इंदौर एयरपोर्ट पहुंच सकीं। इसके बाद उन्हें घर पहुंचने में भी समय लगा और वह रात करीब 2 बजे घर पहुंचीं।अधिवक्ता का कहना था कि इस देरी के कारण वह अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संबंधित पक्षकारों से मुलाकात नहीं कर सकीं। इसके अलावा, अगले दिन अदालत में होने वाले मुकदमों की तैयारी भी प्रभावित हुई। इस तरह फ्लाइट की देरी से उन्हें पेशेवर कामकाज के साथ मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ा।
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खाने और ठहरने की व्यवस्था नहीं करने का आरोप
अधिवक्ता ने शिकायत में कहा कि फ्लाइट में देरी होने के बावजूद एयरलाइन की ओर से यात्रियों के खाने-पीने या ठहरने की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। उन्हें अपनी जेब से भोजन आदि पर 985 रुपये खर्च करने पड़े।उनका तर्क था कि एयरलाइन को फ्लाइट में देरी की स्थिति में यात्रियों को समय पर जानकारी देने के साथ आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध करानी चाहिए थीं। लेकिन इस मामले में उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ा और जरूरी सुविधाएं भी नहीं मिलीं।
एयरलाइन ने तकनीकी खराबी और सुरक्षा कारणों का दिया हवाला
मामले में एलायंस एयर एविएशन लिमिटेड की ओर से अपना पक्ष रखते हुए कहा गया कि फ्लाइट में देरी तकनीकी खराबी और सुरक्षा संबंधी कारणों से हुई थी। एयरलाइन का तर्क था कि ऐसे हालात में देरी के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए।हालांकि, उपभोक्ता आयोग ने एयरलाइन के इस पक्ष को पर्याप्त नहीं माना। आयोग के अनुसार, एयरलाइन देरी के पीछे कोई ठोस तकनीकी कारण स्पष्ट नहीं कर पाई। साथ ही, यात्री को खाने-पीने और ठहरने जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने का पहलू भी सामने आया।
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उपभोक्ता आयोग ने माना सेवा में कमी
मामले की सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष मुकेश कुमार तिवारी और सदस्य लालजी तिवारी ने अपने फैसले में कहा कि एयरलाइन देरी के संबंध में ठोस तकनीकी कारण बताने में असफल रही। इसके अलावा, यात्री को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराना भी सेवा में कमी के दायरे में आता है।आयोग ने माना कि फ्लाइट में देरी और उचित सुविधाएं नहीं मिलने के कारण यात्री को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
60 दिन में देना होगा 20 हजार रुपये मुआवजा
उपभोक्ता आयोग ने एलायंस एयर को निर्देश दिया है कि वह अधिवक्ता अपूर्वा शुक्ला को मानसिक संताप के एवज में 20 हजार रुपये का भुगतान करे। यह राशि आदेश के 60 दिन के भीतर देनी होगी।




















