इंदौर में अल्पवर्षा ने बढ़ाई चिंता: इंदौर में जनवरी-फरवरी से गहरा सकता है जलसंकट, निगम ने बनाई 6 महीने की तैयारी

इंदौर। अल्पवर्षा के चलते इस बार शहर में जलसंकट की आहट अभी से सुनाई देने लगी है। मानसून सामान्य से कम रहने के कारण भू-जल का पर्याप्त रिचार्ज नहीं हो पाया। नदी, नाले और तालाब भी पूरी क्षमता से नहीं भर सके। ऐसे में नगर निगम ने आगामी गर्मी में संभावित जलसंकट से निपटने के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं।महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने जलप्रदाय विभाग की समीक्षा बैठक लेकर अधिकारियों को अगले छह महीनों की संभावित जल आवश्यकता, उपलब्ध जलस्रोतों, टंकियों, बोरिंग और टैंकर व्यवस्था की स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। 85 वार्डों में मौजूद सभी सरकारी बोरिंगों का सर्वे कराया जाएगा, ताकि उनकी क्षमता और वर्तमान स्थिति का पता लगाया जा सके।
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3 करोड़ लीटर पानी रिजर्व रखने की तैयारी
निगम ने दिसंबर तक नौलखा, गोंदवाले, आजाद नगर, डाकिया और फल-बाग क्षेत्र की पांच प्रमुख पानी की टंकियों को तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इनके तैयार होने के बाद करीब 30 एमएलडी यानी 3 करोड़ लीटर अतिरिक्त पानी रिजर्व रखा जा सकेगा और जरूरत वाले इलाकों में व्यवस्थित सप्लाई की जा सकेगी।फल-बाग क्षेत्र से जुड़ी करीब 12 से 13 टंकियों की स्थिति सुधारने और जरूरी संधारण कार्य समय पर पूरा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
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अभी 300 टैंकरों से पहुंच रहा पानी
शहर में जलसंकट की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में करीब 300 टैंकरों के जरिए जलप्रदाय करना पड़ रहा है। निगम ने आगामी गर्मी के लिए टैंकरों की संख्या, उपलब्धता और रूट की भी पहले से योजना बनाने के निर्देश दिए हैं।निगम के टैंकरों के अलावा निजी हाइड्रेंट से पानी भरने वाले निजी टैंकरों और संबंधित हाइड्रेंट की सूची भी तैयार की जाएगी। जरूरत पड़ने पर इन निजी जलस्रोतों का इस्तेमाल प्रभावित क्षेत्रों में पानी पहुंचाने के लिए किया जाएगा।
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रेन वॉटर हार्वेस्टिंग पर भी सख्ती
बारिश कम होने के बीच निगम रेन वॉटर हार्वेस्टिंग नियमों का पालन नहीं करने वाली इमारतों पर भी कार्रवाई कर रहा है। ऐसी बिल्डिंगों को सील करने के साथ स्पॉट फाइन लगाया जा रहा है, ताकि भू-जल रिचार्ज की व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।महापौर भार्गव के मुताबिक इस बार बारिश करीब 10 से 15 फीसदी कम हुई है। इससे भू-जल रिचार्ज प्रभावित हुआ है और जनवरी-फरवरी से भू-जल स्तर और नीचे जाने की आशंका है। ऐसे में निगम की प्राथमिकता गर्मी शुरू होने से पहले सभी व्यवस्थाएं पूरी कर हर वार्ड तक पर्याप्त पेयजल पहुंचाना रहेगी।



















