इंदौर में पानी का संकट! 200 नए बोरिंग होंगे, बंद पड़े 361 बोरिंग सुधारने में जुटा निगम

इंदौर। कम बारिश के चलते इंदौर में आने वाले दिनों में जलसंकट गहराने की आशंका के बीच नगर निगम ने पानी बचाने और भूजल स्तर सुधारने के लिए नई रणनीति पर काम शुरू किया है। अब सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से उपचारित पानी को सिर्फ कान्ह नदी, उद्यानों और निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि शहर के चुनिंदा तालाबों में भी छोड़ा जा रहा है। निगम का उद्देश्य तालाबों में पानी की उपलब्धता बनाए रखने के साथ आसपास के क्षेत्रों में बोरिंग की स्थिति सुधारना है।दूसरी ओर, निगम के सर्वे में शहर के 361 बोरिंग बंद मिलने की जानकारी सामने आई है। इसके मद्देनजर 200 नए बोरिंग कराने की तैयारी की गई है। इनमें से 100 बोरिंग के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं, जबकि शेष 100 के लिए भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
संबंधित खबर: इंदौर में पानी पर पहरा! नए नल कनेक्शन बंद, निर्माणाधीन मकानों को भी नहीं मिलेगा नर्मदा का पानी
तालाबों में ट्रीटेड पानी, भूजल सुधारने की कोशिश
नगर निगम ने उपचारित पानी के दोबारा उपयोग की योजना के तहत चार तालाब क्षेत्रों में पानी छोड़ने की व्यवस्था शुरू की है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, सिरपुर तालाब में प्रतिदिन करीब 80 लाख लीटर उपचारित पानी छोड़ा जा रहा है। निगम अधिकारियों के अनुसार, इससे तालाब के जलस्तर में सुधार हुआ है और आसपास के बोरिंग की स्थिति में भी बदलाव देखने को मिला है।हुकमाखेड़ी तालाब में भी प्रतिदिन करीब 60 लाख लीटर पानी छोड़े जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा रीजनल पार्क और पीपल्यापाला तालाब में करीब 2 एमएलडी तथा पीपल्याहाना तालाब में आधा एमएलडी उपचारित पानी छोड़ा जा रहा है। एमएलडी का अर्थ मिलियन लीटर प्रतिदिन है।निगम की योजना आने वाले दिनों में अन्य तालाबों को भी इस व्यवस्था से जोड़ने की है। अमृत-2 परियोजना के तहत टिगरिया बादशाह क्षेत्र में बन रहे नए एसटीपी से भी प्रतिदिन 8 एमएलडी पानी तालाब में पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
संबंधित खबर: इंदौर में सीवरेज से कमाई का प्लान! रोज 3 करोड़ लीटर पानी बेचेगा निगम,2.20 लाख लोगों के बराबर पानी बचाने का दावा
कम बारिश ने बढ़ाई चिंता, तालाबों की स्थिति भी प्रभावित
इस साल कम बारिश का असर इंदौर के तालाबों पर भी पड़ा है। कई जलाशय पूरी क्षमता से नहीं भर पाए, जिससे आगामी महीनों में जल उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। यशवंत सागर को नर्मदा के पानी से भरने की योजना पर भी विचार किया गया है।ऐसे हालात में उपचारित पानी का इस्तेमाल तालाबों के लिए करना पानी के पुनः उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालांकि, इससे भूजल स्तर पर कितना और कितने समय तक असर पड़ेगा, यह स्थानीय परिस्थितियों और नियमित निगरानी पर निर्भर करेगा।
शहर के 6040 बोरिंग में से 361 बंद
नगर निगम की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, शहर में कुल करीब 6040 बोरिंग हैं, जिनमें से 361 बंद पाए गए हैं। इन बोरिंग को सुधारने के लिए निगम ने 10 टीमें बनाई हैं। ये टीमें शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में खराब बोरिंग की पहचान कर उनकी मरम्मत का काम करेंगी।इसके साथ ही, भविष्य की जरूरतों को देखते हुए 200 नए बोरिंग कराने का निर्णय लिया गया है। पहले चरण में 100 बोरिंग के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। बाकी 100 बोरिंग के लिए भी आगे टेंडर जारी करने की तैयारी है।कम वर्षा के कारण पहले जनवरी से जलसंकट गहराने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन बंद बोरिंग की संख्या सामने आने के बाद जल प्रबंधन को लेकर अभी से सतर्कता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
संबंधित खबर: मुख्यमंत्री जी, हमारा घर बचा लीजिए:- इंदौर के रानी सराय के तोतों की चिट्ठी वायरल, पेड़ों पर संकट से उजड़ने का डर
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी ली पानी की स्थिति की जानकारी
इंदौर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शहर में पानी की उपलब्धता और संभावित जलसंकट से निपटने की तैयारियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने महापौर पुष्यमित्र भार्गव से इस संबंध में चर्चा की।महापौर ने बताया कि नगर निगम ने सर्वे के जरिए उन क्षेत्रों की पहचान की है, जहां जलापूर्ति संबंधी समस्याएं हैं या आने वाले समय में परेशानी हो सकती है। निगम की ओर से की जा रही तैयारियों में बोरिंग की मरम्मत, नए बोरिंग और उपचारित पानी का दोबारा उपयोग जैसे उपाय शामिल हैं।
अब चुनौती पानी बचाने के साथ व्यवस्था बनाए रखने की
इंदौर में एक ओर बंद बोरिंग और कम बारिश चिंता बढ़ा रहे हैं, तो दूसरी ओर उपचारित पानी को तालाबों में पहुंचाने की योजना जल प्रबंधन का नया विकल्प पेश कर रही है। आने वाले महीनों में इन प्रयासों की वास्तविक उपयोगिता इस बात से तय होगी कि तालाबों में पानी की उपलब्धता कितनी बनी रहती है, भूजल स्तर में कितना सुधार होता है और प्रभावित इलाकों में जलापूर्ति की स्थिति कैसी रहती है।




















