'हनी ट्रैप' क्या होता है?इंदौर केस से समझिए कैसे शराब कारोबारी को जाल में फंसाकर मांगे 1 करोड़ रुपए

इंदौर में शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान को हनी ट्रैप में फंसाकर ब्लैकमेल करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में क्राइम ब्रांच ने महिला शराब तस्कर अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप, प्रॉपर्टी कारोबारी लाखन चौधरी और हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा समेत कई लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं, इस पूरे मामले की मास्टरमाइंड 2019 के चर्चित हनी ट्रैप केस की आरोपी श्वेता विजय जैन को भी पुलिस ने पकड़ा है।
यह मामला सिर्फ ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बताता है कि आखिर ‘हनी ट्रैप’ कैसे काम करता है और लोग किस तरह इसके जाल में फंस जाते हैं।
आखिर क्या होता है ‘हनी ट्रैप’?
‘हनी ट्रैप’ एक ऐसी साजिश या आपराधिक तरीका है, जिसमें किसी व्यक्ति को प्रेम, दोस्ती, आकर्षण या शारीरिक संबंधों के जाल में फंसाकर उसका फायदा उठाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य होता है ब्लैकमेल करना, पैसे वसूलना, गोपनीय जानकारी हासिल करना, दबाव बनाकर गलत काम करवाना। सरल शब्दों में कहें तो पहले किसी व्यक्ति को भावनात्मक या शारीरिक रूप से अपने करीब लाया जाता है, फिर उसके निजी पलों का इस्तेमाल कर उसे डराया या ब्लैकमेल किया जाता है।
कैसे फंसते हैं लोग हनी ट्रैप में?
1. सोशल मीडिया से होती है शुरुआत
अक्सर अपराधी फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप या लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क करते हैं। नकली प्रोफाइल बनाकर दोस्ती की जाती है।
2. भरोसा जीतने की कोशिश
शुरुआत में मीठी बातें, लगातार चैट और भावनात्मक जुड़ाव बनाया जाता है। कई बार खुद को बिजनेस पार्टनर, मॉडल, अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति बताकर भरोसा जीता जाता है।
3. निजी संबंध बनाए जाते हैं
कुछ मामलों में मुलाकात, पार्टी या वीडियो कॉल के जरिए व्यक्ति को निजी या अंतरंग स्थिति में लाया जाता है। कई बार फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर लिए जाते हैं।
4. फिर शुरू होता है ब्लैकमेल
जैसे ही टारगेट व्यक्ति जाल में फंसता है, उसके निजी फोटो या वीडियो दिखाकर पैसे मांगे जाते हैं। कई बार बदनामी, परिवार को जानकारी देने या सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी जाती है।
किन लोगों को ज्यादा बनाया जाता है निशाना?
हनी ट्रैप गैंग आमतौर पर ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं-
- कारोबारी
- सरकारी अधिकारी
- पुलिस या रक्षा कर्मचारी
- राजनेता
- रसूखदार और पैसे वाले लोग
ऐसे लोगों को इसलिए टारगेट किया जाता है क्योंकि बदनामी के डर से वे कई बार शिकायत करने से बचते हैं।
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हनी ट्रैप से कैसे बचें?
सोशल मीडिया पर सतर्क रहें
अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट या अचानक बढ़ती नजदीकियों से सावधान रहें।
निजी जानकारी साझा न करें
किसी भी व्यक्ति के साथ निजी फोटो, वीडियो या गोपनीय जानकारी साझा करने से बचें।
वीडियो कॉल और रिकॉर्डिंग से सतर्क रहें
ऑनलाइन बातचीत के दौरान कैमरा और निजी बातचीत को लेकर सतर्क रहें।
ब्लैकमेल होने पर तुरंत पुलिस से संपर्क करें
डरने या पैसे देने के बजाय तुरंत साइबर सेल या पुलिस में शिकायत करें।
क्यों खतरनाक है हनी ट्रैप?
हनी ट्रैप सिर्फ पैसों की ठगी नहीं है। कई मामलों में इससे- मानसिक तनाव, सामाजिक बदनामी, आर्थिक नुकसान, पारिवारिक विवाद, आत्महत्या जैसी घटनाएं तक सामने आ चुकी हैं। यही वजह है कि पुलिस और साइबर एजेंसियां ऐसे मामलों को गंभीर अपराध मानती हैं।
क्या है पूरा मामला?
डीसीपी क्राइम राजेश त्रिपाठी के मुताबिक, बाणगंगा इलाके में रहने वाले 45 वर्षीय शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी पहचान द्वारकापुरी निवासी अलका दीक्षित से थी। अलका पर पहले से अवैध शराब तस्करी समेत कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। चौहान के अनुसार, अलका ने उनकी मुलाकात खंडवा निवासी लाखन चौधरी से करवाई थी। लाखन ने खुद को बड़ा निवेशक बताते हुए देवास, धार, खंडवा और आसपास के इलाकों में प्रॉपर्टी बिजनेस में साझेदारी का प्रस्ताव दिया। लेकिन जब हितेंद्र सिंह चौहान ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया, तब कथित तौर पर अलका और लाखन ने उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया।
अश्लील फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी
पीड़ित कारोबारी का आरोप है कि कुछ समय बाद लाखन चौधरी ने उन्हें धमकी दी कि यदि उन्होंने प्रॉपर्टी बिजनेस में 50 प्रतिशत साझेदारी नहीं की, तो उनके निजी और अश्लील फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए जाएंगे। चौहान के मुताबिक, करीब 20 दिन पहले जब वे किसी काम से सुपर कॉरिडोर इलाके में गए थे, तब अलका, उसका बेटा जयदीप और लाखन वहां पहुंचे। आरोप है कि तीनों ने उनके साथ मारपीट की और रुपए नहीं देने पर गोली मारने की धमकी दी। गैंग ने कथित तौर पर एक करोड़ रुपए की मांग करते हुए कहा कि यदि पैसे नहीं दिए तो समाज में उनकी बदनामी कर दी जाएगी।
कैसे खुला पूरा राज?
लगातार धमकियों और ब्लैकमेलिंग से परेशान होकर हितेंद्र सिंह चौहान ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की। शिकायत मिलते ही क्राइम ब्रांच सक्रिय हो गई। 17 मई की रात करीब 2 बजे एडिशनल कमिश्नर और तीन डीसीपी की बैठक हुई। इसके बाद ‘मिशन सीक्रेट’ नाम से एक विशेष ऑपरेशन तैयार किया गया।











