16 साल तक पत्नी को छोड़ अमेरिका में रहा पति: कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

इंदौर के कुटुंब न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 16 साल पहले पत्नी को छोड़कर अमेरिका में बस गए पति को हर माह 50 हजार रुपए भरण-पोषण राशि देने का आदेश दिया है। साथ ही न्यायालय ने ढाई वर्ष पूर्व दायर आवेदन की अवधि से बकाया करीब 15 लाख रुपए की राशि और कानूनी खर्च भी अदा करने के निर्देश दिए हैं।
प्रथम अतिरिक्त न्यायाधीश, कुटुंब न्यायालय इंदौर डॉ. कुलदीप जैन ने यह आदेश पारित किया। मामला अन्नपूर्णा रोड स्थित मिश्रा नगर निवासी 46 वर्षीय महिला से जुड़ा है, जिसने हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत भरण-पोषण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था।
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2010 के बाद पत्नी को छोड़ अमेरिका चला गया पति
महिला ने अदालत को बताया कि वर्ष 2010 के बाद उसके पति ने बिना किसी उचित कारण के उसे छोड़ दिया और अमेरिका जाकर बस गया। इसके बाद उसने पति से संपर्क करने के कई प्रयास किए, लेकिन पति ने न तो कोई जवाब दिया और न ही पत्नी को अपने साथ रखने की पहल की। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पति ने अपना मोबाइल नंबर और अमेरिका का पता तक बदल लिया, ताकि उससे कोई संपर्क न कर सके। इस दौरान वह गुमनाम जीवन जीता रहा और पत्नी को पूरी तरह अकेला छोड़ दिया।
पिता की मौत पर भी नहीं आया इंदौर
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि पति अपने पिता के निधन पर भी इंदौर नहीं आया। बताया गया कि उसे आशंका थी कि यदि वह भारत आया तो पत्नी उसके साथ रहने की मांग कर सकती है। इसलिए उसने वीडियो कॉल के माध्यम से ही अपने पिता के अंतिम दर्शन किए। महिला ने यह भी बताया कि ससुराल पक्ष ने उसे घर से निकाल दिया था, जिसके बाद वह लंबे समय से आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना कर रही है।
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पति बोला- पत्नी शिक्षित है, खुद खर्च उठा सकती है
मामले में पति ने अपनी पत्नी के खिलाफ तलाक का दावा भी पेश किया था। उसने अदालत में तर्क दिया कि पत्नी शिक्षित है और स्वयं कमाकर अपना भरण-पोषण कर सकती है। साथ ही उसने यह भी कहा कि पत्नी ने अपने खर्चों से संबंधित कोई बिल या वाउचर प्रस्तुत नहीं किए हैं। हालांकि अदालत ने पति की दलीलों को पर्याप्त नहीं माना और कहा कि केवल शिक्षित होना यह साबित नहीं करता कि पत्नी आर्थिक रूप से पूरी तरह आत्मनिर्भर है। न्यायालय ने पति की आय, जीवन स्तर और पत्नी की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भरण-पोषण राशि निर्धारित की।
ढाई साल की बकाया राशि भी देनी होगी
वरिष्ठ अधिवक्ता के.पी. माहेश्वरी के अनुसार न्यायालय ने आदेश दिया है कि पति पत्नी को आवेदन प्रस्तुत किए जाने की तारीख से प्रति माह 50 हजार रुपए की दर से राशि अदा करे। इसके साथ ही करीब ढाई साल की बकाया राशि, जो लगभग 15 लाख रुपए बैठती है, उसे भी चुकानी होगी। अदालत ने कानूनी खर्च वहन करने के निर्देश भी दिए हैं।












