हनी ट्रैप गैंग:डेयरी दुकान बनी ब्लैकमेलिंग का ठिकाना,भोपाल से मिले एडिटेड फोटो और अनुबंध पत्र

इंदौर के चर्चित हनी ट्रैप और ब्लैकमेलिंग मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। शराब कारोबारी हितेंद्रसिंह उर्फ चिंटू ठाकुर को धमकाकर एक करोड़ रुपये मांगने वाली गैंग अब पुलिस जांच में पूरी तरह बेनकाब होती नजर आ रही है। क्राइम ब्रांच को जांच के दौरान आरोपी श्वेता जैन की भोपाल स्थित डेयरी प्रोडक्ट की दुकान से कारोबारी के कई एडिटेड फोटो और अहम दस्तावेज मिले हैं। पुलिस का दावा है कि इन्हीं फोटो के जरिए कारोबारी को ब्लैकमेल कर मोटी रकम वसूलने की साजिश रची गई थी।
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फोटो एडिट कर बनाया दबाव
क्राइम ब्रांच सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया है कि कारोबारी हितेंद्रसिंह ठाकुर के फोटो एडिट कर उन्हें आपत्तिजनक रूप देने की कोशिश की गई थी। इन फोटो को वायरल करने की धमकी देकर एक करोड़ रुपये की मांग की गई थी। पुलिस को भोपाल में श्वेता जैन की दुकान की तलाशी के दौरान कई फोटो, डिजिटल सामग्री और एक अनुबंध पत्र मिला है।बताया जा रहा है कि यह अनुबंध पत्र कारोबारी के साथ कथित पार्टनरशिप से जुड़ा हुआ है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या गैंग पहले दोस्ती और बिजनेस संबंध बनाती थी, फिर विवाद या दबाव की स्थिति तैयार कर ब्लैकमेलिंग शुरू करती थी।
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डेयरी दुकान बनी ब्लैकमेलिंग का ठिकाना
क्राइम ब्रांच को सूचना मिली थी कि भोपाल स्थित श्वेता जैन की डेयरी प्रोडक्ट दुकान में कुछ अहम सबूत छिपाकर रखे गए हैं। टीम ने जब वहां तलाशी ली तो कई एडिटेड फोटो और दस्तावेज बरामद हुए। पुलिस अब इन फोटो की फॉरेंसिक जांच कराने की तैयारी कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्हें किस तरह एडिट किया गया और किन-किन लोगों तक भेजा गया।
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गैंग में शामिल लोगों की भूमिका
अब तक इस मामले में अलका दीक्षित, श्वेता जैन, रेशू चौधरी, लाखन चौधरी, जितेंद्र पुरोहित, जयदीप दीक्षित और इंटेलिजेंस विभाग में पदस्थ रहे विनोद शर्मा की गिरफ्तारी हो चुकी है। सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
जांच में सामने आया है कि गैंग के अलग-अलग सदस्यों की अलग भूमिका थी।
- अलका दीक्षित गैंग की मुख्य संचालक मानी जा रही है।
- श्वेता जैन कथित तौर पर हाई-प्रोफाइल संपर्क और डिजिटल सामग्री संभालती थी।
- रेशू चौधरी नेताओं, कारोबारियों और रसूखदार लोगों तक पहुंच बनाने का काम करती थी।
- लाखन चौधरी और जयदीप दीक्षित दबाव बनाने और धमकाने में सक्रिय थे।
- विनोद शर्मा पर पुलिस को संवेदनशील जानकारी उपलब्ध कराने का शक है।
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2019 हनी ट्रैप केस से भी जुड़ रहे तार
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी श्वेता जैन 2019 के चर्चित हनी ट्रैप केस में भी शामिल रही है। उस मामले में कई IAS, IPS अधिकारी, मंत्री और विधायकों के कथित वीडियो सामने आए थे। जांच एजेंसियों को शक है कि उसी नेटवर्क और पुराने संपर्कों का इस्तेमाल इस नए ब्लैकमेलिंग गैंग में भी किया जा रहा था। रेशू चौधरी खुद को भाजपा कार्यकर्ता बताकर राजनीतिक गलियारों में सक्रिय रहती थी। पुलिस को उसके मोबाइल और सोशल मीडिया अकाउंट्स से कई नेताओं और मंत्रियों के साथ तस्वीरें भी मिली हैं। इससे जांच एजेंसियां अब गैंग के राजनीतिक संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं।
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एक करोड़ की डिमांड और धमकी
फरियादी हितेंद्रसिंह उर्फ चिंटू ठाकुर ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि आरोपियों ने प्रॉपर्टी कारोबार में पार्टनरशिप नहीं करने पर उन्हें बदनाम करने और फोटो वायरल करने की धमकी दी थी। इसके बदले एक करोड़ रुपये की मांग की गई थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इसी तरह अन्य कारोबारियों और रसूखदार लोगों को भी निशाना बनाया गया था।
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क्राइम ब्रांच बना रही पूरी ‘कुंडली’
क्राइम ब्रांच अब गैंग के सभी सदस्यों की आपराधिक और आर्थिक पृष्ठभूमि खंगाल रही है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मुख्य आरोपी अलका दीक्षित के खिलाफ पहले से 17 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें शराब तस्करी और चोरी जैसे अपराध शामिल हैं। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि गैंग द्वारा वसूली गई रकम कहां निवेश की गई और किन लोगों तक इसका फायदा पहुंचा। डिजिटल डिवाइस, बैंक खातों और सोशल मीडिया चैट की जांच जारी है।












