धनतेरस की रात जबलपुर की झुग्गी बस्ती में भीषण आग, 50 झोपड़ियां जलकर खाक, 35 परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

मध्य प्रदेश के जबलपुर में धनतेरस की देर रात एक भीषण आग ने कई गरीब परिवारों की खुशियां छीन लीं। शहर की एक झुग्गी बस्ती में अचानक आग लगने से करीब 50 झोपड़ियां जलकर पूरी तरह खाक हो गईं। हादसे में 30 से 35 परिवारों की गृहस्थी तबाह होने की शुरुआती जानकारी सामने आई है। आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को अपना सामान बचाने तक का मौका नहीं मिला। घटना की सूचना मिलते ही नगर निगम की दमकल टीम और पुलिस मौके पर पहुंच गई। आग पर काबू पाने के लिए 13 से ज्यादा फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को लगाया गया। त्योहार के मौके पर घर और जरूरत का सामान खोने वाले परिवारों के सामने अब दोबारा जिंदगी शुरू करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
जबलपुर की झुग्गी बस्ती में आधी रात मची अफरा-तफरी
जानकारी के मुताबिक, जबलपुर की झुग्गी बस्ती में आग लगने की सूचना रात करीब 2:30 बजे मिली। उस समय ज्यादातर लोग अपने घरों में सो रहे थे। अचानक आग की लपटें उठने लगीं और देखते ही देखते आसपास की झोपड़ियां भी इसकी चपेट में आने लगीं। आग फैलती देख बस्ती में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी और परिवार के सदस्यों की जान बचाने के लिए घरों से बाहर निकलने लगे। कई परिवारों ने जरूरी सामान बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन आग की तेज लपटों के कारण उन्हें ज्यादा कुछ बचाने का मौका नहीं मिला। कुछ ही समय में आग ने विकराल रूप ले लिया और करीब 50 झोपड़ियां जलकर खाक हो गईं।
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13 से ज्यादा दमकल गाड़ियों ने संभाला मोर्चा
आग की सूचना मिलते ही नगर निगम और पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया। मौके पर दमकल की 13 से ज्यादा गाड़ियां पहुंचीं। फायर ब्रिगेड की टीम ने आग बुझाने के लिए लगातार प्रयास किए। बस्ती में करीब 350 से ज्यादा झुग्गियां होने के कारण आग के दूसरी झोपड़ियों तक पहुंचने का खतरा बना हुआ था। ऐसे में दमकलकर्मियों के सामने आग को सीमित क्षेत्र में रोकना बड़ी चुनौती थी। फायर ब्रिगेड की टीमें रातभर आग बुझाने और राहत-बचाव कार्य में जुटी रहीं। पुलिस बल ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने में सहयोग किया। कई घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने के प्रयास किए गए। प्रशासन की प्राथमिकता आग को बाकी बस्ती तक फैलने से रोकना और प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना रही।
350 झुग्गियों वाली बस्ती में पहले भी लग चुकी है आग
इस घटना के बाद बस्ती की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, जिस इलाके में आग लगी, वहां करीब 350 से ज्यादा झुग्गियां बनी हुई हैं। पूर्व पार्षद ताहिर अली ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलने पर वह रात में ही मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने नगर निगम और पुलिस को घटना की जानकारी दी और राहत कार्य शुरू कराने में मदद की। ताहिर अली ने आशंका जताई कि आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि इस बस्ती में पहले भी कई बार आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। हालांकि, आग लगने की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है। शॉर्ट सर्किट की आशंका की जांच की जा रही है। प्रशासन की ओर से भी घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
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30 से 35 परिवार प्रभावित, गृहस्थी का सामान जलकर खाक
आग से हुए नुकसान को लेकर शुरुआती जानकारी में करीब 30 से 35 परिवारों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। कई परिवारों की झोपड़ियां पूरी तरह जल गईं। इसके साथ ही घरों में रखा सामान, कपड़े, बर्तन, जरूरी दस्तावेज और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें भी आग की भेंट चढ़ गईं। सीएसपी अखिलेश गौर के मुताबिक, शुरुआती आकलन में 30 से 35 परिवारों के प्रभावित होने की जानकारी मिली है। आग पूरी तरह बुझने के बाद ही नुकसान का सही आंकड़ा सामने आ सकेगा। फिलहाल प्रशासन प्रभावित परिवारों की संख्या और संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन करने में जुटा है।
धनतेरस पर तबाह हुई गरीब परिवारों की खुशियां
धनतेरस का त्योहार आमतौर पर खरीदारी, नई चीजें घर लाने और खुशियां मनाने का अवसर होता है। कई परिवार इस दिन अपने घरों को सजाते हैं और त्योहार के लिए खास तैयारियां करते हैं। लेकिन जबलपुर की इस झुग्गी बस्ती में रहने वाले परिवारों के लिए धनतेरस की रात किसी बुरे सपने से कम नहीं रही। जिन घरों में कुछ घंटे पहले तक त्योहार की तैयारियां चल रही थीं, वहां अब जली हुई झोपड़ियां और राख का ढेर नजर आ रहा है। कई परिवारों की सालों की मेहनत से जुटाया गया सामान कुछ ही देर में खत्म हो गया। बच्चों के कपड़े, घरेलू सामान और रोजमर्रा की जरूरतों की चीजें भी आग में जल गईं।
शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका, जांच जारी
शुरुआती तौर पर आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। हालांकि, अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन आग के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटा है। इसके साथ ही प्रभावित झोपड़ियों और परिवारों को हुए नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।



















