नेस्ले इंडिया के बेबी फूड पर FSSAI की कार्रवाई, दावों और बायोटिन की मात्रा को लेकर उठे सवाल

FSSAI ने NAN Excella Pro Stage 1 और Lactogen Pro 1 से जुड़े कुछ दावों पर आपत्ति जताई है। रेगुलेटर ने 5 HMOs और Whey Protein से जुड़े दावों के साथ Whey Protein को Easy to Digest बताए जाने की भी जांच की है। इसके अलावा एक Follow-up Formula के सैंपल में बायोटिन की मात्रा निर्धारित मानक के मुताबिक नहीं पाए जाने की बात सामने आई है। FSSAI के मुताबिक, फिलहाल मामले adjudication प्रक्रिया में हैं और कंपनी पर अंतिम जुर्माना लगाए जाने की जानकारी नहीं दी गई है।
NAN Excella Pro Stage 1 के दावों पर सवाल
FSSAI ने जांच के दौरान NAN Excella Pro Stage 1 से जुड़े पैकेजिंग और प्रमोशनल कंटेंट की भी समीक्षा की। इसमें प्रोडक्ट में मौजूद 5 HMOs और Whey Protein को लेकर किए गए दावों पर रेगुलेटर ने सवाल उठाए हैं। जांच केवल पैकेट तक सीमित नहीं रही, बल्कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध प्रमोशनल मटेरियल को भी देखा गया। FSSAI ने इन दावों को लेकर नेस्ले इंडिया से स्पष्टीकरण मांगा है।
ये भी पढ़ें: बुखार में खाई जाने वाली पैरासिटामोल और BP की दवा फेल, अस्पतालों ने तुरंत रोका वितरण
Lactogen Pro 1 के प्रमोशनल दावे भी जांच में
Lactogen Pro 1 को लेकर FSSAI ने Whey Protein को Easy to Digest यानी आसानी से पचने वाला बताए जाने वाले दावे पर आपत्ति जताई है। रेगुलेटर ने प्रोडक्ट से जुड़े ऑनलाइन प्रमोशनल कंटेंट की भी जांच की। FSSAI के अनुसार, ऐसे दावों की समीक्षा इसलिए की गई क्योंकि Infant Nutrition Products के प्रचार को लेकर नियमों में स्पष्ट प्रावधान हैं। अब कंपनी से इस संबंध में सफाई मांगी गई है।
2020 के नियमों का दिया हवाला
FSSAI का कहना है कि जांच में सामने आए कुछ प्रोडक्ट और उनसे जुड़े दावे Food Safety and Standards (Foods for Infant Nutrition) Regulations, 2020 के Regulation 4(2) के अनुरूप नहीं पाए गए। इस प्रावधान के तहत Infant Foods के लिए ऐसे प्रमोशनल दावों और कंटेंट पर रोक है, जिनका उद्देश्य प्रोडक्ट की बिक्री या लोकप्रियता बढ़ाना हो। इसी आधार पर रेगुलेटर ने मामले को आगे की कार्रवाई के लिए लिया है।
Follow-up Formula में बायोटिन की जांच
FSSAI की कार्रवाई सिर्फ प्रमोशनल दावों तक सीमित नहीं है। रेगुलेटर के मुताबिक, कंपनी के एक Follow-up Formula के सैंपल की लैब जांच में बायोटिन की मात्रा निर्धारित मानक के मुताबिक नहीं मिली। इसके बाद सैंपल को दोबारा जांच के लिए Referral Laboratory भेजा गया। दूसरी जांच में भी बायोटिन की मात्रा तय जरूरत के अनुरूप नहीं पाए जाने की बात FSSAI ने कही है।
तीन अलग-अलग मामलों में कार्रवाई
FSSAI ने बताया कि इन मामलों को लेकर नेस्ले इंडिया के खिलाफ तीन अलग-अलग adjudication cases शुरू किए गए हैं। इनमें प्रमोशनल दावों और लैब जांच में सामने आई कथित कमियों को आधार बनाया गया है। Adjudication प्रक्रिया के तहत अब संबंधित मामलों की आगे कानूनी समीक्षा होगी। हालांकि, FSSAI की ओर से यह नहीं कहा गया है कि कंपनी पर अंतिम जुर्माना लगाया जा चुका है।
ये भी पढ़ें: ‘डाइट पर हूं, आप खा लो’… रणबीर कपूर ने प्रसाद लेने से किया इनकार, लोगों ने पूछा- ‘ये कैसा राम?’
कंपनी से मांगी गई सफाई
FSSAI की कार्रवाई के बाद अब नेस्ले इंडिया से संबंधित दावों और जांच के नतीजों पर जवाब मांगा गया है। रेगुलेटर के अनुसार, मामलों में आगे की प्रक्रिया नियमों के तहत जारी रहेगी। फिलहाल यह मामला जांच और adjudication के स्तर पर है। ऐसे में अंतिम कार्रवाई या जुर्माने को लेकर फैसला आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।




















