FIR में धाराओं का खेल? बयान में गर्भपात का जिक्र फिर भी FIR में नहीं जोड़ा,जमानत की सूचना नहीं देने का भी आरोप

इंदौर। भगवान गणेश को बुद्धि और विवेक के देवता माना जाता है। लेकिन भगवान गणेश की छत्रछाया में रहने वाली खजराना थाना पुलिस पर यदि एक कॉलेज छात्रा को अपनी शिकायत लेकर बार-बार दर-दर भटकने का आरोप लगे, तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल है। रोज भगवान गणेश के दरबार में पहुंचने वाली पुलिस आखिर उस छात्रा की फरियाद कब सुनेगी
ये भी पढ़ें: CG NEWS: छत्तीसगढ़ में खाद्य सुरक्षा का विस्तार, किसानों को रिकॉर्ड भुगतान से लेकर Grain ATM तक बड़ा बदलाव
मामले में पीड़िता ने खजराना थाना प्रभारी मनोज सेंधव और थाने में पदस्थ उपनिरीक्षक श्रद्धा पंवार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, पुलिस अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
ये भी पढ़ें: कुबेरेश्वर धाम में श्रद्धालु बनकर घुसे मोबाइल चोर, सादी वर्दी में पुलिस ने 6 को दबोचा, कार जब्त
इंस्टाग्राम से शुरू हुई पहचान, शादी के भरोसे पर बढ़ीं नजदीकियां
पीड़िता के मुताबिक वह इंदौर में बीएससी की पढ़ाई के साथ निजी नौकरी भी करती है। इसी दौरान इंस्टाग्राम के माध्यम से उसकी पहचान ऐलेन्द्र राजपूत से हुई। शुरुआत में दोनों के बीच बातचीत हुई और फिर मुलाकातों का सिलसिला बढ़ता गया। पीड़िता का आरोप है कि ऐलेन्द्र ने उसे शादी करने का भरोसा दिया। इसी भरोसे के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और संबंध बने। पीड़िता ने आरोपी की पहचान ऐलेन्द्र राजपूत, पिता गुलाब सिंह राजपूत, निवासी झुकर जोगी, तहसील लटेरी, जिला विदिशा के रूप में बताई है। उसका दावा है कि आरोपी कई बार इंदौर आया और इसी दौरान दोनों के बीच संबंध बने। कुछ समय बाद पीड़िता के गर्भवती होने का पता चला। आरोप है कि इसके बाद आरोपी शादी के वादे से पीछे हट गया और उस पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया। पीड़िता का कहना है कि यहीं से मामला और गंभीर हो गया।
ये भी पढ़ें: आजादी की अनसुनी कहानी लेकर आ रही ‘The Revolutionaries’, 11 सितंबर को प्राइम वीडियो पर होगी रिलीज
बयान में सब बताया, फिर FIR में क्यों नहीं आया?
