45 हजार का फोन पानी में डूबा! फूट-फूटकर रोया डिलीवरी बॉय, VIDEO VIRAL

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में मंगलवार को हुई तेज बारिश के बाद शहर का शिव चौक कई फीट पानी में डूब गया। सड़क पर पानी भरने से लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी हुई। इसी दौरान एक डिलीवरी बॉय अपने गिरे हुए मोबाइल को पानी में घंटों तक तलाशता रहा। जब काफी कोशिश के बाद भी फोन नहीं मिला तो वह फूट-फूटकर रोने लगा।
पानी में गिर गया 45 हजार रुपये का मोबाइल
यह युवक रामपुरी निवासी विशाल है, जो डिलीवरी बॉय का काम करता है। मंगलवार को वह खाना लेकर डिलीवरी के लिए शिव चौक से गुजर रहा था। इसी दौरान जलभराव के बीच उसका करीब 45 हजार रुपये का मोबाइल हाथ से छूटकर पानी में गिर गया। मोबाइल गिरते ही विशाल ने अपना काम रोक दिया और पानी में उतरकर फोन तलाशने लगा। वह कभी पानी में हाथ डालकर मोबाइल खोजता तो कभी काफी देर तक पानी को देखता रहता। घंटों की कोशिश के बावजूद जब फोन नहीं मिला तो उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
तीन महीने पहले किस्तों पर खरीदा था फोन
विशाल के लिए यह मोबाइल सिर्फ महंगा फोन नहीं था, बल्कि उसकी रोजी-रोटी का सबसे जरूरी साधन था। डिलीवरी के ऑर्डर इसी फोन पर मिलते थे और इन्हीं ऑर्डर को पूरा करके उसकी कमाई होती थी। बताया जा रहा है कि विशाल ने करीब तीन महीने पहले ही लगभग 45 हजार रुपये का मोबाइल किस्तों पर खरीदा था। अब तक वह सिर्फ तीन किस्तें चुका पाया था, जबकि कई किस्तें अभी बाकी थीं। ऐसे में मोबाइल का पानी में गिरना उसके लिए बड़ा आर्थिक झटका बन गया।
लोगों ने बनाया वीडियो, रोते हुए बताई परेशानी
पानी में मोबाइल तलाशते विशाल का वीडियो वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने बना लिया। लोगों ने जब उससे उसकी परेशानी पूछी तो वह अपने आंसू नहीं रोक सका। विशाल ने बताया कि वह गरीब परिवार से है और डिलीवरी का काम करके अपने घर का खर्च चलाता है। मोबाइल उसके काम का सबसे अहम हिस्सा था। फोन खो जाने से उसकी कमाई का जरिया भी प्रभावित हो गया है।
नगर पालिका से आर्थिक मदद की गुहार
विशाल ने शिव चौक में हुए जलभराव को लेकर नगर पालिका को जिम्मेदार ठहराया। उसका कहना है कि जलभराव की वजह से उसका मोबाइल पानी में गिरा और अब उसके सामने बड़ी आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है। विशाल ने नगर पालिका से आर्थिक मदद की मांग करते हुए कहा कि उसे न्याय मिलना चाहिए और उसका फोन मिलना चाहिए। उसके आंसू सिर्फ 45 हजार रुपये का मोबाइल खोने का दर्द नहीं, बल्कि परिवार की रोजी-रोटी का सहारा छिन जाने की बेबसी भी दिखा रहे थे।











