इंदौर में जलसंकट:टैंकरों का पानी भी महंगा, 6000 लीटर के दाम 1500 से 1800 रुपये तक पहुंचे; शिप्रा से इंदौर लाकर बेच रहे पानी

शैलेन्द्र वर्मा, इंदौर। निजी टैंकर संचालकों का कहना है कि भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और कई बोरिंग सूख चुके हैं, जिसके कारण उन्हें दूर-दराज क्षेत्रों से पानी लाना पड़ रहा है। दूसरी ओर नागरिकों का आरोप है कि कुछ टैंकर संचालक उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाने दाम वसूल रहे हैं। नगर निगम ने शिकायत मिलने पर कार्रवाई की बात कही है, जबकि शहर के अधिकांश वार्ड जल संकट की चपेट में हैं।
बारिश की देरी और बढ़ती लागत का असर
निजी टैंकर संचालकों का कहना है कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और कई बोरिंग सूख चुके हैं। ऐसे में उन्हें शिप्रा नदी और ग्रामीण क्षेत्रों से पानी लाकर शहर में सप्लाई करना पड़ रहा है, जिससे लागत बढ़ गई है। वर्तमान में 6000 लीटर क्षमता वाले एक टैंकर की कीमत 1500 से 1800 रुपये तक पहुंच गई है। जबकि एक सप्ताह पहले यही टैंकर 800 से 1200 रुपये में उपलब्ध था। टैंकर संचालकों का कहना है कि यदि अगले एक सप्ताह तक मानसूनी बारिश नहीं होती है तो पानी की स्थिति और गंभीर हो सकती है।
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टैंकर संचालकों ने बताई बढ़े किराए की वजह
टैंकर संचालक राधेश्याम ने बताया कि शहर के कई इलाकों में पानी की भारी किल्लत है, जिसके कारण लोगों को निजी टैंकरों पर निर्भर होना पड़ रहा है। उनका कहना है कि बारिश नहीं होने के कारण स्थानीय स्रोतों में पानी कम हो गया है। उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों और शिप्रा क्षेत्र से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे लागत बढ़ गई है। हाल ही में डीजल के दाम भी बढ़े हैं। वर्तमान में एक टैंकर भरने और शहर तक लाने का खर्च लगभग 600 से 800 रुपये तक पहुंच जाता है।
मनमाने दाम वसूलने के लगे आरोप
शहर में पानी की कमी ने लोगों को परेशान कर रखा है। नगर निगम द्वारा टैंकरों से की जा रही पानी सप्लाई मांग के अनुरूप नहीं हो पा रही है और कई क्षेत्रों में नर्मदा जल की सप्लाई भी प्रभावित हुई है। ऐसी स्थिति में आम नागरिकों के लिए पानी की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन गई है। लोगों का आरोप है कि कुछ निजी टैंकर संचालक उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाने दाम वसूल रहे हैं। रेट बढ़ने के बावजूद पानी की मांग लगातार बनी हुई है।
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26 वर्षों में कई गुना बढ़े पानी के दाम
साल 2000 से 2005 के बीच इंदौर में एक पानी के टैंकर की कीमत 200 से 300 रुपये हुआ करती थी। इसके बाद धीरे-धीरे कीमतों में वृद्धि होती गई और अब एक टैंकर का किराया 1800 रुपये तक पहुंच गया है। जल विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार गिरते भूजल स्तर और अनियंत्रित दोहन के कारण शहर गंभीर जल संकट की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में अवैध बोरिंग और पानी के व्यावसायिक उपयोग पर सख्त नियंत्रण आवश्यक है।
75 वार्ड जल संकट से प्रभावित
नगर निगम के सर्वे में सामने आया है कि शहर के 85 वार्डों में से लगभग 75 वार्ड जल संकट से प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों से पानी की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि आपूर्ति बनाए रखना नगर निगम के लिए चुनौती बनता जा रहा है। शहरवासियों को अब मानसूनी बारिश का इंतजार है। इंदौर के हालिया इतिहास में पहली बार लगातार दो महीने तक इतने बड़े स्तर पर जल संकट देखने को मिला है। इससे आम लोगों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
प्रशासन ने सख्ती के दिए संकेत
अपर आयुक्त आशीष पाठक ने कहा है कि फिलहाल बढ़े हुए टैंकर किराए को लेकर कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है और शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं नगर निगम प्रभारी अभिषेक शर्मा ने अधिकारियों को निजी पानी टैंकर संचालकों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई निर्धारित दर से अधिक दाम वसूलता पाया जाता है तो वाहन जब्ती और जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। जानकारों का मानना है कि अवैध रूप से पानी बेचने वाले बोरिंग संचालकों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने होंगे। तभी जल संकट की स्थिति पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।












