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भूख हड़ताल के दौरान शरीर कैसे जिंदा रहता है?कब सबसे ज्यादा होता है मौत का खतरा, जानिए क्या कहता है मेडिकल साइंस!

लंबी भूख हड़ताल के दौरान शरीर में क्या बदलाव होते हैं? जानिए 24 घंटे से 21 दिन तक शरीर ऊर्जा कैसे बनाता है, कब फैट और मांसपेशियां टूटने लगती हैं, किन अंगों पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है और अनशन खत्म करने के बाद डॉक्टर किस तरह सुरक्षित तरीके से मरीज का इलाज करते हैं।
कब सबसे ज्यादा होता है मौत का खतरा, जानिए क्या कहता है मेडिकल साइंस!
लंबे अनशन में शरीर खुद को ही खाने लगता है!

लंबे समय तक खाना न खाने पर शरीर कई चरणों से गुजरता है। शुरुआत में शरीर अपने ऊर्जा भंडार का इस्तेमाल करता है, लेकिन समय बढ़ने पर वह खुद की चर्बी और फिर मांसपेशियों को ऊर्जा में बदलने लगता है। अगर भूख हड़ताल बहुत लंबी हो जाए तो कई अंगों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

पहले 24 से 48 घंटे : शरीर ऊर्जा का बैकअप इस्तेमाल करता है

खाना बंद होने के बाद शरीर पहले लिवर और मांसपेशियों में जमा ग्लाइकोजन (ऊर्जा का संग्रहित रूप) का उपयोग करता है। इस दौरान व्यक्ति को तेज भूख, कमजोरी और सिरदर्द महसूस हो सकता है। जब यह भंडार खत्म होने लगता है तो शरीर केटोसिस (Ketosis) की स्थिति में पहुंच जाता है, जहां वह ऊर्जा के लिए जमा चर्बी का इस्तेमाल करना शुरू करता है।

करीब एक हफ्ते बाद : शरीर मांसपेशियां तोड़ना शुरू करता है

जब शरीर की चर्बी कम होने लगती है तो ऊर्जा की जरूरत पूरी करने के लिए वह मांसपेशियों (Muscles) को तोड़ने लगता है। इसे स्टार्वेशन मोड (Starvation Mode) कहा जाता है।

इस दौरान वजन तेजी से घटने लगता है। शरीर बेहद कमजोर हो जाता है। चक्कर आने और उठने-बैठने में परेशानी हो सकती है। ब्लड प्रेशर और नाड़ी (Pulse) कम होने लगती है।

सबसे पहले किन अंगों पर पड़ता है असर?

किडनी पर बढ़ता है दबाव

मांसपेशियां टूटने से शरीर में अपशिष्ट पदार्थ बढ़ जाते हैं। इन्हें बाहर निकालने का काम किडनी करती है। लंबे समय तक भोजन न मिलने और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ने से किडनी पर दबाव बढ़ सकता है और एक्यूट किडनी इंजरी (Acute Kidney Injury) का खतरा हो सकता है।

दिल पर भी बढ़ता है खतरा

भूख हड़ताल के दौरान शरीर में पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी खनिज कम हो सकते हैं। इससे दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है और गंभीर मामलों में जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है।

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21 दिन के बाद क्यों बढ़ जाता है खतरा?

मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, कई सप्ताह तक पर्याप्त पोषण न मिलने पर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों की कार्यक्षमता तेजी से प्रभावित होने लगती है। इस चरण में संक्रमण, अंगों के फेल होने और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा काफी बढ़ जाता है।

ध्यान दें: किसी व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, पानी का सेवन और पहले से मौजूद बीमारियों के आधार पर यह समय अलग-अलग हो सकता है।

लंबी भूख हड़ताल के बाद खाना कैसे शुरू कराया जाता है?

कई दिनों तक भूखे रहने वाले व्यक्ति को अचानक सामान्य भोजन नहीं दिया जाता। ऐसा करने से रीफीडिंग सिंड्रोम (Refeeding Syndrome) नाम की गंभीर स्थिति हो सकती है, जिसमें शरीर अचानक मिले पोषण को सही तरीके से संभाल नहीं पाता।

डॉक्टर कैसे बचाते हैं मरीज की जान?

1. पहले इलेक्ट्रोलाइट्स और विटामिन दिए जाते हैं

डॉक्टर जरूरत पड़ने पर ड्रिप के जरिए शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स और जरूरी विटामिन पहुंचाते हैं।

2. तरल पदार्थ से होती है शुरुआत

शुरुआत में मरीज को बहुत कम मात्रा में नींबू पानी, नारियल पानी, जूस या अन्य तरल पदार्थ दिए जाते हैं।

3. धीरे-धीरे सामान्य भोजन

डॉक्टरों की निगरानी में कई दिनों या हफ्तों तक धीरे-धीरे हल्का और फिर सामान्य भोजन शुरू कराया जाता है, ताकि शरीर सुरक्षित तरीके से सामान्य स्थिति में लौट सके।

लंबी भूख हड़ताल शरीर के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति होती है। शुरुआत में शरीर अपने ऊर्जा भंडार का उपयोग करता है, लेकिन समय बढ़ने पर चर्बी और मांसपेशियां टूटने लगती हैं। यदि अनशन लंबा चले तो किडनी, हृदय और अन्य अंगों पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए ऐसे मामलों में चिकित्सकीय निगरानी और अनशन समाप्त करने की सही प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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