इंदौर में डिब्बे में घी या जहर-28 सैंपल फेल, सीसा मिलने से बढ़ी चिंता,3400 लीटर तक असुरक्षित घी बाजार में

इंदौर। शहर में बिक रहे पैक्ड घी की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में चौंकाने वाली स्थिति सामने आई है। जुलाई से सितंबर के बीच विभाग ने अलग-अलग ब्रांड और स्थानों से घी के सैंपल लेकर जांच कराई। इनमें से 28 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे। जांच रिपोर्ट में 24 सैंपल को असुरक्षित और चार को अवमानक घोषित किया गया है। असुरक्षित श्रेणी वाले घी में मिलावट के साथ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सीसा (लेड) मिलने की बात भी सामने आई है।
विभागीय जानकारी के मुताबिक जिन लॉट और स्टॉक पर कार्रवाई की गई, उसका करीब 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा कार्रवाई से पहले ही बाजार में पहुंच चुका था। इस आधार पर करीब 2550 से 3400 लीटर असुरक्षित घी बाजार में पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। विभाग ने संबंधित स्टॉक की बिक्री रोकने के साथ उसके स्रोत और वितरण नेटवर्क की जानकारी जुटाई है।
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गुजरात और महाराष्ट्र की कंपनियों के उत्पाद जांच में आए
जांच के दौरान सामने आए घी के स्टॉक का नेटवर्क इंदौर के कई बड़े कारोबारी और वितरण क्षेत्रों से जुड़ा मिला। इनमें लसूड़िया, देवास नाका, बांगड़दा, सियागंज, पालदा, लोहामंडी, मल्हारगंज और राजेंद्र नगर सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार संबंधित उत्पादों में बड़ी संख्या में कंपनियां गुजरात और महाराष्ट्र की बताई गई हैं।खाद्य सुरक्षा विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि असुरक्षित घोषित घी किन-किन डिपो, दुकानों और विक्रेताओं तक पहुंचा था। इसके आधार पर स्टॉक को बाजार से हटाने की कार्रवाई की जा रही है।
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28 फेल सैंपलों में 24 असुरक्षित
तीन महीने चली जांच में सामने आए आंकड़े स्थिति की गंभीरता बताते हैं। कुल 28 सैंपल फेल हुए। इनमें 24 सैंपल असुरक्षित और 4 अवमानक पाए गए। असुरक्षित श्रेणी का मतलब ऐसे खाद्य पदार्थ से है जो स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है, जबकि अवमानक उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करता।
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घी में सीसा पहुंचने की क्या वजह?
घी में सीसा मिलने के कई संभावित कारण हो सकते हैं। विभागीय जांच में मिलावट के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रंग, केमिकल, तेल या अन्य वसा में सीसा मौजूद होने की आशंका देखी जा रही है। इसके अलावा उत्पादन, पैकेजिंग या भंडारण के दौरान इस्तेमाल होने वाले कुछ उपकरणों, कंटेनरों अथवा ड्रम से भी धातु के संपर्क की संभावना की जांच की जा सकती है।हालांकि किसी विशेष ब्रांड या उत्पाद में सीसा किस माध्यम से पहुंचा, यह संबंधित नमूने और जांच के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
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बाजार में पहुंच चुके स्टॉक की तलाश
विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाजार में पहुंच चुके स्टॉक का पता लगाना है। अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई से पहले ही कुल स्टॉक का 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा बाजार में पहुंच चुका था। इसी अनुमान के आधार पर 2550 से 3400 लीटर तक असुरक्षित घी उपभोक्ताओं तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।अब विभाग संबंधित दुकानों, डिपो और विक्रेताओं से स्टॉक की जानकारी लेकर असुरक्षित घी को वापस लेने और उसकी बिक्री रोकने की कार्रवाई कर रहा है।
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अपील अवधि खत्म होने के बाद नष्ट होगा माल
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार संबंधित पक्षों को नियमानुसार अपील का अवसर दिया गया है। अपील की अवधि समाप्त होने के बाद असुरक्षित घोषित किए गए घी के स्टॉक को नष्ट करने की कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष स्वामी के अनुसार, अपील की अवधि समाप्त होने के बाद असुरक्षित घोषित माल नष्ट किया जाएगा।



















