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शहर जश्न में डूबा रहता है, लेकिन इनकी दिवाली सड़क पर क्यों गुजरती है?जानिए कौन हैं शहर की खुशियों के असली पहरेदार

त्योहारों पर जब पूरा इंदौर खुशियां मना रहा होता है, तब पुलिस के जवान घर-परिवार से दूर सड़कों पर पहरा देते हैं। बाजारों की भीड़ संभालने, यातायात सुचारू रखने और लोगों की सुरक्षा के लिए ये रातभर मुस्तैद रहते हैं। घर में बच्चे उनका इंतजार करते हैं, लेकिन शहर की सुरक्षा का फर्ज उन्हें अपनों से दूर रखता है। इनकी मेहनत और त्याग से ही हजारों परिवार बेफिक्र होकर त्योहार मना पाते हैं।
शहर जश्न में डूबा रहता है, लेकिन इनकी दिवाली सड़क पर क्यों गुजरती है?जानिए कौन हैं शहर की खुशियों के असली पहरेदार

इंदौर। त्योहारों का मौसम आते ही शहर के बाजार रोशनी से जगमगा उठते हैं। घरों में पकवान बनते हैं, परिवार एक साथ खुशियां मनाते हैं और लोग अपनों के साथ त्योहार का आनंद लेते हैं। लेकिन इन खुशियों के बीच इंदौर पुलिस के ऐसे कई जवान हैं, जिनके लिए त्योहार का मतलब परिवार के साथ समय बिताना नहीं, बल्कि शहर की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाना होता है। जब पूरा शहर उत्सव में डूबा होता है, तब ये वर्दीधारी अपने घर-परिवार से दूर सड़कों, चौराहों और बाजारों में मुस्तैद रहते हैं।

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त्योहारों के दौरान शहर में बाजारों की रौनक बढ़ने के साथ ही लोगों की आवाजाही भी कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में यातायात व्यवस्था संभालने से लेकर भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक की जिम्मेदारी इंदौर पुलिस के कंधों पर होती है। प्रमुख बाजारों, चौराहों, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर पुलिसकर्मी तैनात रहकर हर गतिविधि पर नजर रखते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि खरीदारी के लिए निकले लोगों को परेशानी न हो और महिलाएं, बच्चे व बुजुर्ग सुरक्षित अपने घर पहुंच सकें।

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फोन पर देते हैं परिवार को त्योहार की शुभकामनाएं

ड्यूटी पर तैनात कई पुलिसकर्मियों के लिए त्योहार की खुशियां फोन तक ही सीमित रह जाती हैं। घर में बच्चे इंतजार करते हैं, परिवार के सदस्य साथ बैठकर पूजा और पकवानों की तैयारी करते हैं, लेकिन जवानों को अपनी जिम्मेदारी के चलते इन पलों से दूर रहना पड़ता है। मौका मिलने पर वे फोन के जरिए अपनों से बात कर शुभकामनाएं देते हैं और फिर अपनी ड्यूटी पर लौट आते हैं।

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भीड़ और ट्रैफिक के बीच लगातार मुस्तैदी

त्योहारों पर इंदौर के प्रमुख बाजारों और व्यस्त मार्गों पर पुलिस की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। कहीं ट्रैफिक जाम की स्थिति संभालनी होती है तो कहीं भीड़ को नियंत्रित करना पड़ता है। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए जवान लगातार सतर्क रहते हैं। धूप, बारिश और देर रात तक चलने वाली ड्यूटी के बावजूद वे अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, ताकि आमजन बिना किसी डर और परेशानी के त्योहार मना सकें।

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सुरक्षा के साथ सहयोग भी जरूरी

अक्सर त्योहारों के दौरान पुलिस की व्यवस्थाओं में छोटी-सी कमी भी लोगों को दिखाई देती है, लेकिन इसके पीछे जवानों की घंटों की मेहनत और व्यक्तिगत त्याग पर कम ही ध्यान जाता है। शहरवासियों की भी जिम्मेदारी है कि वे यातायात नियमों का पालन करें, बाजारों में अनुशासन बनाए रखें और पुलिसकर्मियों के निर्देशों का सहयोग करें।

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दरअसल, जब घरों में दीप जलते हैं और परिवार एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटते हैं, तब इंदौर पुलिस के जवान शहर की सड़कों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे होते हैं। उनके लिए भी त्योहार अपनों के साथ मनाने का अवसर होता है, लेकिन वे पहले शहरवासियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे सभी वर्दीधारी जवानों के समर्पण और सेवा भावना को सलाम, जिनकी मुस्तैदी से हजारों परिवार सुरक्षित त्योहार मना पाते हैं।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...

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