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Honey Girl "रेशु" जोबट के दिग्गज नेता से करीबी-महिला आयोग अध्यक्ष बनने का था सपना!

इंदौर के हनीट्रैप-2026 मामले में गिरफ्तार भाजपा नेत्री रेशु चौधरी को लेकर नए खुलासे सामने आए हैं। सूत्रों के मुताबिक उसकी जोबट के एक प्रभावशाली नेता से करीबी थी और वह राजनीति में बड़ा पद हासिल करना चाहती थी।
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महिला आयोग अध्यक्ष बनने का था सपना!
रेशु चौधरी और श्वेता जैन

इंदौर के चर्चित हनीट्रैप-2026 मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर को ब्लैकमेल करने के मामले में गिरफ्तार हुई रेशु चौधरी को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। पुलिस ने इस मामले में अलका दीक्षित, श्वेता विजय जैन, रेशु चौधरी, जितेंद्र पुरोहित, लाखन चौधरी और जयदीप दीक्षित को गिरफ्तार किया है। लेकिन अब जो कहानी सामने आ रही है, उसने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क की असली मास्टरमाइंड श्वेता जैन थी, जो खुद सामने कम आती थी, लेकिन पर्दे के पीछे से पूरा खेल संचालित कर रही थी। वहीं रेशु चौधरी को गैंग का “फ्रंट फेस” बनाया गया था, जो नेताओं, अफसरों और कारोबारियों तक पहुंच बनाने का काम करती थी।

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जोबट के दिग्गज नेता से थे करीबी संबंध!

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार रेशु चौधरी की जोबट के एक प्रभावशाली नेता से लगातार नजदीकियां थीं। दोनों कई राजनीतिक कार्यक्रमों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साथ नजर आ चुके हैं। बताया जा रहा है कि रेशु राजनीति में तेजी से अपना प्रभाव जमाना चाहती थी और उसे उम्मीद थी कि बड़े नेताओं से करीबी उसे किसी बड़े पद तक पहुंचा सकती है। चर्चा तो यहां तक है कि वह भविष्य में महिला आयोग अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचने का सपना देख रही थी। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बड़े राजनीतिक संपर्कों के बावजूद आखिर रेशु कथित ब्लैकमेलिंग और हनीट्रैप नेटवर्क तक कैसे पहुंची।

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सागर की सामान्य लड़की से हाईप्रोफाइल नेटवर्क तक

बताया जा रहा है कि रेशु चौधरी मूल रूप से सागर के मकरोनिया क्षेत्र की रहने वाली है और सामान्य परिवार से ताल्लुक रखती है। वहीं श्वेता जैन इस तरह के मामलों की पुरानी खिलाड़ी मानी जा रही है। इसी कारण उसने रेशु को अपने नेटवर्क में शामिल किया। सूत्र बताते हैं कि पिछले चुनावों में रेशु ने कई नेताओं के लिए जमकर चुनाव प्रचार किया था। राजनीतिक कार्यक्रमों में उसकी सक्रियता लगातार बढ़ रही थी। यही वजह थी कि वह तेजी से राजनीतिक पहचान बनाना चाहती थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि राजनीतिक संपर्कों और नेताओं तक पहुंच रखने वाली रेशु आखिर हनीट्रैप जैसे जाल में क्यों उतरी? या फिर महत्वाकांक्षा की दौड़ में वह खुद ही ऐसे नेटवर्क में फंसती चली गई?

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पति की मौत के बाद बदली जिंदगी?

सूत्रों के मुताबिक करीब तीन साल पहले रेशु के पति की मौत हो गई थी। इसके बाद वह अपनी मां के साथ रह रही थी। बताया जा रहा है कि पति की मौत के बाद वह पूरी तरह राजनीति और सामाजिक नेटवर्किंग में सक्रिय हो गई थी। पार्टी के बड़े नेताओं और अधिकारियों के संपर्क में रहने के कारण उसे जल्द किसी बड़े राजनीतिक अवसर की उम्मीद थी। लेकिन राजनीति की तेज रफ्तार महत्वाकांक्षा ने उसे ऐसे रास्ते पर ला खड़ा किया, जहां अब पुलिस और जांच एजेंसियां उसके पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।

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जांच एजेंसियां खंगाल रहीं राजनीतिक कनेक्शन

क्राइम ब्रांच अब रेशु चौधरी के मोबाइल डेटा, सोशल मीडिया अकाउंट, कॉल रिकॉर्ड और राजनीतिक संपर्कों की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे और किन प्रभावशाली लोगों तक इसकी पहुंच थी। सूत्रों के अनुसार आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

Hemant Nagle
By Hemant Nagle

हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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