अगर दोस्त बदला-बदला लगे... तो चुप मत रहिए, बस ये तीन काम कीजि, इंदौर से शुरू हुई नई पहल

'आई सपोर्ट माई फ्रेंड्स' मॉड्यूल लॉन्च, बच्चों में तनाव और मानसिक परेशानी के संकेत पहचानने का मिलेगा प्रशिक्षण
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तो चुप मत रहिए, बस ये तीन काम कीजि, इंदौर से शुरू हुई नई पहल
फ़ोटो प्रशिक्षक कार्यक्रम के दौरान का

इंदौर - आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बच्चे और किशोर भी तनाव, अकेलेपन और मानसिक दबाव से जूझ रहे हैं। कई बार वे अपनी परेशानी किसी से कह नहीं पाते और चुपचाप भीतर ही भीतर टूटते रहते हैं। ऐसे में अगर उनका कोई दोस्त समय रहते उनकी तकलीफ पहचान ले, तो बड़ी अनहोनी टाली जा सकती है। इसी सोच के साथ इंदौर में "आई सपोर्ट माई फ्रेंड्स" मॉड्यूल की शुरुआत की गई है।

 

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दो दिन चला विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम

इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 18 और 19 जुलाई को बाल्यावस्था में होने वाले गैर-संचारी रोगों और मानसिक स्वास्थ्य विषय पर  आयोजित किया गया। इसी दौरान "आई सपोर्ट माई फ्रेंड्स" मॉड्यूल का औपचारिक शुभारंभ किया गया।

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देश के बड़े संस्थानों ने मिलाया हाथ

इस पहल में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (IAP), यूनिसेफ मध्यप्रदेश, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, निमहांस बेंगलुरु और एम्स भोपाल सहित कई राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्देश्य स्कूलों में ऐसा माहौल तैयार करना है, जहां बच्चे अपने दोस्तों की मानसिक और शारीरिक परेशानियों को समय रहते पहचान सकें।

 

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Look, Listen & Link' बनेगा बच्चों का नया मंत्र

इस मॉड्यूल के तहत शिक्षकों और विद्यार्थियों को "Look, Listen & Link" (देखें, सुनें और मदद से जोड़ें) की रणनीति सिखाई जाएगी। यानी यदि कोई बच्चा अचानक उदास रहने लगे, अकेला रहने लगे, गुस्सा करने लगे या उसके व्यवहार में बदलाव दिखे तो उसकी अनदेखी न करें। पहले उसे समझें, फिर उसकी बात ध्यान से सुनें और जरूरत पड़ने पर सही व्यक्ति या विशेषज्ञ तक पहुंचाने में मदद करें।

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सिर्फ पढ़ाई नहीं, अच्छी आदतों पर भी जोर

विशेषज्ञों ने कहा कि बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य केवल इलाज से नहीं बल्कि उनकी जीवनशैली से भी जुड़ा है। इसलिए संतुलित आहार, नियमित खेलकूद, पर्याप्त नींद और मोबाइल-इंटरनेट का सीमित व सुरक्षित उपयोग बेहद जरूरी है। परिवार और स्कूल का सहयोगात्मक वातावरण भी बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।

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क्यों जरूरी है यह पहल?

विशेषज्ञों के अनुसार मानसिक तनाव के शुरुआती संकेत समय पर पहचान लिए जाएं तो कई गंभीर समस्याओं को रोका जा सकता है। कई बच्चे अपनी परेशानी माता-पिता से पहले अपने दोस्तों से साझा करते हैं। ऐसे में यदि दोस्त जागरूक होंगे तो वे समय रहते मदद की पहली कड़ी बन सकते हैं।

 

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हर बच्चे की खामोशी को जिद मत समझिए... हो सकता है वह मदद मांग रहा हो।

अगर आपका बेटा, बेटी, भाई, बहन, छात्र या दोस्त अचानक चुप रहने लगे, अकेले रहने लगे, पहले जैसी खुशी न दिखाए या उसके व्यवहार में बदलाव आए तो उसे डांटने के बजाय उसकी बात सुनिए। कई बार एक संवेदनशील बातचीत, एक भरोसेमंद साथ और समय पर मिली मदद किसी की पूरी जिंदगी बदल सकती है।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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