नगर निगम अफसर के ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा80 लाख की कमाई, 2.53 करोड़ का खर्च!

इंदौर। नगर निगम इंदौर में पदस्थ सहायक राजस्व अधिकारी जितेंद्र कुमार पांडेय के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में लोकायुक्त ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। शिकायत और प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर लोकायुक्त की टीम ने अधिकारी से जुड़े इंदौर के दो ठिकानों पर एक साथ सर्चिंग शुरू की है। कार्रवाई के दौरान अधिकारी और उसके परिवार के नाम पर मौजूद संपत्ति, भवन निर्माण, वाहन और अन्य खर्चों से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।
ये भी पढ़ें: रीवा PWD चीफ इंजीनियर ₹50 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार, हर महीने ₹1 लाख मांगे थे
लोकायुक्त एसपी राजेश सहायक के अनुसार जितेंद्र कुमार पांडेय ने करीब 31 वर्ष के सेवाकाल में अपनी ज्ञात और वैध आय की तुलना में अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की। जांच में उनकी कुल अनुमानित वैध आय करीब 80 लाख रुपए आंकी गई है, जबकि अब तक सामने आए रिकॉर्ड के आधार पर करीब 2 करोड़ 53 लाख रुपए का व्यय पाया गया है। इस हिसाब से खर्च वैध आय से करीब 1 करोड़ 73 लाख रुपए अधिक बताया गया है।
ये भी पढ़ें: क्लर्क सुभाष शर्मा की संपत्ति का आंकड़ा बढ़कर हुआ 8.87 करोड़, सात बैंक खाते सील
पत्नी के नाम 40x50 के प्लॉट पर जी+3 भवन
लोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में सबसे बड़ा बिंदु अधिकारी की पत्नी भावना पांडेय के नाम दर्ज संपत्ति को लेकर सामने आया है। आनंद नगर एक्सटेंशन, नवलखा-चितावद, गजाधर नगर क्षेत्र में 40x50 के प्लॉट नंबर 23 पर जी+3 मंजिला भवन का निर्माण कराया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक इस भवन के निर्माण पर करीब 1 करोड़ 20 लाख रुपए खर्च होना पाया गया है। अब लोकायुक्त की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि भवन निर्माण में रकम कहां से आई और इसका भुगतान किस माध्यम से किया गया। संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, निर्माण लागत और आय के स्रोतों का मिलान किया जा रहा है।
ये भी पढ़ें: दमोह: सागर लोकायुक्त की कार्रवाई, सहायक सचिव को 8 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा
दूसरी संपत्ति में बना जी+2 भवन, चल रहा छात्रावास
जांच का दूसरा बड़ा सिरा गजाधर नगर, चितावद स्थित गुलमोहर का बगीचा क्षेत्र में सामने आया है। यहां भूखंड क्रमांक 32 पर अधिकारी की पत्नी के नाम जी+2 मंजिला भवन निर्मित होने की जानकारी जांच में मिली है। इस भवन में छात्रावास संचालित किया जा रहा है। लोकायुक्त के अनुसार इस भवन के निर्माण पर करीब 91 लाख 50 हजार रुपए खर्च किए जाने का अनुमान है। जांच एजेंसी अब छात्रावास से जुड़े दस्तावेज और संपत्ति निर्माण में लगाए गए धन के स्रोत की भी पड़ताल कर रही है।
ये भी पढ़ें: बिजली कंपनी के अधीक्षण यंत्री पर लोकायुक्त का बड़ा शिकंजा: 9 ठिकानों पर एक साथ छापे
पत्नी, बेटे-बेटी के नाम वाहन और दूसरे खर्च भी जांच के घेरे में
अधिकारी के परिवार की संपत्ति का दायरा केवल भवनों तक सीमित नहीं है। प्रारंभिक जांच में पत्नी, पुत्र और पुत्री के नाम चार पहिया और दो पहिया वाहन खरीदने सहित अन्य खर्चों पर करीब 14 लाख रुपए व्यय किए जाने की जानकारी सामने आई है। लोकायुक्त की टीम अब इन सभी संपत्तियों और खर्चों को अधिकारी के सेवाकाल के दौरान प्राप्त वैध आय से जोड़कर देख रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संपत्ति और खर्च के मुकाबले अधिकारी की घोषित और ज्ञात आय कितनी है तथा अतिरिक्त रकम का स्रोत क्या रहा।
80 लाख की आय के सामने 2.53 करोड़ का खर्च
लोकायुक्त की प्रारंभिक गणना के मुताबिक जितेंद्र कुमार पांडेय को पूरे सेवाकाल में करीब 80 लाख रुपए का अनुमानित वेतन प्राप्त हुआ। इसके मुकाबले अब तक करीब 2 करोड़ 53 लाख रुपए का खर्च सामने आया है। यानी आय की तुलना में करीब 1 करोड़ 73 लाख 8 हजार 69 रुपए अधिक खर्च का अंतर पाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार यह अंतर करीब 216.35 प्रतिशत अनुपातहीन संपत्ति के रूप में सामने आया है। हालांकि सर्चिंग अभी जारी है और कार्रवाई पूरी होने के बाद ही संपत्ति, आय और व्यय से जुड़ी तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।