पीड़िता का सबसे बड़ा सवाल FIR को लेकर है। उसका दावा है कि उसने पुलिस को दिए बयान में दुष्कर्म के साथ अपनी गर्भावस्था और कथित गर्भपात से जुड़े घटनाक्रम की पूरी जानकारी दी थी। इसके बावजूद FIR में इन तथ्यों को शामिल नहीं किया गया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उपनिरीक्षक श्रद्धा पंवार ने उसके बयान में बताए गए तथ्यों के बावजूद FIR में गर्भपात से संबंधित आरोप दर्ज नहीं किए। उसका यह भी दावा है कि न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज धारा 164 के बयान में भी उसने गर्भपात की बात स्पष्ट रूप से बताई थी। यहीं पुलिस की विवेचना पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। यदि ये तथ्य बयान में मौजूद थे, तो फिर जांच में इनका समुचित परीक्षण क्यों नहीं किया गया? पीड़िता की मांग है कि जांच केवल दुष्कर्म के आरोप तक सीमित न रहे। गर्भावस्था, कथित गर्भपात, चिकित्सकीय रिकॉर्ड, उपचार संबंधी दस्तावेज, डॉक्टर की राय और उपलब्ध अन्य साक्ष्यों की भी गंभीरता से जांच की जाए।
ये भी पढ़ें: ग्वालियर-श्योपुर ब्रॉडगेज लाइन पर कैलारस-बीरपुर के बीच 56 किमी रेलखंड का लोकार्पण, बीरपुर तक ट्रेन शुरू
अन्य युवतियों को भी शादी के नाम पर जाल में फंसाने का आरोप
पीड़िता ने आरोपी पर अन्य युवतियों को भी शादी का भरोसा देकर संबंध बनाने का आरोप लगाया है। उसका दावा है कि उसे आरोपी के एक करीबी व्यक्ति से जानकारी मिली कि भोपाल और अन्य जिलों की कुछ युवतियों के साथ भी इसी तरह संपर्क और संबंध बनाए गए। हालांकि, इन अन्य युवतियों से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपी के खिलाफ अन्य युवतियों की कोई शिकायत, पूर्व प्रकरण या अन्य रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं।
ये भी पढ़ें: ‘Mirzapur: The Movie’ को लेकर रवि किशन का बड़ा दावा, बोले- अभी सिर्फ गर्दा उड़ा है, 4 सितंबर को भौकाल होगा!
थाने पहुंची तो सुनवाई नहीं होने का आरोप
पीड़िता का आरोप है कि जब वह अपने मामले में आगे की कार्रवाई की जानकारी लेने और शिकायत लेकर खजराना थाने पहुंचती थी, तो उसकी बात को गंभीरता से नहीं सुना गया। उसने थाना प्रभारी मनोज सेंधव पर गलत व्यवहार करने और उसे डांटकर थाने से लौटाने का आरोप भी लगाया है। पीड़िता का कहना है कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी उसकी शिकायत में कथित गर्भपात से जुड़े तथ्यों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। उसने पुलिस पर आरोपी पक्ष के साथ कथित सांठगांठ और लेन-देन के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी सत्यता जांच का विषय है। पुलिस अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
ये भी पढ़ें: ACB की बड़ी कार्रवाई: दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन गिरफ्तार, जल बोर्ड टेंडर में भ्रष्टाचार मामले में एक्शन
जेल से बाहर आते ही धमकाने का दावा
पीड़िता का एक और गंभीर आरोप आरोपी की जमानत के बाद सामने आया। उसका कहना है कि आरोपी को जमानत मिलने की जानकारी पुलिस की ओर से उसे समय पर नहीं दी गई। पीड़िता का दावा है कि यदि उसे जमानत आवेदन और सुनवाई की जानकारी पहले मिलती तो वह अदालत के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करा सकती थी। पीड़िता के मुताबिक आरोपी के जेल से बाहर आने के बाद उसे कथित तौर पर धमकियां दी गईं। उसने दावा किया कि आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी दी और कुछ संदेशों में पुलिस को पैसे देने संबंधी बात भी लिखी। पीड़िता ने ऐसे कथित संदेशों के स्क्रीनशॉट उपलब्ध कराने की बात कही है। हालांकि, इन डिजिटल संदेशों की स्वतंत्र पुष्टि और तकनीकी जांच होना अभी बाकी है।
ये भी पढ़ें: तमिलनाडु सरकार का बड़ा फैसला, तीसरे बच्चे पर भी मिलेगी 365 दिन की मैटरनिटी लीव

अधिवक्ता मेघा श्रीवास्तव ने भी उठाए विवेचना से जुड़े सवाल
अधिवक्ता मेघा श्रीवास्तव के मुताबिक, आपराधिक मामलों में पीड़िता को आरोपी की जमानत कार्यवाही की जानकारी और अपनी बात रखने का अवसर मिलना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पीड़िता ने अपने बयान में गर्भपात से संबंधित तथ्य बताए हैं तो विवेचना में उन तथ्यों की भी जांच की जानी चाहिए। उनके अनुसार मामले में चिकित्सकीय दस्तावेज, उपचार संबंधी रिकॉर्ड, डॉक्टर की राय और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होगी।












