Kuno National Park में 19 महीने के घायल शावक की मौत, पेट में मिले छर्रे, जांच में जुटी टीमें

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क की मादा चीता निर्वा के 19 महीने के नर शावक की मौत हो गई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शावक के पेट से धातु के छर्रे निकले थे। मुरैना में घायल मिले शावक की मौत के बाद वन्यजीव सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। मामले की जांच जारी है।
Kuno National Park से जुड़ी इस घटना में अधिकारियों की जांच अहम है। शुरुआती रिपोर्टों में शावक को गोली लगने की आशंका जताई गई थी। अब सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, शावक की उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना के पीछे किसका हाथ था, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
कूनो चीता शावक मौत का मामला
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, निर्वा का 19 महीने का नर शावक 25 अक्टूबर 2026 को घायल मिला था। वह कूनो से निकलकर मुरैना के वन क्षेत्र में पहुंचा था। निगरानी टीम ने उसे घायल अवस्था में देखा और रात में रेस्क्यू किया।
वन विभाग की टीम शावक को उपचार के लिए कूनो लेकर आई थी। बाद में बेहतर इलाज के लिए उसे जबलपुर भेजे जाने की जानकारी सामने आई। उपचार के दौरान उसकी हालत और मौत के कारणों की जानकारी जांच का हिस्सा है।
कूनो नेशनल पार्क में 8 माह के चीता शावक की मौत, नामीबियाई 'आशा' ने दिया था जन्म
समझें क्या है पूरा मामला
मुरैना चीता मामला वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़ा है। शुरुआती खबरों में शावक के घायल होने के कारणों पर संदेह जताया गया था। जांच में इंसानी हमले और दूसरे वन्यजीव के हमले समेत सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा था।
बाद की मीडिया रिपोर्टों में पेट से छर्रे मिलने की जानकारी सामने आई। इससे गोली लगने की आशंका मजबूत हुई है। हालांकि, घटना के लिए जिम्मेदार व्यक्ति और मकसद की पुष्टि नहीं हुई है।
जांच में जुटी स्पेशल टाइगर स्ट्राइक फोर्स
रिपोर्टों के मुताबिक, मामले की जांच के लिए स्पेशल टाइगर स्ट्राइक फोर्स को लगाया गया है। यह टीम वन्यजीव अपराधों से जुड़े मामलों की जांच करती है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि शावक कैसे घायल हुआ। वन विभाग राज्य की विशेष जांच टीम की मदद भी ले रहा है। अभी तक किसी संदिग्ध की पहचान की पुष्टि नहीं हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।
मुरैना के वन क्षेत्र में मिला था शावक
मुरैना का वन क्षेत्र कूनो के आसपास फैले प्राकृतिक आवास से जुड़ा है। चीते अपने क्षेत्र से बाहर दूसरे जंगलों में भी पहुंच सकते हैं। ऐसे में संरक्षित क्षेत्र से बाहर उनकी निगरानी एक चुनौती बनती है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शावक मुरैना के क्षेत्रीय वन मंडल में मिला था। घटना की सटीक जगह और परिस्थितियों की जानकारी अधिकारियों की जांच से सामने आएगी।
चीता संरक्षण के सामने सुरक्षा की चुनौती
भारत में चीते वर्ष 1952 में विलुप्त घोषित हो गए थे। इसके बाद 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आठ चीते भारत लाए गए। इसी पहल के तहत कूनो में चीता संरक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में चीतों की आबादी फिर से स्थापित करना है। निर्वा का शावक भारत में जन्मी नई पीढ़ी का हिस्सा था। उसकी मौत से जंगलों में घूम रहे चीतों की सुरक्षा पर चर्चा तेज हुई है।
1952 में विलुप्त हो गए थे चीते
गौरतलब है कि भारत में 1952 में चीते विलुप्त हो गए थे। 2022 में चीता प्रोजेक्ट के तहत फिर से बसाया जा रहा है। इसके लिए नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से चीते लाए गए हैं। इन्हें एमपी के तीन अभ्यारणों में बसाया गया है।
आरटीआई एक्टिविस्ट ने उठाए सुरक्षा पर सवाल
मादा चीता निर्वा के 19 महीने के नर शावक की इलाज के दौरान मौत होने की जानकारी आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने दी है। अजय दुबे के मुताबिक, शावक के पेट में गोली के छर्रे लगे थे और इसी कारण उसकी मौत हुई है।
अजय दुबे ने शावक की मौत को लेकर वन्यजीवों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले की तत्काल सीबीआई जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि श्योपुर, मुरैना और शिवपुरी क्षेत्रों में वर्ष 2025 में शिकार से जुड़े मामले सामने आए थे, जबकि वर्ष 2026 में इन मामलों में गिरफ्तारियां होने की बात भी सामने आई है।
कूनो प्रशासन ने क्या कहा?
मीडिया रिपोर्टों में बाद में शावक के पेट से छर्रे मिलने की जानकारी सामने आई। अब जांच में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि चोटें किन परिस्थितियों में आईं। अधिकारियों की अंतिम पुष्टि के बिना सभी पहलुओं को खुला रखना जरूरी है।
कूनो नेशनल पार्क के निदेशक उत्तम शर्मा ने पहले बताया कि जांच जारी है। उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से प्रेस नोट जारी किया जाएगा। अधिकारियों ने घटना के कारणों का पता लगाने की बात कही।
अवैध शिकार की आशंका की भी जांच
कूनो और आसपास के वन क्षेत्रों में अवैध शिकार की घटनाएं चिंता का विषय रही हैं। मीडिया रिपोर्टों में मुरैना और आसपास के क्षेत्रों में तेंदुओं के शिकार से जुड़े मामलों का उल्लेख हुआ है। हालांकि, इन घटनाओं और चीते की मौत के बीच संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
जांच टीम को यह पता लगाना होगा कि शावक को चोट कैसे लगी। साथ ही, घटना में किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं, यह भी जांच का विषय है। फिलहाल किसी आरोपी की पहचान की पुष्टि नहीं हुई है।




















